प्राइवेट यूनिवर्सिटी की फर्जी डिग्री का मामला गूंजा, सरकार ने आयोग गठन पर कार्यवाही प्रक्रियाधीन बताई
विधायक कालीचरण ने सवाल उठाया
राजस्थान विधानसभा में निजी विश्वविद्यालयों में अनियमितताओं का सवाल उठा। विधायक कालीचरण ने यह सवाल उठाया। जबाव में डिप्टी सीएम डॉ. प्रेमचंद बैरवा ने जवाब देते हुए कहा कि प्रदेश में कुल 53 निजी विश्वविद्यालय संचालित हैं।
जयपुर। राजस्थान विधानसभा में निजी विश्वविद्यालयों में अनियमितताओं का सवाल उठा। विधायक कालीचरण ने यह सवाल उठाया।
जबाव में डिप्टी सीएम डॉ. प्रेमचंद बैरवा ने जवाब देते हुए कहा कि प्रदेश में कुल 53 निजी विश्वविद्यालय संचालित हैं। 10 निजी विश्वविद्यालयों के खिलाफ शिकायत प्राप्त हुई, जिनके खिलाफ जांच के आदेश दिए हैं। ओपीजेएस विश्वविद्यालय चूरू, सिंघानिया विश्वविद्यालय चूरू, सनराइज विश्वविद्यालय अलवर, मेवाड़ विश्वविद्यालय चित्तौड़गढ़, माधव विश्वविद्यालय सिरोही, राफेल्स विश्वविद्यालय अलवर, निर्वाण विश्वविद्यालय जयपुर, यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी जयपुर, जगदीश झाबरमल टिंबरेवाल झुंझुनूं, श्रीधर विश्वविद्यालय सभी का नाम बताया सदन में, भूपाल विश्वविद्यालय उदयपुर में शारीरिक शिक्षक भर्ती परीक्षा में अनियमितता हुई थी, उसकी जांच एसओजी से करवाई गई थी, 7 जनवरी 2026 को ओपीजेएस चूरू का परिसमापन कर दिया। संभागीय आयुक्त को प्रशासक नियुक्त कर दिया गया। शेष विश्वविद्यालयों की जांच प्रक्रिया में है। बैक डेट में अंक तालिकाएं देने के मामले की शिकायतें मिली थी, मामले में भी कार्रवाई की गई। बैरवा ने कहा कि सभी प्रकरणों के अनुसंधान जारी है। कालीचरण सराफ ने पूरक प्रश्न में कहा कि क्या निजी विश्वविद्यालय में अनियमितताएं फर्जी डिग्री और धांधली के मामले आने के बाद उनके नियंत्रण के लिए सन 2024 में नियामक आयोग गठित करने का खाका तैयार करने के लिए 2 कुलपति के साथ 5 सदस्य कमेटी का गठन किया था, उस कमेटी ने क्या रिपोर्ट दी,सरकार ने क्या कार्रवाई की। बैरवा ने कहा कि विगत सरकार ने विनियामक आयोग गठन के लिए तत्कालीन अंबेडकर विवि कुलपति की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया, समिति का प्रारूप तैयार करके राज्य सरकार को प्रस्तुत किया गया था, राजस्थान प्राइवेट हायर एजुकेशन अथॉरिटी बिल का प्रारूप तैयार करके विधि विभाग को भेजा गया था, विभाग स्तर पर निजी विश्वविद्यालयों की गाइड लाइंस में भी संशोधन किया जा रहा है, जल्द ही बिल को पेश किया जाएगा। सराफ ने पूछा कि देश के कई प्रदेशों में निजी विश्वविद्यालय को नियमित नियंत्रण करने के लिए नियामक आयोग बने हुए हैं, क्या दूसरे राज्यों की तर्ज पर भी विनियामक आयोग बनेंगे। दो साल से प्रक्रियाधीन है आखिर कितने साल लगेंगे। इस पर बैरवा ने कहा कि नीतिगत निर्णय है, विधि विभाग में जाएगा, फिर कैबिनेट में जाएंगे।

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