जयपुर आरटीओ प्रथम में लाइसेंस प्रक्रिया हुई सख्त, ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक से बदले नियम
नए सिस्टम के तहत अब केवल वही आवेदक लाइसेंस प्राप्त कर सकेंगे
जयपुर आरटीओ प्रथम में ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्टिंग ट्रैक शुरू किया गया है, जो मारुति सुज़ुकी के अत्याधुनिक सॉफ्टवेयर से संचालित है। अब केवल दक्ष चालक ही लाइसेंस पा सकेंगे। शुरुआती ट्रायल में 10 में से सिर्फ एक आवेदक पास हुआ। पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी और एजेंटों की भूमिका खत्म होगी।
जयपुर। अब जयपुर आरटीओ प्रथम में ड्राइविंग लाइसेंस बनवाना आसान नहीं रहेगा। ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्टिंग ट्रैक की शुरुआत कर दी गई है। यह ट्रैक मारुति सुज़ुकी कंपनी के सहयोग से तैयार किए गए अत्याधुनिक सॉफ्टवेयर से संचालित हो रहा है। पूरी प्रक्रिया पूरी तरह ऑटोमैटिक है, जिसमें मानवीय हस्तक्षेप न के बराबर रहेगा।
नए सिस्टम के तहत अब केवल वही आवेदक लाइसेंस प्राप्त कर सकेंगे, जो वास्तव में दक्ष वाहन चालक होंगे। फिलहाल शुरुआती तीन-चार दिन ट्रैक को ट्रायल मोड पर चलाया जा रहा है। इसके बाद आवेदन से लेकर ड्राइविंग टेस्ट के परिणाम तक की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन कर दी जाएगी।
पहले दिन हुए परीक्षण में शुरुआती दस आवेदकों में से केवल एक ही ड्राइविंग टेस्ट पास कर पाया, जिससे साफ है कि अब मानकों से समझौता नहीं होगा। आरटीओ राजेंद्र सिंह स्वयं मौके पर मौजूद रहे और पूरी प्रक्रिया का अवलोकन करते हुए अधिकारियों से जानकारी ली। इस नई व्यवस्था से आम लोगों में यातायात नियमों को जानने और सीखने की उत्सुकता बढ़ी है। वहीं, ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने में एजेंटों की भूमिका लगभग समाप्त हो गई है, जिससे व्यवस्था अधिक पारदर्शी हो गई है।

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