विश्व पृथ्वी दिवस : उदयपुर में सैकण्डरी यूरेनियम तो जालौर में आरईई की खोज, उद्योगों को मिलेगी राहत
बीकानेर में बनेगा सिरामिक का एक्सीलेंस सेंटर
प्रदेश स्तर पर खनिज अनुसंधान और औद्योगिक विकास को नई दिशा देने के लिए उदयपुर और बीकानेर को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। इसके तहत उदयपुर में पृथ्वी की गहराइयों में पाए जाने वाले दुर्लभ तत्वों की खोज का कार्य किया जाएगा, जबकि बीकानेर में सिरेमिक पर नए शोध कार्यों को बढ़ावा देने के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किया जाएगा।
उदयपुर। प्रदेश स्तर पर खनिज अनुसंधान और औद्योगिक विकास को नई दिशा देने के लिए उदयपुर और बीकानेर को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। इसके तहत उदयपुर में पृथ्वी की गहराइयों में पाए जाने वाले दुर्लभ तत्वों की खोज का कार्य किया जाएगा, जबकि बीकानेर में सिरेमिक पर नए शोध कार्यों को बढ़ावा देने के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किया जाएगा। योजना के अनुसार उदयपुर में लगभग सौ करोड़ रुपए की लागत से रेयर अर्थ एलिमेंट (आरईई) यानी दुर्लभ पृथ्वी तत्वों की खोज की जाएगी। ये तत्व अत्यंत सीमित मात्रा में पाए जाते हैं और इनकी उपस्थिति पार्ट पर मिलियन (पीपीएम) स्तर पर होती है। वैज्ञानिक दृष्टि से रेयर अर्थ एलिमेंट अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाते हैं, क्योंकि इनका उपयोग आधुनिक तकनीकों जैसे इलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा उपकरण, नवीकरणीय ऊर्जा और बैटरी निर्माण में होता है। देशभर में ऐसे दुर्लभ तत्वों की संख्या अधिकतम 15 मानी जाती है, जिनकी खोज और दोहन भारत को तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर बनाने में अहम भूमिका निभा सकता है।
इन दोनों परियोजनाओं के माध्यम से राजस्थान न केवल खनिज संसाधनों के क्षेत्र में अपनी स्थिति मजबूत करेगा, बल्कि औद्योगिक और तकनीकी विकास की दिशा में भी एक बड़ा कदम आगे बढ़ाएगा। आरईई के एक्सीलेंस सेंटर का प्रस्ताव मोहनलाल सुखाड़िया विभाग के भू-विज्ञान विभाग न तैयार किया है।
17 तत्वों का समूह होता है आरईई
रेयर अर्थ एलिमेंट में कुल 17 तत्वों का समूह होता है, जो लैंथेनाइड शृंखला के साथ-साथ दो अन्य तत्वों को शामिल करता है। ये तत्व आधुनिक तकनीक, इलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा और ऊर्जा क्षेत्रों में बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं। ये तत्व रेयर नाम से जाने जाते हैं, लेकिन वास्तव में ये पूरी तरह दुर्लभ नहीं होते बल्कि एक साथ बड़े भंडार में कम मिलते हैं और इन्हें निकालना कठिन होता है। लैंथेनाइड शृंखला में शामिल 15 तत्वों में लैंथेनम, सेरियम, प्रसीओडिमियम, नियोडिमियम, प्रोमेथियम, समेरियम, यूरोपियम, गैडोलिनियम, टर्बियम, डिस्प्रोसियम, होल्मियम, एर्बियम, थुलियम, इटरबियम व ल्यूटेटियम शामिल हैं। रेयर अर्थ एलिमेंट भविष्य की तकनीक की रीढ़ माने जाते हैं।
जिले में सैकंडरी यूरेनियम की उपस्थिति
सुखाड़िया विश्वविद्यालय के भू-विज्ञान विभाग की ओर से बीते 7 दशकों से जिले में यूरेनियम की खोज पर सर्वे किया जा रहा है। उदयपुर के अंबेरी, उमरड़ा, कानपुर, लकड़वास, ओड़ा एवं डाकन कोटड़ा में ब्लैक शेल्स चट्टानों में सैकंडरी यूरेनियम की उपस्थिति पाई गई है। दरअसल, ग्रेनाइट रॉक में प्राइमरी यूरेनियम पाया जाता है। इसके अतिरिक्त एक अन्य सर्वे में कॉपर लेड जिंक की भी उपस्थिति पाई गई है। यह सर्वे भीलवाड़ा से शुरू हुआ, जो राजसमंद और उदयपुर तक पहुंचा है। उदयपुर के दरीबा, ताणा और भींडर में कई स्थानों पर इसकी उपलब्धता पाई गई है। ऐसे में सर्वे को आगे बढ़ाते हुए सलूंबर तथा बांसवाड़ा तक भी ले जाया जा सकता है।
वापस भेजा है प्रस्ताव
डायरेक्टर ऑफ माइनिंग विभाग के अधिकारियों का कहना है कि आरईई के एक्सीलेंस सेंटर को लेकर पूर्व में प्रस्ताव भेजा गया था। क्लीयरेंस को लेकर कुछ नए अपडेट किए गए हैं। इस प्रस्ताव को भी तैयार कर भेज दिया गया है। उपकरण खरीद को लेकर बजट जारी हो गया है तथा टेंडर प्रक्रिया कर दी गई है।

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