इतिहास की परतों से निकला भव्य मंदिर : रीढ़ का टीला उत्खनन में 11वीं–12वीं सदी के अवशेष उजागर, शेखावाटी के अतीत पर नई रोशनी
ऐतिहासिक सांस्कृतिक चरणों की ओर संकेत करते हैं
यह उत्खनन भारत सरकार के निर्धारित वैज्ञानिक मानकों के अनुरूप तथा भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, नई दिल्ली की अनुमति से संचालित किया जा रहा है।
जयपुर। झुंझुनू जिले की खेतड़ी तहसील के त्योंदा ग्राम स्थित ‘रीढ़ का टीला’ एक बार फिर चर्चा में है। राजस्थान सरकार के पुरातत्त्व एवं संग्रहालय विभाग द्वारा यहां इस वर्ष के आरंभ से वैज्ञानिक उत्खनन कार्य प्रारंभ किया गया है। यह उत्खनन भारत सरकार के निर्धारित वैज्ञानिक मानकों के अनुरूप तथा भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, नई दिल्ली की अनुमति से संचालित किया जा रहा है।
वैज्ञानिक पद्धति से हो रहा उत्खनन
उत्खनन से पूर्व स्थल का विस्तृत सर्वेक्षण, सीमांकन, सतही मैप तैयार करना तथा प्रशासनिक औपचारिकताएं पूर्ण की गईं। कार्य के दौरान स्तरानुसार उत्खनन, प्रत्येक परत का वैज्ञानिक अभिलेखीकरण, फोटोग्राफी और प्राप्त पुरावशेषों का संरक्षण सुनिश्चित किया जा रहा है। प्रारंभिक चरण में हस्तनिर्मित तथा चाक पर बने लाल एवं काले-लाल मृद्भांड प्राप्त हुए हैं, जो विभिन्न ऐतिहासिक सांस्कृतिक चरणों की ओर संकेत करते हैं।
मंदिर परिसर के मिले साक्ष्य
अब तक 11वीं–12वीं सदी के मंदिर के अवशेष प्रकाश में आए हैं। पत्थरों से निर्मित फर्श, चौकोर आधार पर स्थित पाषाण खंड तथा अर्धवृत्ताकार संरचना के अवशेष सुरक्षित अवस्था में मिले हैं। मंदिर में स्थापित मूर्तियां भी सामने आई हैं। संरचनात्मक शैली से यह स्थल राजपूत कालीन धार्मिक या अनुष्ठानिक परिसर प्रतीत होता है।
बहु-सांस्कृतिक पुरास्थल के संकेत
मिट्टी की परतों और प्राप्त सामग्री के अध्ययन से स्पष्ट होता है कि यह स्थल बहु-सांस्कृतिक गतिविधियों का केंद्र रहा है, जहां विभिन्न कालखंडों में मानव बसावट निरंतर बनी रही। आगे के वैज्ञानिक परीक्षणों और स्तरीकरण के बाद सटीक काल-निर्धारण संभव हो सकेगा।
इनका कहना
रीढ़ के टीले पर किया जा रहा यह उत्खनन राजस्थान के इतिहास पर नया प्रकाश डालेगा। इससे क्षेत्रीय विरासत को समझने और संरक्षित करने में महत्वपूर्ण मदद मिलेगी।
- डॉ. पंकज धरेन्द्र, निदेशक, पुरातत्त्व एवं संग्रहालय विभाग
शेखावाटी क्षेत्र के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व को समझने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण प्रयास है। पूर्व उत्खननों की तरह इस बार भी महत्वपूर्ण साक्ष्य मिलने की उम्मीद है।”
- कृष्णकांता शर्मा, संयुक्त निदेशक
उत्खनन कार्य पूरी वैज्ञानिक पद्धति से किया जा रहा है। प्राप्त निष्कर्षों को शोध प्रकाशनों और विभागीय रिपोर्टों के माध्यम से प्रस्तुत किया जाएगा।
- डॉ. विनीत गोधल, अधीक्षक (उत्खनन)
प्रारंभिक परिणाम अत्यंत उत्साहजनक हैं। आगे की खुदाई से और महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आने की संभावना है।
- डॉ. विवेक शुक्ला, खोज एवं उत्खनन अधिकारी

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