महात्मा गांधी अस्पताल के विशेषज्ञों ने बचाई अजन्मे शिशु की जान, गर्भ में पल रहे शिशु को थी दिल की बीमारी
शिशु का हृदय अत्यधिक तेज गति से धड़क रहा था
जयपुर। महात्मा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल, जयपुर की फीटल कार्डियोलॉजी डॉक्टर ने एक दुर्लभ एवं जीवन-रक्षक उपचार कर गर्भस्थ शिशु की जान बचाने में सफलता प्राप्त की है। गर्भावस्था के 25वें सप्ताह में भ्रूण में सुप्रावेंट्रिकुलर टैकीकार्डिया (SVT) नामक गंभीर हृदय गति विकार का पता चला, जिसमें शिशु का हृदय अत्यधिक तेज गति से धड़क रहा था। इस स्थिति के कारण भ्रूण को हार्ट फेलियर तथा गर्भ में ही मृत्यु का गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया था। फीटल एवं पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. प्रेरणा भट ने शिशु की बीमारी का पता लगाकर उपचार शुरू किया।
शिशु तक दवा पहुंचाने के लिए गर्भवती महिला को ट्रांसप्लेसेंटल एंटी-अरिदमिक थेरेपी दी गई। उपचार शुरू होने के मात्र 72 घंटे के भीतर भ्रूण की हृदय गति सामान्य हो गई, जिससे गर्भावस्था सुरक्षित रूप से आगे बढ़ सकी। लगभग दस सप्ताह तक भ्रूण की स्थिति स्थिर बनी रही, लेकिन गर्भावस्था के 35वें सप्ताह में हृदय गति संबंधी समस्या के फिर से सामने आने पर प्रसव कराने का निर्णय लिया गया। जन्म के बाद भी नवजात में 48 घंटे तक टैकीअरिदमिया स्थिति बनी रही। विशेषज्ञों ने दो एंटी-अरिदमिक दवाओं की सहायता से इस स्थिति को नियंत्रित किया और 72 घंटे के भीतर शिशु की हृदय गति पूर्ण रूप से सामान्य हो गई। अब नवजात स्वस्थ है तथा उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। डॉ. प्रेरणा भट ने बताया कि फीटल कार्डियोलॉजी सेवाओं की वजह से अब कई गंभीर हृदय गति विकारों का गर्भावस्था के दौरान ही निदान और उपचार संभव हो गया है।

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