जाने राज-काज में क्या है खास

पोस्टर पॉलिटिक्स से बढ़ी चिन्ता

जाने राज-काज में क्या है खास
स टांग खिंचाई का इलाज करने दिल्ली वालों ने सबसे बड़े वैध को भी भेजा, लेकिन वह भी नब्ज टटोलने में कामयाब नहीं हो पाए।

पोस्टर पॉलिटिक्स से बढ़ी चिन्ता
सूबे में भगवा का राज आएगा या नहीं यह तो पता नहीं, लेकिन उनको मिले शुभ संकेतों के बाद से ही राज की कुर्सी के सपने देखने वालों में टांग खिंचाई जोरों पर है। हो भी क्यूं ना मामला, राज की कुर्सी से ताल्लुक जो रखता है। इस टांग खिंचाई का इलाज करने दिल्ली वालों ने सबसे बड़े वैध को भी भेजा, लेकिन वह भी नब्ज टटोलने में कामयाब नहीं हो पाए। अब देखो ना शनि को सूर्यनगरी में हुई पोस्टर पॉलिटिक्स से आलाकमान तक के चेहरे पर चिन्ता की लकीरें दिखाई देने लगी हैं। चिन्ता भी होना लाजमी था, चूंकि नंबर वन कुर्सी के दावेदारों ने अपने-अपने होर्डिंग्स में एक-दूसरे की फोटो से परहेज जो किया।

चर्चा में जूते
सूबे में इन दिनों नेताओं के साथ जूते भी चर्चाओं में हैं। जनता का जूता कब किस नेता पर खुल जाए, यह पता नहीं चल पाता। जूते का असर इक्कीसवीं सदी के नेताओं पर कितना पड़ता है, यह तो कहा नहीं जा सकता। लेकिन जूता बनाने वाली कंपनियों की कमाई पर इसका जरूर असर पड़ता है। कंपनी वाले पेटेंट कराने के लिए दौड़धूप भी करते हैं। जूते-जूते में फर्क होता है। नेता जब आपस में शब्द बाणों से एक दूसरे पर जूते मार रहे हैं, तो जनता अब हकीकत में उठाने लगी है। जूते उठाने या फिर फेंकने की परम्परा नई नहीं है। यह सिलसिला प्रथम विश्व युद्ध से ही शुरू हो गया था। उस समय जनता ने राजा- महाराजाओं के खिलाफ जूता उठाया तो उनको राज छोड़ना ही पड़ा। अब नेताओं पर सरे आम जूते फेंके जा रहे हैं। राज करने वालों में चर्चा है कि आने वाले समय में जो नेता ज्यादा जूते खाएगा, वो सबसे अच्छा राजनेता साबित होगा। चूंकि जनता इतनी सयानी है कि वह नेताओं के लखणों के आधार पर ही जूता मारेगी।

आपे से बाहर 
सूबे की सबसे बड़ी यूनिवर्सिटी के एक साहब ने अपनी औकात क्या दिखाई, उनकी बिरादरी के लोगों के मुंह शर्म से झुक गए। साहब ने भी आगा पीछा नहीं सोचा और आसोज की भरी दुपहरी में तपने के बाद शाम को ढाणी में यौवन देख आपा खो बैठे। अब उनके संगी साथियों का तर्क है कि यह कोई नई बात नहीं है, हमारे यहां तो यह रिवाज सा बन गया। सूची सौपेंगे तो आंकड़ा सैकड़ा पार कर जाएगा। मामला आजादी के साल अस्तित्व में आई यूनिवर्सिटी से जो जुड़ा है।

एक जुमला यह भी
सूबे में इन दिनों एक जुमला जोरों पर है। जुमला भी छोटा-मोटा नहीं, बल्कि भगवा वालों को लेकर है। जुमला भी फ्यूचर लीडर से ताल्लुक रखता है। सरदार पटेल मार्ग स्थित बंगला नंबर 51 में बने भगवा वालों के ठिकाने पर भी इस जुमले को लेकर काफी खुसरफुसर है। ठिकाने पर हर कोई आने वालों को चटकारे लेकर सुनाया जा रहा है। जुमला है कि भगवा वालों के एक खेमे ने तीनों खेमों की नींद उड़ा रखी है। तीनों खेमों के वर्कर अंदरखाने ही एक्शन प्लान बनाने में पसीने बहा रहे हैं, लेकिन कोई न कोई खामी चट्टान बन कर सामने खड़ी हो जाती है। जबकि एक खेमा ऐसा है, जो खुलकर मैडम के फेवर में है और पूरी ताकत के साथ पसीना भी बहा रहा हैं। वर्कर्स के साथ पब्लिक भी ऐसी दीवानी है कि मैडम जहां भी जाती है, अपने आप उमड़ जाती है। पब्लिक की इस दीवानगी को समझने वाले समझ गए, ना समझे वो अनाड़ी हैं।

Read More दक्षिणी चीन में बाढ़ ने मचाई तबाही, बांध टूटने से हुआ बड़ा हादसा

- एलएल शर्मा

Read More वेनेजुएला में धरती थमी, लेकिन नहीं थमा संकट

 

Read More अमिट है महाप्रभु जगन्नाथ दर्शन की मेरी स्मृति

Post Comment

Comment List

Latest News

राज्यपाल के मराठी भाषा निर्देश का गोविन्द डोटासरा ने किया विरोध, कहा- राजस्थानी भाषा को संवैधानिक मान्यता दिलाने में विफल रही सरकार राज्यपाल के मराठी भाषा निर्देश का गोविन्द डोटासरा ने किया विरोध, कहा- राजस्थानी भाषा को संवैधानिक मान्यता दिलाने में विफल रही सरकार
पीसीसी चीफ गोविंद डोटासरा ने राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े के विश्वविद्यालयों में मराठी भाषा लागू करने के निर्णय का विरोध किया।...
कुमारी सैलजा का दावा, सचमुच राहुल गांधी ने डर गई भाजपा सरकार, बोली- कार्यक्रम का स्थान बदलने से नहीं दबेगी छात्रों की आवाज़ 
वर्ल्ड कप फाइनल में आमने-सामने होंगे मेसी और यमल, 19 साल पुरानी तस्वीर बनी चर्चा का केंद्र
उमर अब्दुल्ला ने वांगचुक के अनशन पर उठाएं सवाल : केंद्र सरकार इस मुद्दे पर चिंतित नहीं, कहा- राजनीति में मानवता के लिए होना चाहिए स्थान
जोधपुर में दो दर्दनाक सड़क हादसे: इलाज के दौरान महिला और बाइक सवार की मौत, पुलिस जांच में जुटी
कीव पहुंचकर ब्रिटिश पीएम स्टार्मर का बड़ा ऐलान, बोले-यूक्रेन के लिए ब्रिटेन का समर्थन हर हाल में रहेगा अटूट
विदेश दौरों को लेकर राजभर का अखिलेश पर हमला: चुनाव के लिए विदेशी कंपनी की ली मदद, जातीय संघर्ष भड़काने का लगाया आरोप