चिकित्सकों ने किया कमाल, बिना मैचिंग किया सफल लिवर ट्रांसप्लांट

बिना मैचिंग के डोनर के जरिए सैकड़ों लिवर रोगियों के लिए आशा भी जागी

चिकित्सकों ने किया कमाल, बिना मैचिंग किया सफल लिवर ट्रांसप्लांट

रक्त में एंटीबॉडीज के अभाव में रोगी के शरीर ने उसे रिजेक्ट भी नहीं किया।

जयपुर। चिकित्सा विज्ञान की तरक्की ने जहां उन्नत तकनीकें ईजाद की है, वहीं उपचार को आसान बना दिया है। नतीजतन उपचार की सफलता दर भी बढ़ गई है। हाल ही में महात्मा गांधी अस्पताल के सेंटर फॉर डाइजेस्टिव साइंसेज के लिवर ट्रांसप्लांट विशेषज्ञ टीम को ऐसी ही एक उल्लेखनीय सफलता मिली है। मामला राज्य के पहले एबीओ इनकंपिटिबल लिवर ट्रांसप्लांट का है। खास बात ये है कि एक जरूरतमंद लिवर की खराबी वाले गंभीर रोगी को अन्य ब्लड़ ग्रुप के डोनर के प्राप्त लिवर लगाया गया। जो कि पूरी तरह सफल भी रहा। इसके साथ ही उन रोगियों के लिए भी जीवन की राह खुल गई है जिनके पास मैचिंग ग्रुप का डोनर नहीं है। लिवर और एच पी बी सर्जरी विशेषज्ञ डॉ नैमिष एन मेहता ने बताया कि बूरथल निवासी 44 वर्षीय मदन गोपाल मीना को पिछले डेढ़ वर्ष से पीलिया की वजह से बार बार अस्पताल में भर्ती होना पड़ता था।

उन्हें पेट में पानी भरने बार बार बेहोशी जैसी शिकायत थी। स्थिति लिवर फेलियर तक पहुंच गई थी। रोगी को जब बेहोशी की हालत में महात्मा गांधी अस्पताल में भर्ती कराया गया तो पता लगा कि उनकी जान अब लिवर प्रत्यारोपण से ही बचाई जा सकती है। चुनौती यह भी थी कि मैचिंग ब्लड ग्रुप का डोनर नहीं मिल पा रहा था। उनकी पत्नी बसना देवी का ब्लड ग्रुप ए पॉजिटिव था जबकि रोगी का बी पॉजिटिव। एबीओ इनकंपिटिबल ट्रांसप्लांट के लिए  ब्लड सेंटर डायरेक्टर डॉ आर एम जायसवाल और डॉ श्वेता शर्मा की मदद ली गई। जिन्होंने डोनर के ब्लड ग्रुप को मैच करने के लिए विशेष प्लाज्मा फेरेसिस द्वारा रोगी के शरीर से 'ए' एंटीबॉडीज को कम किया। भविष्य में भी रोगी को कोई समस्या ना हो इसके लिए इम्यूनो मॉड्यूलर थेरेपी भी दी गई। यह प्रक्रिया ऑपरेशन से कुछ दिन पूर्व की गई। इस तरह डोनर द्वारा प्राप्त लिवर के हिस्से को रोगी के शरीर में प्रत्यारोपित किया गया। रक्त में एंटीबॉडीज के अभाव में रोगी के शरीर ने उसे रिजेक्ट भी नहीं किया।

ऑपरेशन में डॉ नैमिष एन मेहता के साथ हेपेटोलॉजिस्ट डॉ करण कुमार, ट्रांसप्लांट सर्जन डॉ आनंद नागर, डॉ विनय महला, गहन चिकित्सा डॉ आनंद जैन, ट्रांसप्लांट एनेस्थेटिस्ट डॉ गौरव गोयल तथा डॉ कौशल बघेल भी महत्वपूर्ण भूमिका भी निभाई। हेपेटोलॉजिस्ट डॉ करण कुमार ने बताया कि कि इस ऐतिहासिक सफलता ने राज्य का नाम देश और दुनिया में रौशन किया है। साथ ही बिना मैचिंग के डोनर के जरिए सैकड़ों लिवर रोगियों के लिए आशा भी जागी है।

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