रसायन रहित बागवानी खेती ही कारगर प्राकृतिक उद्यानिकी खेती को मिले बढ़ावा : बागड़े

सेंटर ऑफ एक्सीलेंसी फॉर टिश्यू कल्चर का किया शिलान्यास

रसायन रहित बागवानी खेती ही कारगर प्राकृतिक उद्यानिकी खेती को मिले बढ़ावा : बागड़े
राज्यपाल हरिभाऊ किसनराव बागडे ने कृषि उद्यानिकी के तहत प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दिए जाने का आह्वान करते हुए कहा है कि कृषि विश्वविद्यालयों को देश में रसायन रहित कृषि के लिए वातावरण निर्माण किए जाने की जरूरत है

जयपुर। राज्यपाल हरिभाऊ किसनराव बागडे ने कृषि उद्यानिकी के तहत प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दिए जाने का आह्वान करते हुए कहा है कि कृषि विश्वविद्यालयों को देश में रसायन रहित कृषि के लिए वातावरण निर्माण किए जाने की जरूरत है। बागडे अखिल भारतीय कृषि विश्वविद्यालय कुलपति संघ द्वारा ''उद्यानिकी फसलों के संरक्षण  विषयक आयोजित 16वीं राष्ट्रीय संगोष्ठी में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि रासायनिक उर्वरकों के अधिक प्रयोग से रोग ही नहीं बढ़ रहे, बल्कि धरती की उर्वरा शक्ति भी नष्ट हो रही है। उन्होंने उद्यानिकी फसलों की संरक्षित खेती के लिए कार्य किए जाने पर जोर दिया। उन्होंने पानी बचाकर उसके निर्माण के लिए भी देशभर में कार्य करने का आह्वान किया। 

उन्होंने कम पानी से होने वाली फसलों, फल, फसलों को प्राकृतिक प्रकोप से बचाने के लिए सभी स्तरों पर प्रयास किए जाने पर भी जोर दिया। उन्होंने सभी कृषि विश्वविद्यालयों में सौर ऊर्जा उत्पादन के लिए भी आवश्यक रूप से कार्य करने की आवश्यकता जताई। राज्यपाल ने प्रख्यात कृषि वैज्ञानिक स्वामीनाथन द्वारा 2008 में प्रस्तुत कृषि सुधारों की बनी समिति के सुझावों पर चर्चा करते हुए कहा कि लाभकारी कृषि के लिए केंद्र सरकार निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कृषि उद्यानिकी के प्राचीन ज्ञान के आलोक में कृषि की नवीन तकनीक से खेती को लाभकारी किए जाने पर जोर दिया।

बागडे ने कहा कि हमारे यहां धीरे धीरे जंगल कम होता जा रहा है। पहले अनाज जब नहीं होता था और खेती की पैदावार नहीं थी तब उद्यानिकी फसलों पर ही मनुष्य निर्भर था। पर धीरे धीरे इस दिशा में ध्यान नहीं देने के कारण जंगलों में बहुत सी उद्यानिकी फसलें लोप हो गई। उन्होंने स्थान विशेष की जलवायु के अनुरूप उद्यानिकी फसलों के अधिकाधिक उत्पादन के लिए कार्य किए जाने का आह्वान किया। राज्यपाल ने आरंभ में विश्वविद्यालय के अंतर्गत सेंटर ऑफ एक्सीलेंसी फॉर टिश्यू कल्चर का शिलान्यास किया। उन्होंने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के तहत गेंहू और अन्य नवीन कृषि उत्पाद प्रौद्योगिकी का भी शुभारंभ किया वहीं उन्होंने माइक्रोस्कोप से फसलों में सूक्ष्म कीट परीक्षण भी किया और विश्वविद्यालय के प्रकाशनों का लोकार्पण किया। आरंभ में श्री कर्ण नरेंद्र कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बलराज सिंह ने संरक्षित खेती के साथ राष्ट्रीय सिंपोजियम के बारे में जानकारी दी। 

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