दैनिक नवज्योति की ओर से राष्ट्रीय कवि सम्मेलन ‘देश राग’ का आयोजन : तालियों और राष्ट्रभक्ति से गूंजा बिड़ला सभागार, कवियों ने अपनी रचनाओं से मंच को बनाया जीवंत

कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान से हुआ

दैनिक नवज्योति की ओर से राष्ट्रीय कवि सम्मेलन ‘देश राग’ का आयोजन : तालियों और राष्ट्रभक्ति से गूंजा बिड़ला सभागार, कवियों ने अपनी रचनाओं से मंच को बनाया जीवंत

जयपुर के बिड़ला सभागार में गणतंत्र दिवस की संध्या पर दैनिक नवज्योति का राष्ट्रीय कवि सम्मेलन “देश राग” आयोजित हुआ। कवियों ने देशभक्ति, हास्य और व्यंग्य से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया। राकेश बेदी और डॉ. पॉपुलर मेरठी को सम्मानित किया गया।

जयपुर। गणतंत्र दिवस की संध्या पर बिड़ला सभागार में दैनिक नवज्योति की ओर से राष्ट्रीय कवि सम्मेलन देश राग आयोजित किया गया। कार्यक्रम में देश के ख्यातनाम कवियों ने अपनी रचनाओं से मंच को जीवंत बना दिया और श्रोताओं के दिलों में राष्ट्रप्रेम की लहर दौड़ा दी। कवि सम्मेलन के दौरान ऑडिटोरियम के बाहर मौसम जितना सर्द था, अंदर उतनी ही जोश की गर्मी थी। सभागार में दर्शक खचाखच भरे थे और देशभक्ति, हास्य तथा सामाजिक व्यंग्य से सजी कविताओं पर तालियों की गूंज देर रात तक सुनाई देती रही। समारोह में फिल्म अभिनेता और कवि राकेश बेदी को कप्तान दुर्गाप्रसाद चौधरी हिंदी सेवा सम्मान दिया गया। वहीं डॉ. पॉपुलर मेरठी को नवज्योति काव्य कलश सम्मान से नवाजा गया।

यह सम्मेलन दैनिक नवज्योति की गौरवशाली परंपरा का हिस्सा है, जो हर वर्ष गणतंत्र दिवस के अवसर पर साहित्य और राष्ट्रभक्ति का ऐसा संगम प्रस्तुत करता है। इस बार मंच पर संजय झाला, राकेश बेदी, डॉ. पॉपुलर मेरठी, विनीत चौहान, शबीना अदीब, गोविंद राठी, हरीश हिंदुस्तानी तथा अपूर्व बिक्रम शाह जैसे कवियों ने शिरकत की। कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक दीप प्रज्वलन के साथ हुई और समारोह शाम छह बजे से देर रात तक चला।

सम्मेलन की शुरुआत सबसे पहले अपूर्व बिक्रम शाह ने की। अपूर्व वीर रस के सशक्त कवि हैं और उनकी कविताएं राष्ट्रप्रेम की ओजस्वी अभिव्यक्ति के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने सबसे पहले मंच संभाला और “तारीख गवाही देती” तथा “हम ही राणा हम ही बिस्मिल” जैसी कविताएं सुनाकर पूरे सभागार को देशभक्ति के रंग में रंग दिया। उनकी गंभीर एवं ओजपूर्ण आवाज ने स्वतंत्रता संग्राम के वीर सपूतों की याद को ताजा कर दिया। कार्यक्रम की शुरुआत में ही इतना उत्साह देखकर बाकी कवियों के लिए भी माहौल गर्म हो गया। युवा श्रोता विशेष रूप से उनकी प्रस्तुति से प्रभावित हुए और तालियों की गड़गड़ाहट लंबे समय तक गूंजती रही।

इसके बाद मंच पर आए हरीश हिंदुस्तानी। हास्य रस के इस उस्ताद ने अपनी लोकप्रिय कविता “फूल फूल जोड़ो गजरे की लड़ी बन जाती है” सुनाकर माहौल को हल्का-फुल्का बना दिया। मारवाड़ी लहजे में प्रस्तुत उनकी कविता ने राजस्थानी दर्शकों का दिल जीत लिया। हल्के-फुल्के व्यंग्य से सजी उनकी रचना ने रोजमर्रा की जिंदगी की सच्चाइयों को भी उजागर किया। दर्शकों ने हर पंक्ति पर ठहाके लगाए और तालियां बजाईं।

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गोविंद राठी ने हास्य के माध्यम से समाज की वर्तमान हालात पर करारा व्यंग्य किया। उनकी कविता हर युग में सियासत होती है, पहले द्रौपदी की इज्जत सभा में लुटती थी, अब इज्जत लुटने के बाद सभाएं होती हैं, जैसी पंक्तियों ने आज की राजनीतिक व्यवस्था पर तीखा तंज कसा। भ्रष्टाचार और नेताओं की दोहरी नीतियों पर उनकी कविताएं हंसते-हंसाते सोचने पर भी मजबूर कर गईं। इनकी प्रस्तुति इतनी जीवंत थी कि श्रोता लोटपोट हो गए।

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विनीत चौहान की बारी आई तो सभागार फिर देशभक्ति में डूब गया। उन्होंने “ऑपरेशन सिंदूर” और “सैनिक की चिट्ठी” सुना कर श्रोताओं में जोश भर दिया। “ऑपरेशन सिंदूर” में पहलगाम आतंकी घटना के बाद भारतीय सेना की कार्रवाई का ओजस्वी चित्रण था, सांप जब तक आस्तीनों के ना मारे जाएंगे और सैनिक की चिट्ठी में सीमा पर तैनात जवान की मां को लिखी भावुक चिट्ठी ने कई आंखें नम कर दीं। गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर यह प्रस्तुति अत्यंत प्रासंगिक लगी।

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डॉ. पॉपुलर मेरठी ने जब मंच संभाला तो हास्य का नया दौर शुरू हुआ। उनकी कविता टिकट मुझे भी दिला दो असेम्बली का, ने चुनावी महत्वाकांक्षा और राजनीतिक खेल पर जबरदस्त व्यंग्य किया। उनकी पंक्तियों पर पूरा सभागार ठहाकों से गूंज उठा। पॉपुलर की अनोखी शैली में खुद को एक महत्वाकांक्षी नेता के रूप में प्रस्तुत करना दर्शकों को खूब भाया।

शबीना अदीब ने अपनी कोमल आवाज में राष्ट्रप्रेम और भावुकता का संगम प्रस्तुत किया। उन्होंने ये तिरंगा सबका दिल और जान बनकर रहे, अपना गम इस तरह कम कर लीजिए तथा अपनी डाली से बिछड़कर अलग हो गए ने गहरा संदेश दिया। उनकी प्रस्तुति ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

अभिनेता राकेश बेदी ने एक कवि के रूप में हास्य का बेहतरीन मिश्रण पेश किया। बहरों में लग रहा है बाजार मेरे भाई, ऑनलाइन की मोहब्बत और कोई बात नहीं जैसी कविताओं से उन्होंने डिजिटल युग के प्रेम और एक तरफा प्यार से हल्के फुल्के अंदाज में वाहवाही लूटी। उनकी अभिनय पूर्ण प्रस्तुति ने श्रोताओं को खूब हंसाया।

संजय झाला ने पूरे कार्यक्रम की सूत्रधार की भूमिका निभाई और अपनी हास्य रचनाओं से मंच को संतुलित रखा। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान से हुआ।

 

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