साइबर फ्रॉड (डिजिटल अरेस्ट) : 2025 में हजारों करोड़ की ठगी, हर राज्य का नागरिक निशाने पर; सबसे ज्यादा साइबर फ्रॉड का नुकसान महाराष्ट्र में

डिजिटल अरेस्ट स्कैम की हिस्सेदारी करीब 8 प्रतिशत मानी जा रही है

साइबर फ्रॉड (डिजिटल अरेस्ट) : 2025 में हजारों करोड़ की ठगी, हर राज्य का नागरिक निशाने पर; सबसे ज्यादा साइबर फ्रॉड का नुकसान महाराष्ट्र में

साइबर फ्रॉड से कुल नुकसान लगभग 20 हजार करोड़ रुपए आंका गया है, जिसमें डिजिटल अरेस्ट स्कैम की हिस्सेदारी करीब 8 प्रतिशत मानी जा रही है।

जयपुर। साल 2025 में देशभर में साइबर अपराध का सबसे डरावना और तेजी से फैलता चेहरा बनकर सामने आया है डिजिटल अरेस्ट स्कैम। फर्जी सीबीआई, ईडी, पुलिस और कस्टम अधिकारी बनकर ठग लोगों को वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी का डर दिखाते हैं और कुछ ही घंटों में उनकी जीवनभर की कमाई हड़प लेते हैं। इस ठगी का दायरा अब महानगरों से निकलकर छोटे शहरों और कस्बों तक फैल चुका है। महाराष्टÑ और कर्नाटक के बाद दिल्ली इस स्कैम का बड़ा उदाहरण बनकर उभरी है, जहां 2025 में अब तक करीब 1200 करोड़ रुपए की ठगी दर्ज की गई है। लेकिन यह समस्या केवल राजधानी तक सीमित नहीं है। पूरे भारत में 2025 के दौरान साइबर फ्रॉड से कुल नुकसान लगभग 20 हजार करोड़ रुपए आंका गया है, जिसमें डिजिटल अरेस्ट स्कैम की हिस्सेदारी करीब 8 प्रतिशत मानी जा रही है।

पूरा भारत
- कुल साइबर फ्रॉड नुकसान (सभी प्रकार): लगभग 19,812.96 करोड़। 
- इसमें अनुमानत: 8% हिस्सा डिजिटल अरेस्ट स्कैम से जुड़ा है। 
- डेटा सभी साइबर फ्रॉड (जैसे निवेश धोखाधड़ी, बैंक/क्रेडिट कार्ड धोखाधड़ी, फिशिंग, ई-कॉम फ्रॉड, २ी७३ङ्म१३्रङ्मल्ल, डिजिटल अरेस्ट आदि) को मिलाकर है, क्योंकि केंद्र सरकार / ठउफढ आमतौर पर हर फ्रॉड को अलग-अलग कैटेगरी में नहीं दिखाती। 
- मुंबई में इसी तरह के मामलों में 142 डिजिटल अरेस्ट रिपोर्ट और 114 करोड़ का नुकसान हुआ। 
- कर्नाटक में सिर्फ डिजिटल अरेस्ट ही लगभग 144.59 करोड़ का नुकसान हुआ। 
- 2025 में कुल साइबर फ्रॉड शिकायतें 21,77,524 तक पहुँच गईं-यह पिछले वर्षों की तुलना में रिकॉर्ड स्तर है। 
- डिजिटल फ्रॉड में निवेश धोखाधड़ी लगभग 77% हिस्सा लेता है, जबकि डिजिटल अरेस्ट ने लगभग 8% हिस्सा लिया है। 

2025 राज्यवार साइबर फ्रॉड / डिजिटल अरेस्ट नुकसान अनुमान ( करोड़)
राज्य / केंद्रशासित क्षेत्र               अनुमानित नुकसान (2025)                   टिप्पणी  
महाराष्ट्र                                    3,203 करोड़                          सबसे ज्यादा साइबर फ्रॉड नुकसान; डिजिटल अरेस्ट इसका हिस्सा
कर्नाटक                                       2,413 करोड़                          बड़े सिंगल-स्टेट कैपिटल के रूप में फ्रॉड 
तमिलनाडु                                    1,897 करोड़                          उच्च डिजिटल जुड़ाव से प्रभावित                         
उत्तर प्रदेश                                    1,443 करोड़                          बहुत बड़ी शिकायत संख्या                                   
तेलंगाना                                     1,372 करोड़                          फ्रॉड / चोरी के मामलों में भारी हिस्सा                
गुजरात                                    1,312 करोड़                          निवेश / फिशिंग सहित साइबर फ्रॉड                        
दिल्ली                                    1,163 करोड़                          डिजि  टल अरेस्ट में उल्लेखनीय नुकसान                    
पश्चिम बंगाल                         1,074 करोड़                          उच्च शिकायतें और नुकसान        

                    
राज्य (अन्य बड़े)                                                 
मध्य प्रदेश                 800-1,000 करोड़ अनुमानित      उच्च डिजिटल भुगतान उपयोग के साथ फ्रॉड मामलों में वृद्धि  
हरियाणा                 630 करोड़ राज पुलिस के            साइबर फ्रॉड रोकने में कुछ सफलता  

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अनुसार ब्लॉक राशि              
बिहार                       500-700 करोड़ अनुमानित           बढ़ते साइबर फ्रॉड शिकायतें                               
केरल                        400-600 करोड़ अनुमानित           उच्च जागरूकता बावजूद फ्रॉड                        
राजस्थान                   500-800 करोड़ अनुमानित            साइबर सेल सक्रिय                        
उत्तराखंड/उत्तराखंड         200-400 करोड़ अनुमानित           फ्रॉड शिकायतें बढ़ी   
हिमाचल प्रदेश                       180 करोड़                       अभी कम लेवल पर 
असम     200 करोड़             पूर्वात्तर में सबसे ज्यादा 
छोटे राज्य/यूटीएस               100-300 करोड़ अनुमानित    कम शिकायतें, पर जोखिम मौजूद                           
(आंकड़े, राज्य पुलिस और साइबर सेल के 2025 के आकलन पर आधारित हैं; डिजिटल अरेस्ट इसमें एक प्रमुख श्रेणी है।)

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चाहे कुछ हो जाए भूलकर न करें ये 5 चीजें
एक चीज गांठ बांध लें, बैंक की जानकारी या ओटीपी कभी भी किसी के साथ फोन या ईमेल पर कभी भी साझा न करें।
अगर कभी आपके पास ऐसे कॉल आते हैं तो घबराएं नहीं। न ही डर के मारे फोन पर मिलने वाले सारे आदेश मानें।
ये बात हमेशा याद रखें कि कोई भी सरकारी एजेंसी फोन पर पैसा या खाते की जानकारी नहीं 
मांगती है।
अगर कोई कॉलर आपको संदिग्ध लग रहा है तो उसके साथ लंबे समय तक बात न करें।
अगर कोई फोन कॉल आपको संदिग्ध लग रही है तो उसे काटने में हिचकिचाएं नहीं। याद रखिए सरकारी एजेंसी आपको फोन नहीं डराती है।
कोई कॉल आए तो सबसे पहले करें ये काम
कॉल पर खुद को सरकारी अधिकारी बताता है तो घबराने के बजाय अच्छे से वेरिफिकेशन कर लें। इसके लिए संबंधित सरकारी दफ्तर में कॉल कर लें
शांत रहें और संयम बनाए रखें क्योंकि साइबर ठगों का सबसे बड़ा हथियार आपका डर है। बस इसे हावी न होने दें।
अगर आपके पास कोई संदिग्ध कॉल आती है तो तुरंत स्थानीय पुलिस स्टेशन में कॉल करें या साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें।
साइबर क्राइम की वेबसाइट  पर जाकर भी आप शिकायत कर सकते हैं।

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सरकारी प्रयास और चुनौती
कई राज्यों में साइबर थाने और विशेष टास्क फोर्स बनाई गई हैं। कुछ मामलों में ठगी की रकम को समय रहते फ्रीज भी किया गया, लेकिन संगठित गिरोहों और विदेशी कॉल रूटिंग के कारण कार्रवाई अब भी चुनौती बनी हुई है।

डरने से पहले जान लें क्या कहती है पुलिस
100 बातों की 1 बात, डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई चीज है ही नहीं। केंद्रीय एजेंसी हो या स्टेट एजेंसी, कभी भी कोई फोन या वीडियो कॉल पर किसी मामले की जांच नहीं करता है। अगर जांच एजेंसियों को कुछ गड़बड़ का शक होगा तो या आपको संबंधित आॅफिस बुलाया जाएगा और आमने-सामने पूछताछ की जाएगी। कोई वीडियो कॉल नहीं आएगी। इसलिए अगर कभी भी आपके पास कोई वीडियो कॉल आती है तो उसे तुरंत काट दें और शिकायत दर्ज कराएं।

पढ़े-लिखे व संपन्न शिकार
सबसे चिंताजनक बात यह है कि डिजिटल अरेस्ट स्कैम में केवल अनपढ़ या बुजुर्ग ही नहीं, बल्कि डॉक्टर, इंजीनियर, चार्टर्ड अकाउंटेंट, कारोबारी और सेवानिवृत्त अधिकारी भी बड़ी संख्या में फंसे हैं। ठग पीड़ित को यह विश्वास दिला देते हैं कि उसका नाम मनी लॉन्ड्रिंग, ड्रग तस्करी या आतंकी फंडिंग से जुड़े मामले में आ गया है और गोपनीय जांच के नाम पर उसे किसी से बात करने से रोक देते हैं।

सावधानी ही सबसे बड़ा हथियार
साइबर विशेषज्ञ साफ चेतावनी देते हैं कि कोई भी सरकारी एजेंसी फोन या वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी नहीं करती और न ही पैसे ट्रांसफर करने को कहती है। ऐसे किसी भी कॉल से घबराने के बजाय तुरंत 1930 पर सूचना देना ही बचाव का सबसे कारगर तरीका है। 2025 के आंकड़े साफ संकेत दे रहे हैं कि अगर डिजिटल अरेस्ट स्कैम पर सख्ती और जन-जागरूकता नहीं बढ़ी, तो आने वाले वर्षों में यह साइबर अपराध देश की अर्थव्यवस्था और आम नागरिक-दोनों पर भारी पड़ सकता है।

डिजिटल इंडिया की कीमत?
डिजिटल भुगतान, आॅनलाइन बैंकिंग और आधार-पैन लिंकिंग ने जहां सुविधाएं बढ़ाई हैं, वहीं ठगों को नए हथियार भी दिए हैं। 2025 में हर दिन औसतन 5 से 6 हजार साइबर फ्रॉड शिकायतें दर्ज हो रही हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि रिपोर्ट न होने वाले मामलों को जोड़ दिया जाए तो वास्तविक नुकसान इससे कहीं ज्यादा हो सकता है।

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