नरेगा में बदलाव के विरोध में कांग्रेस ने किया उपवास, बड़े नेता भी हुए शामिल
मनरेगा के बदले स्वरूप के विरोध में कांग्रेस का मौन सत्याग्रह
जयपुर के शहीद स्मारक पर कांग्रेस ने 'मनरेगा बचाओ संग्राम' के तहत उपवास किया। नेताओं ने केंद्र के नए VB-G RAM G कानून को मजदूरों के अधिकारों पर हमला बताते हुए पुराने स्वरूप की बहाली की मांग की।
जयपुर: कांग्रेस पार्टी द्वारा केंद्र सरकार के मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) में बदलाव और इसके नाम को वीबी-जी राम जी जैसे नए रूप में बदलने के विरोध में चलाए जा रहे राष्ट्रव्यापी मनरेगा बचाओ संग्राम अभियान के दूसरे दिन रविवार को जयपुर में शहीद स्मारक पर एक दिवसीय उपवास और मौन सत्याग्रह का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे तक चला, जिसमें कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता शामिल हुए।
इस उपवास कार्यक्रम में मुख्य रूप से प्रदेश कांग्रेस प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली (टिका राम जुली) सहित कई अन्य प्रमुख नेता मौजूद रहे। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने इस दौरान केंद्र सरकार पर ग्रामीण मजदूरों के संवैधानिक अधिकारों पर हमला करने का आरोप लगाते हुए मनरेगा को उसके मूल अधिकार-आधारित स्वरूप में बहाल करने की मांग की।यह अभियान 10 जनवरी से शुरू होकर 25 फरवरी तक चलेगा, जिसमें जिला स्तर पर प्रेस कॉन्फ्रेंस, उपवास, प्रतीकात्मक विरोध प्रदर्शन और ग्राम पंचायतों में जनसंपर्क कार्यक्रम शामिल हैं।
कांग्रेस का कहना है कि नया कानून मनरेगा की मूल भावना को कमजोर कर रहा है और पंचायतों के अधिकारों को छीन रहा है।कार्यक्रम के दौरान मौन सत्याग्रह के साथ कार्यकर्ताओं ने मनरेगा की महत्ता और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में इसकी भूमिका पर जोर दिया। यह प्रदर्शन प्रदेशभर में इसी तरह आयोजित किए जा रहे हैं, जहां कांग्रेस कार्यकर्ता गरीबों और मजदूरों के अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुट दिखे।कांग्रेस नेताओं ने कहा कि यह संघर्ष तब तक जारी रहेगा, जब तक केंद्र सरकार मनरेगा को मूल रूप में बहाल नहीं करती। इस अभियान से ग्रामीण क्षेत्रों में व्यापक समर्थन जुटाने का प्रयास किया जा रहा है।

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