बिटूमिन महंगा : सड़कों की रफ्तार थमी, सैकड़ों प्रोजेक्ट्स पर संकट; निर्माण एजेंसियों के लिए बना पुराने टेंडर पर काम करना घाटे का सौदा
अन्य राज्यों ने दी राहत, राजस्थान पीछे
मिडिल ईस्ट तनाव का असर सड़कों पर दिखने लगा है। कच्चे तेल के साथ बिटूमिन महंगा होने से राजस्थान की 300 से ज्यादा सड़क परियोजनाएं प्रभावित हैं। छोटे ठेकेदार घाटे में काम करने को मजबूर हैं, कई प्रोजेक्ट धीमे पड़ गए। जहां केन्द्र, NHAI और हरियाणा ने राहत दी, वहीं राजस्थान में मदद नहीं मिलने से ठेकेदार अब आंदोलन की तैयारी में हैं।
जयपुर। मिडिल ईस्ट में बने तनावपूर्ण हालात के चलते कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है, जिसका सीधा असर सड़क निर्माण में उपयोग होने वाले बिटूमिन पर पड़ा है। बिटूमिन के दाम बढ़ने से राजस्थान में सड़क परियोजनाओं की लागत में भारी इजाफा हुआ है। अब कई प्रोजेक्ट्स की रफ्तार धीमी पड़ने लगी है। राज्य में अनुमानित 300 से अधिक सड़क प्रोजेक्ट्स इस बढ़ती लागत और भुगतान में देरी के कारण प्रभावित हो रहे हैं। निर्माण से जुड़ी एजेंसियों के अनुसार अचानक बढ़ी लागत के कारण पुराने टेंडर पर काम करना घाटे का सौदा बन गया है। ऐसे में छोटे और मध्यम ठेकेदार सबसे ज्यादा दबाव में हैं। कई जगह काम आंशिक रूप से रोकना पड़ा है। कुछ परियोजनाएं तय समय से पीछे चल रही हैं।
अन्य राज्यों ने दी राहत, राजस्थान पीछे
केन्द्र सरकार ने हालात को देखते हुए 2 से 4 महीने तक फोर्स मेज्योर लागू कर राहत दी है। सीपीडब्ल्यूडी और एनएचएआई ने भी प्राइस एस्केलेशन और भुगतान व्यवस्था में लचीलापन दिखाया है। हरियाणा ने तो ठेकेदारों को 53 दिन की अतिरिक्त समय सीमा और लागत समायोजन की मंजूरी दे दी है। वहीं दूसरी ओर राजस्थान में छोटे ठेकेदारों को अभी तक पर्याप्त राहत नहीं मिल पाई है, जिससे असंतोष बढ़ता जा रहा है।
आंदोलन की तैयारी
निर्माण सामग्री की महंगाई और भुगतान संकट से जूझ रहे छोटे ठेकेदार अब आंदोलन की तैयारी में हैं। कॉन्ट्रैक्टर भूराराम चौधरी का कहना है कि कई बार सरकार को अवगत कराने के बावजूद समाधान नहीं निकला।

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