जानें राज काज में क्या है खास
अब नए वार्डों पर राजनीति
सूबे में एक तीर से कई शिकार हुए।
एक तीर से कई शिकार :
सूबे में एक तीर से कई शिकार हुए। भाजपा पदाधिकारियों की बैठक में मैडम ने वर्कर्स को लेकर जो अपनी मन की बात की, उसके अपने-अपने हिसाब से कई मायने निकाले जा रहे हैं। कुछ वर्कर इसे तंज बता रहे हैं, तो कइयों ने इसे तारीफ से जोड़ कर देखा है। संयोग से उसी दिन मैडम के खास सिपहलसार ने सोशल मीडिया पर वर्कर्स की व्यथा को वायरल किया, तो उसने भी आग में घी डालने का काम किया। सरदार पटेल मार्ग स्थित बंगला नंबर 51 में बने भगवा वालों के ठिकाने पर चर्चा है कि कड़ी से कड़ी जुड़ी, तो हलचल होना लाजिमी था। मैडम ने अपने अनुभवी अंदाज में वह सबकुछ कह दिया, जो सच है। मैडम के इस तीर से कौन शिकार हुए, उसे तो समझने वाले समझ गए, जो ना समझे वो अनाड़ी है।
अब नए वार्डों पर राजनीति :
गांवों की सरकार के लिए बालोतरा और बाड़मेर जिप के वार्डों का पुनर्गठन क्या हुआ, लोकल पॉलिटिक्स में भूचाल आ गया। सबसे ज्यादा हल्ला हाथ वाले भाई लोग मचा रहे हैं। मचाएं भी क्यों नहीं, मामला उनके फ्यूचर से ताल्लुक रखता है। अब हाथ वाले भाई लोगों को कौन समझाए कि यह तो आप लोगों ने सिखाया है। अपनी बिगड़ती गणित को लेकर गुजरे जमाने में जयपुर, कोटा और जोधपुर की शहरों की सरकार में दो-दो मेयर का फार्मूला लाए थे, अब उसी फार्मूले को भगवा वाले गांवों की सरकार में लागू कर, एक कदम आगे निकल गए। राज का काज करने वाले लंच केबिनों में बतियाते हैं कि इस फार्मूले के बारे में हाथ वाले दल में कोटा वाले भाई साहब और कमल वाले दल में चूरु वाले भाई से ज्यादा समझदार कोई नहीं है, चूंकि राजनीति में जोड़-बाकी और गुणा-भाग करने में दोनों ही लीडर्स का कोई सानी नहीं है।
बिगड़ा जायका :
सूबे में इन दिनों स्टेट सर्विस के ऑफिसर्स का जायका बिगड़ा हुआ है। जायका और किसी वजह से नहीं बल्कि राज के उस ऑर्डर की वजह से बिगड़ा है, जिसमें बड़े साहबों को प्रोपर्टी की घोषणा करने से मुक्त किया गया है। अब राज के इस ऑर्डर से कितना विवाद होगा, यह तो पता नहीं, लेकिन स्टेट सर्विसेस के ऑफिसर्स का जायका जरूर बिगड़ गया। अब छोटे साहबों को कौन समझाए कि बड़े लोगों की मनमर्जी के आगे किसी की नहीं चलती है।
एक जुमला यह भी :
सूबे में इन दिनों एक जुमला जोरों पर है। जुमला भी छोटा-मोटा नहीं बल्कि यूथ लीडर की कार को लेकर है। कार भी लाखों की नहीं बल्कि करोड़ो की है। जुमला है कि थर्ड टर्म सीएम जोधपुर वाले अशोक जी भाई साहब ने झुंझुनूं की पब्लिक की रिफाइंडरी लेने की सलाह को ठुकरा दिया था, लेकिन आरयू से पॉलिटिक्स सीखने वाले मास्टर के बेटे ने वोरियर के जरिए छोटी से उम्र में बड़ा नाम कर मैसेज दे दिया कि शौक पूरा करने के लिए किसी पद की नहीं बल्कि हौसलों की जरूरत है।
-एल. एल. शर्मा
(यह लेखक के अपने विचार हैं)

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