अजमेर में दलित बच्ची से दरिंदगी न्याय व्यवस्था पर हमला : भाजपा सरकार में कानून-व्यवस्था और सामाजिक न्याय पर सवाल खड़े कर रही घटना, डोटासरा बोले- सरकार के संरक्षण में आरोपियों को बचाया
पीड़ित परिवार को लंबे समय तक धमकाकर चुप रखा
दलित बच्ची से सामूहिक दुष्कर्म मामले पर पीसीसी चीफ गोविन्द डोटासरा ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कानून-व्यवस्था व सामाजिक न्याय पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि आरोपियों को संरक्षण मिला, कार्रवाई टली और पीड़ित परिवार को धमकाया गया। डोटासरा ने इसे न्याय व्यवस्था पर गंभीर हमला बताया।
जयपुर। अजमेर में एक दलित बच्ची के बाद दरिंदगी की घटना पर पीसीसी चीफ गोविन्द डोटासरा ने कानून व्यवस्था को लेकर भाजपा सरकार पर हमला बोला है। डोटासरा ने कहा कि अजमेर में 15 वर्षीय दलित बच्ची के साथ सामूहिक दुष्कर्म की घटना भाजपा सरकार में कानून-व्यवस्था, और सामाजिक न्याय पर गंभीर सवाल खड़े करती है। जुलाई 2024 की घटना के बाद भाजपा सरकार के सरंक्षण में आरोपियों को बचाया गया और उल्टा पीड़ित परिवार को लंबे समय तक धमकाकर चुप रखा गया, लेकिन पीड़िता के गर्भवती होने पर सच्चाई सामने आई। सबसे चिंताजनक प्रश्न पुलिस की कार्यप्रणाली पर है। दिल्ली में जीरो एफआईआर दर्ज होने के बाद केस अजमेर ट्रांसफर हुआ, लेकिन मजिस्ट्रेट के सामने बयान होने के 8 महीने बाद भी ठोस कार्रवाई नहीं की गई। इतना ही नहीं पीड़ित परिवार ने जब समझौते से मना किया, तो उन पर जानलेवा हमला किया गया।
दोषियों को बचाने और पीड़ित को दबाने की भरसक कोशिश की गई। देश में दलित उत्पीड़न के 76 प्रतिशत मामले भाजपा शासित राज्यों में हैं, जिनमें राजस्थान शीर्ष राज्यों में शामिल है, जो इनकी दलित विरोधी सोच को उजागर करता है। भाजपा के शासन में दरिंदें आजाद घूम रहे हैं, और पीड़ित न्याय के भटक रहे हैं। अजमेर में दलित बच्ची से दरिंदगी की ये घटना केवल एक अपराध नहीं, बल्कि न्याय व्यवस्था पर हमला है।

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