जिंदगी की डोर को काट रहा पतंग का मांझा : कई राज्यों में बैन, फिर भी बिक रहा उड़ता हथियार
सिर्फ सादा कपास की डोर का इस्तेमाल करें।
मकर संक्रांति को निकले भले ही दो सप्ताह से ज्यादा हो गए हों लेकिन राजधानी के कुछ इलाकों में पतंगें आज भी इठलाती नजर आ जाएंगी। सड़कों पर , बिजली के खम्भों पर, पेड़ की टहनियों पर, पतंग और मांझा अक्सर देखने को मिल जाएगा। हर साल मकर संक्रांति और उत्तरायण के मौके पर आसमान रंग-बिरंगी पतंगों से पट जाता।
जयपुर। मकर संक्रांति को निकले भले ही दो सप्ताह से ज्यादा हो गए हों लेकिन राजधानी के कुछ इलाकों में पतंगें आज भी इठलाती नजर आ जाएंगी। सड़कों पर , बिजली के खम्भों पर, पेड़ की टहनियों पर , पतंग और मांझा अक्सर देखने को मिल जाएगा। हर साल मकर संक्रांति और उत्तरायण के मौके पर आसमान रंग-बिरंगी पतंगों से पट जाता है। बच्चे, युवा, बुजुर्ग-सबमें उत्साह की लहर दौड़ती है। हंसी-खुशी, चीख-पुकार और पतंगबाजी की होड़ मचती है। लेकिन इसी उत्सव के बीच एक खतरनाक साये की तरह छिपा रहता है एक ऐसा धागा, जो सिर्फ पतंगों को नहीं, बल्कि इंसानी जिंदगियां भी चंद सेकंड में काट देता है। यह मांझा बड़ा ही घातक है जिसे लोग चाइनीज मांझे के नाम से जानते हैं। यह सिंथेटिक नायलॉन या प्लास्टिक की डोर होती है, जिस पर पिसा हुआ कांच, धातु के टुकड़े या एल्यूमीनियम ऑक्साइड जैसी तेज सामग्री चढ़ाई जाती है। यह इतनी धारदार होती है कि तेज रफ्तार से गुजरते बाइक-सवार की गर्दन को एक झटके में काट सकती है।
उत्पादन के गढ़ और अवैध कारोबार
कई राज्यों में इस पर पूर्ण प्रतिबंध है, फिर भी इसका उत्पादन और बिक्री दिन-रात जारी है। मुख्य केंद्र:बरेली (उत्तर प्रदेश) - यहां पीढि़यों से कारीगर और छोटे-बड़े कारखाने चल रहे हैं। बरेली का मांझा अपनी असाधारण तीक्ष्णता के लिए कुख्यात है। प्रतिबंधित मांझे पर पुलिस छापेमारी करती है, हजारों रील जब्त होती हैं, लेकिन कारोबार थमता ही नहीं। गुजरात के सूरत, अहमदाबाद उत्तरायण के त्योहार के कारण यहां बड़े पैमाने पर उत्पादन और सप्लाई होती है।
मध्य प्रदेश के कुछ इलाके में तो यह अनौपचारिक ढंग से बनता है और पूरे उत्तरी भारत में पहुंचता है।
2026 का कहर
वर्ष के मकर संक्रांति के त्यौहार पर लोग खुशियों का उत्सव मना रहे थे तो शहर में कई घरों के चिराग हवा में लहरा रहे मांझे ने बुझा दिए। मकर संक्रांति (14 जनवरी) के दिन जयपुर में सबसे अधिक 3 लोगों की जान गई।
1.धीर संगनेरिया (6 वर्ष): मुंबई का रहने वाला यह बच्चा अपने ननिहाल जयपुर आया था। कार की सनरूफ से बाहर झांकते समय चाइनीज मांझे से उसका गला कट गया, जिससे अस्पताल पहुँचने पर उसे डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया गया।
2.अन्य मौतें: पतंग लूटने के प्रयास में छतों से गिरने के कारण भी जयपुर और आसपास के क्षेत्रों में मौतें दर्ज की गईं।
घायलों का विवरण
3.कुल घायल: 140 से अधिक लोग राजस्थान के विभिन्न जिलों में घायल हुए, जिनमें से एक बड़ा हिस्सा जयपुर का था।
पक्षियों की स्थिति
जयपुर के विभिन्न इलाकों जैसे राम निवास बाग, वैशाली नगर और जवाहर सर्किल में सैकड़ों पक्षी (कबूतर, तोते, चील आदि) मांझे से घायल हुए।
मात्र दो दिन 14-15 जनवरी के दौरान 500 से अधिक रेस्क्यू कॉल्स दर्ज की गईं।
:वाराणसी के पास डॉक्टर समीर हाशमी की गर्दन मांझे से कट गई, मौके पर ही मौत।
कर्नाटक के बीदर में संजीव कुमार ने बेटी को फोन कर कहा-देर हो सकती है, अगले ही पल मांझे ने उनका गला काट दिया।
गुजरात के सूरत में एक पूरा परिवार-पति, पत्नी और 10 साल की बेटी-फ्लाईओवर से नीचे गिरकर मारे गए।
इंदौर में कई लोग गंभीर रूप से घायल, कुछ की मौत हो गई।
पिछले साल गुजरात में ही 17 हजार से ज्यादा पक्षी इस मांझे का शिकार बने, जिनमें से 1,493 की मौत हो गई। इंसान से लेकर पक्षी तक-कोई भी सुरक्षित नहीं।
प्रतिबंध है, अमल नहीं: राष्ट्रीय हरित अधिकरण , हाई कोर्ट और कई राज्य सरकारें बार-बार सख्त आदेश दे चुकी हैं। केवल सादा कपास की डोर की अनुमति है। लेकिन हकीकत यह है कि अवैध मांझा या सीधे शब्दों में कहा जाए तो उड़ता हथियार बाजार में खुलेआम मिल रहा है। जड़ तक पहुंचने में प्रशासन अभी भी नाकाम है।
एसएमएस अस्पताल
जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में पतंगबाजी से घायल 32 लोगों को लाया गया, जिनमें 12 बच्चे (14 वर्ष से कम आयु) शामिल थे।
गंभीर घायल
घायलों में एक 7 महीने का बच्चा भी शामिल था जिसका गला कट गया था। अधिकांश घायल वे बाइक सवार थे जिनके गले या चेहरे पर मांझे से गहरे कट लगे थे।
अन्य चोटें : कई लोग पतंग उड़ाते समय छतों से गिरने या पतंग लूटते समय सड़क हादसों का शिकार हुए।
सिर्फ सादा कपास की डोर का इस्तेमाल करें।
जीवन की डोर को काटने वाली मांझे के इस्तेमाल को पूरी तरह बंद कर सुरक्षित रहें। सवाल ये उठता है कि ये चाइनीज मांझे के नाम से जाना जाने वाला उड़ता हथियार क्या सच में चीन से आयात होता है, क्या मांझे का उपयोग किसी की हत्या करने के लिए हथियार के तौर पर किया जा सकता है। क्या मांझे से होने वाली मौतों को हत्या की श्रैणी में रखा जाएगा। ऐसे ही कई सवालों के जबाव ढूंढने के लिए जब नवज्योति टीम ने जिम्मेदारों से बात करनी चाही तो उन्हौंने टालमटोल कर फोन काट दिया। वहीं उपायुक्त अपराध से बात करनी चाही तो उन्हौंने भी कोई प्रतिक्रिया नही दी।

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