रेरा की नजरों से बचने का नया पैतरा, सोशल मीडिया पर कारोबार
रियल एस्टेट का कारोबार करने वालों पर सख्त नजर
शहरी क्षेत्रों में आशियाना खरीदने का सपना दिखाकर भू-माफिया अब ठगी का नया तरीका अपना रहे। 1999 से पहले के पट्टे देकर गृह निर्माण सहकारी समितियों के जरिए इस कारोबार को अमलीजामा पहना रहे।
जयपुर। शहरी क्षेत्रों में आशियाना खरीदने का सपना दिखाकर भू-माफिया अब ठगी का नया तरीका अपना रहे हैं। 1999 से पहले के पट्टे देकर गृह निर्माण सहकारी समितियों के जरिए इस कारोबार को अमलीजामा पहना रहे हैं। हालांकि राजस्थान रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (रेरा) इस पर सख्त नजर बनाए हुए हैं। रेरा की नजरों से बचने के लिए कई बिल्डर और एजेंट बिना पंजीकरण के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए प्लॉट और मकान बेच रहे हैं।
सुओ-मोटो के जरिए एक्शन
रेरा अधिकारियों के अनुसार सुओ-मोटो के जरिए प्रकरण दर्ज किए हैं, लाखों की पेनल्टी भी वसूली है। लोगों में जागरूकता लाने के लिए डिजिटल माध्यमों के दुरुपयोग करने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।
पांच हजार से अधिक मामलों में निर्णय
हालांकि रेरा में दर्ज होने वाली शिकायतों की संख्या भी बढ़ी है। कुल 7000 से अधिक मामले दर्ज हो चुके हैं, जिनमें से 5000 से ज्यादा का निस्तारण किया जा चुका है। मकान-भूखण्डों से जुडे़ सरकारी महकमे भी बिना पंजीयन के रियल एस्टेट संबंधी कार्य नहीं कर पाते हैं।
अन्य राज्यों की तुलना में स्थिति
देश के अन्य राज्यों की तुलना करें तो महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक प्रोजेक्ट और शिकायतें दर्ज हैं। उत्तर प्रदेश में 60 हजार से केस दर्ज होना बड़े पैमाने पर विवादों को दर्शाता है। महाराष्ट्र में भी 34 हजार से अधिक मामलों की सुनवाई हुई है। गुजरात, हरियाणा जैसे राज्यों में शिकायतें बढ़ी हैं, लेकिन वहां निस्तारण की दर बेहतर है।
सख्ती हो रही कार्रवाई
रेरा से बिना रजिस्ट्रेशन किसी मकान-भूखण्डों की खरीद-फरोख्त पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। अथॉरिटी सुओ-मोटो के आधार पर एक्शन ले रही है। 200 सुओ-मोटो के मामले चल रहे है, जिनमें पेनल्टी लगाई गई हैं।-वीनू गुप्ता, चैयरपर्सन, राज. रेरा

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