विशेष उल्लेखनीय है स्वदेशी रक्षा प्रणाली की प्रगति
तकनीक से युक्त
आधुनिक युग में विश्व के किसी भी राष्ट्र की महत्ता जिन शक्तिशाली संसाधनों के आधार पर निर्धारित होती है, उनमें युद्धक अस्त्र-शस्त्र प्रथम हैं।
आधुनिक युग में विश्व के किसी भी राष्ट्र की महत्ता जिन शक्तिशाली संसाधनों के आधार पर निर्धारित होती है, उनमें युद्धक अस्त्र-शस्त्र प्रथम हैं। भारत के संदर्भ में विचार किया जाए, तो गत साढ़े आठ दशकों से इस दिशा में यहां उत्तरोत्तर प्रगति होती रही। हमारे रक्षा वैज्ञानिकों, अनुसंधानकर्ताओं तथा अन्यान्य संबद्ध कर्मचारियों ने राजनीतिक इच्छाशक्ति के साथ मिलकर इस संबंध में अविस्मरणीय कार्य किये हैं। विशेषकर गत चौदह-पंद्रह वर्षों में रक्षा अनुसंधान, निर्माण, उत्पादन, मित्र राष्ट्रों के साथ सहयोग पर आधारित आधुनिक रक्षण प्रणालियों की खोज व निर्माण तथा अंतत: रक्षा उपकरणों के निर्माण में आत्मनिर्भर होने के बाद निर्यात में भी अग्रिम पंक्ति के देशों में सम्मिलित होने की उपलब्धि सराहनीय है। भारत की स्वदेशी रक्षा प्रणाली पिछले एक दशक में आयात निर्भरता से आत्मनिर्भरता की ओर तीव्रतापूर्वक बढ़ी है।
वैश्विक स्तर पर :
2026 तक भारत ने रक्षा क्षेत्र में न केवल अपनी तकनीकी व प्रौद्योगिकीय क्षमता को सिद्ध किया है, बल्कि हमारा देश वैश्विक स्तर पर एक प्रमुख रक्षा निर्यातक के रूप में भी उभरा है। आज यहां आधुनिक अस्त्र-शस्त्रों का बड़े पैमाने पर नवोन्नत ढंग से निर्माण हो रहा है। नित नवीन स्वदेशी रक्षा प्रणालियां विकसित की जा रही हैं। इस क्षेत्र में मित्र देशों के साथ खोज से लेकर उत्पादन तक उपयोगी साझेदारियां भी की जा रही हैं। वर्तमान में देश की आधुनिक प्रक्षेपास्त्र प्रणाली एक बड़ी उपलब्धि है। यह प्रक्षेपास्त्रीय तकनीक विश्व की सबसे उन्नत प्रणालियों में से एक है। इस उन्नतिकरण में इंटीग्रेटेड गाइडेड मिसाइल डेवलपमेंट प्रोग्राम की विशाल भूमिका रही है। इसके अंतर्गत अग्नि-5 और अग्नि-6 अति उल्लेखनीय है। इस वर्ष तक भारत की अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता अत्यधिक परिष्कृत हो चुकी है।
तकनीक से युक्त :
इस प्रयास से प्रेरित होकर अब अग्नि-6 का निर्माण हो रहा है, जो मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टार्गेटेबल रीएंट्री व्हीकल तकनीक से युक्त है। गत वर्ष मई माह में ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान के साथ हुये अल्पावधि के युद्ध में देशवासियों ने ब्रह्मोस प्रक्षेपास्त्र का युद्धक प्रदर्शन देखा ही था, कि कैसे इस वायु अस्त्र ने शत्रु देश के चिन्हित ठिकानों को ध्वस्ताधूत किया था। ब्रह्मोस दुनिया की सबसे तेज सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है। भारत अब इसके हाइपरसोनिक संस्करण ब्रह्मोस-दो पर काम कर रहा है, जो मैक 7 से अधिक गति प्राप्त करने में सक्षम है। प्रलय मिसाइल का भी उल्लेख हो रहा है। यह एक कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल है, जिसे विशेष रूप में पारंपरिक युद्ध के लिए डिजाइन किया गया है। ये चीन और पाकिस्तान की सीमाओं पर भारत की आक्रामक क्षमता को में वृद्धि करती है। राष्ट्र की वायु रक्षा प्रणाली भी प्रशंसनीय है।
वायु रक्षा प्रणाली :
आकाश कम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल है, जिसके नए संस्करण आकाश प्राइम में स्वदेशी एक्टिव रेडियो फ्रीक्वेंसी सीकर लगा है। वीशॉर्ड्स नामक एक मैनपैड मिसाइल भी भारत में बनी है। ये बहुत कम दूरी की वायु रक्षा प्रणाली है, जो युद्धक प्रतिरोध के लिये विश्वसनीय होने के साथ-साथ पर्वतों में सैनिकों द्वारा सुगमता से कंधे पर लादकर उपयोग की जा सकती है। समर का उल्लेख भी आवश्यक है। ये भारतीय वायु सेना द्वारा विकसित प्रणाली है, जो पुरानी रूसी मिसाइलों को आधुनिक लॉन्चर के साथ जोड़कर बनाई गई है। इस समय स्वदेशी लड़ाकू विमान और हेलीकॉप्टर के विनिर्माण में भी तेजी आई है। भारतीय वायु सेना मेक इन इंडिया के अंतर्गत विकसित विमानों पर अधिक भरोसा कर रही है। तेजस एमके1, एवं एमके2 भी नवोन्नत विमान हैं। यह एक हल्का, चौथी पीढ़ी का बहुउद्देशीय लड़ाकू विमान है।
उत्पादन और परीक्षण :
इस वर्ष तेजस मार्क-2 का उत्पादन और परीक्षण अंतिम चरणों में है, जो राफेल के स्तर की तकनीक से लैस है। इसके अतिरिक्त एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट भी भारत का पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ फाइटर प्रोग्राम है। यह दुश्मन के रडार से बचने की क्षमता रखता है। साथ ही एलसीएच प्रचंड भी रक्षा हेतु एक अति उपयोग अस्त्र है। ये दुनिया का एकमात्र लड़ाकू हेलीकॉप्टर है जो 5000 मीटर की ऊंचाई सियाचिन जैसे क्षेत्रों पर आवश्यकतानुसार उतर सकता है और उड़ान भर सकता है। थल एवं नभ ही नहीं, अपितु समुद्र में भी स्वदेशी रक्षा शक्ति नित नवीन उपलब्ध्यिां अर्जित कर रही है। भारतीय नौसेना का लक्ष्य 2030 तक पूरी तरह स्वदेशी जलयान का निर्माण करना है। आईएनएस विक्रांत इस लक्षित कार्य की दिशा में पहले से अर्जित एक उपलब्धि है ही। यह भारत का पहला स्वदेशी विमानवाहक पोत हैं।
तकनीक और ड्रोन :
भारत की न्यूक्लियर ट्रायड,जल, थल और नभ से परमाणु हमले की क्षमता को पूर्ण करती हैं। आधुनिक युद्ध अब धरातल पर सैनिकों द्वारा नहीं, अपितु तकनीक और ड्रोन आधारित हो चुके हैं। इस बिंदु को ध्यान में रख तपस बीएच-201 तैयार है। यह एक स्वदेशी मीडियम एल्टिट्यूड लांग एंड्युरेंस यानी कि मेल ड्रोन है, जो निगरानी और गुप्त जानकारी एकत्र करने के लिए बनाया गया है। डीआरडीओ ने एक एंटी-ड्रोन सिस्टम डी-4 प्रणाली विकसित की है जो शत्रु के ड्रोन को निष्क्रिय कर सकती है या लेजर से नष्ट कर सकती है। रक्षा क्षेत्र में आधुनिक खोजों तथा तकनीक को बढ़ावा देने के उद्देश्य से रक्षा उत्कृष्टता हेतु नवप्रवर्तन पर ध्यान दिया जा रहा है, जिसके द्वारा स्टार्टअप्स और एमएसएमई को रोबोटीकरण, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और क्वांटम कंप्यूटिंग जैसे क्षेत्रों में रक्षा समाधान खोजने हेतु प्रोत्साहित किया जा रहा है।
-विकेश कुमार बडोला
यह लेखक के अपने विचार हैं।

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