हाईकोर्ट ने नाबालिग से गैंगरेप के 4 मुल्जिमों की उम्रकैद की सजा रद्द की, जानें पूरा मामला
पीड़िता घटना के समय नाबालिग थी
जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने अलवर में नाबालिग का अपहरण कर गैंगरेप के आरोप में आजीवन कारावास की सजा काट रहे याचिकाकर्ताओं को दोषमुक्त करते हुए मिली सजा को रद्द कर दिया है।
जस्टिस महेन्द्र गोयल और जस्टिस भुवन गोयल की खंडपीठ ने यह आदेश सावन व अन्य की अपील पर सुनवाई करते हुए दिए। अदालत ने पुलिस जांच पर टिप्पणी करते हुए कहा कि इस संवेदनशील मामले का अनुसंधान बेहद गैर जिम्मेदार तरीके से किया गया। अभियोजन पक्ष यह साबित करने में असफल रहा कि पीड़िता घटना के समय नाबालिग थी। अदालत ने पीडिता के बयानों में विरोधाभास, डीएनए रिपोर्ट पर संदेह और पीडिता के उम्र पर संदेह जताते हुए याचिकाकर्ताओं को बरी किया है।
अदालत ने कहा कि पीडिता ने लिखित शिकायत में बाडे और नदी के पास गैंगरेप की बात कही, लेकिन कोर्ट में चलती गाड़ी में दुष्कर्म का बयान दिया। इसके अलावा पहले चारों के एक साथ रेप करने का बयान दिया और बाद में बयान बदल कर कहा कि दो लोगों ने बाद में रेप किया। इसके अलावा मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार, उसके प्राइवेट पार्ट पर मामूली खरोंच थी, जो सेनेटरी पैड के कारण आ सकती है। सबसे बडी बात यह कि चिकित्सक की राय में भी रेप नहीं था। अपील में अधिवक्ता राजीव सुराणा ने कहा कि पीडिता की मार्कशीट में दर्ज जन्मतिथि स्कूल में प्रवेश आवेदन पत्र से ली गई थी। ऐसे में यदि मूल आवेदन पत्र में जन्मतिथि दर्ज करने का आधार प्रमाणित नहीं हुआ तो उनके आधार पर मार्कशीट और टीसी से जन्मतिथि प्रमाणित नहीं हो सकती। साथ ही मेडिकल रिपोर्ट और पीडिता के बयान भी विरोधाभासी है। इसलिए निचली अदालत के आदेश को रद्द किया जाए, जिस पर सुनवाई करते हुए खंडपीठ ने अपीलार्थियों को दी गई सजा को रद्द कर दिया है। अलवर के पुलिस थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी, जिसमें कहा गया कि 27 सितंबर, 2019 की रात चार आरोपी पीडिता को घर से वाहन में ले गए। उन्होंने गांव की नदी के पास उसके साथ रेप किया और वीडियो बना लिया। मामले में अलवर की एडीजे कोर्ट ने आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी।

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