10 रुपए में साइकिल की सवारी भी नहीं भायी : अब फिर दौड़ाने की तैयारी, पहले तीन बार टेंडर के बावजूद नहीं मिली फर्म
बस स्टेंडों पर गंदगी का आलम
जयपुर। स्वच्छ पर्यावरण और परिवहन के वैकल्पिक साधनों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से करीब नौ साल पूर्व वर्ष 2017 में शुरू की गई पब्लिक साइकिल शेयरिंग (पीबीएस) योजना स्मार्ट मोबिलिटी परियोजना को अब नए सिरे से शुरू करने की तैयारी है। करीब 1.10 करोड़ रुपए की लागत वाली इस परियोजना को जयपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड ने शुरू किया था, लेकिन लोगों का अपेक्षित रुझान नहीं मिलने से योजना आगे नहीं बढ़ सकी। अब जयपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड इसे दुबारा शुरू करने की तैयारियों में जुट गया है। योजना को अमलीजामा पहनाने के बाद इसे नगर निगम जयपुर को हैंडओवर किया जाएगा। योजना के तहत मॉर्निंग वार्क करने वाले, पार्कों में घूमने एवं साईकिलिंग करने वालों के साथ ही छोटी दूरी के लिए कार एवं बाईक का बेहतर विकल्प देने के लिए साईकिल शेयरिंग योजना के तहत बनाए गए साईकिल स्टेंडों पर शुरू में नई साईकिलें रखी गई थी। शहर में एक स्टैंड से साइकिल लेकर दूसरे स्टैंड पर छोड़ने की सुविधा दी गई थी। किराया महज 10 रुपए प्रति घंटे रखा गया था।
साइकिल लेने के लिए पहचान पत्र दिखाकर निर्धारित फॉर्म भरना होता था। भुगतान नकद, क्रेडिट कार्ड अथवा सामान्य मोबिलिटी कार्ड से किया जा सकता था। स्मार्ट सिटी ने शुरुआत में जवाहर सर्किल और रामनिवास बाग में साइकिल स्टैंड बनाए गए थे। इसके बाद राजस्थान विश्वविद्यालय, नारायण सिंह सर्किल, न्यू गेट एवं नगर निगम कार्यालय सहित करीब बीस स्थानों पर इसे शुरू करना था, लेकिन कुछ समय में ही योजना धराशाही हो गई। इसके बाद स्मार्ट सिटी लिमिटेड ने इसके तीन बार टेंडर भी लगाए लेकिन फर्मो ने इसमें रुचि नहीं दिखाई और अब फिर से चौथी बार टेंडर लगाने की तैयारियां की जा रही है।
बस स्टेंडों पर गंदगी का आलम :
स्मार्ट सिटी योजना के तहत लाखों रुपए खर्च कर बनाए गए साईकिल स्टेंड वर्तमान में बदहाली बयां कर रहे है। पर्याप्त रखरखाब के अभाव में यहां झांडियां उगी हुई है, लोग कचरा डल रहे है और लगाई गई जालियां टूट चुकी है। इन स्टेंडों में असामाजिक तत्वों का जमावड़ा बना रहता है।

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