जनजाति क्षेत्रों में हॉस्टल्स में बिना टेंडर सामग्री खरीद पर सदन में घिरे मंत्री, स्पीकर ने दी व्यवस्था
आरोप लगाया कि टेंडर प्रक्रिया में अनियमितताएं बरती गईं
राजस्थान विधानसभा में आश्रम हॉस्टल में टेंडर प्रक्रिया को लेकर जोरदार बहस और हंगामा। जनजातीय क्षेत्रीय विकास विभाग से जुड़े मुद्दे में विपक्ष ने आरोप लगाया कि टेंडर प्रक्रिया में अनियमितताएं बरती गईं, पारदर्शिता की कमी है और कुछ ठेकेदारों को अनुचित लाभ पहुंचाया जा रहा।
जयपुर। राजस्थान विधानसभा में बुधवार को आश्रम हॉस्टल (जनजातीय छात्रावासों) में टेंडर प्रक्रिया को लेकर जोरदार बहस और हंगामा हुआ। जनजातीय क्षेत्रीय विकास विभाग से जुड़े मुद्दे में विपक्ष ने आरोप लगाया कि टेंडर प्रक्रिया में अनियमितताएं बरती गईं, पारदर्शिता की कमी है और कुछ ठेकेदारों को अनुचित लाभ पहुंचाया जा रहा है। सदन में कांग्रेस के विधायकों ने सरकार पर हमला बोला। विपक्ष के नेता टीकाराम जूली और अन्य सदस्यों ने कहा कि आश्रम हॉस्टलों के भोजन, निर्माण, रखरखाव और अन्य सुविधाओं से संबंधित टेंडरों में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप हैं। उन्होंने दावा किया कि कई टेंडर बिना उचित बोली प्रक्रिया के दिए गए, जबकि कुछ कंपनियां डिफॉल्टर होने के बावजूद लाभान्वित हो रही हैं। विपक्ष ने मांग की कि टेंडर प्रक्रिया की जांच के लिए स्वतंत्र समिति गठित की जाए और दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो।
इस पर जनजातीय विकास मंत्री बाबूलाल खराड़ी ने कहा कि विभाग द्वारा संचालित सभी आश्रम हॉस्टलों में टेंडर प्रक्रिया ई-टेंडरिंग के माध्यम से पूरी पारदर्शिता के साथ की जा रही है। उन्होंने विपक्ष के आरोपों को राजनीतिक बताते हुए कहा कि पिछली कांग्रेस सरकार में ही छात्रावासों की स्थिति बदतर थी और वेतन भुगतान में भी देरी होती थी। मंत्री ने आश्वासन दिया कि यदि कोई शिकायत या अनियमितता साबित होती है तो जांच कराई जाएगी और दोषी न होंगे। बहस के दौरान दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक हुई। स्पीकर ने कई बार सदन को शांत कराने की कोशिश की, लेकिन हंगामा कुछ देर तक जारी रहा। विपक्ष ने टेंडर प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेज सदन में पेश करने की मांग की, जिस पर सरकार ने कहा कि सभी प्रक्रियाएं नियमों के अनुसार हैं और आवश्यकता पड़ने पर जानकारी दी जाएगी। स्पीकर ने मंत्री को पूरे मामले की जांच करवाने के निर्देश दिए।

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