ओरण बचाओ आंदोलनकारी पहुंचे जयपुर : रविंद्र सिंह भाटी भी रहे मौजूद, कानूनी संरक्षण की मांग को लेकर इकट्ठे हुए लोग
पर्यावरण और सांस्कृतिक धरोहर मानते हुए नारे लगाए
राजस्थान में ओरण बचाओ आंदोलन के तहत गुरुवार को भवानी निकेतन संस्थान में बड़ी संख्या में लोग जुटे। तनोट माता मंदिर, जैसलमेर से 21 जनवरी को शुरू हुई लगभग 700 किलोमीटर की पद यात्रा का यह अंतिम पड़ाव था।
जयपुर। राजस्थान में ओरण बचाओ आंदोलन के तहत गुरुवार को भवानी निकेतन संस्थान में बड़ी संख्या में लोग जुटे। तनोट माता मंदिर, जैसलमेर से 21 जनवरी को शुरू हुई लगभग 700 किलोमीटर की पद यात्रा का यह अंतिम पड़ाव था। सैकड़ों की संख्या में ओरण प्रेमी और पर्यावरण कार्यकर्ता यहां पहुंचे, जहां शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी की प्रमुख मौजूदगी रही। भाटी ने मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर रैली निकालने से पहले बयान देते हुए कहा कि बंद एसी कमरों में बैठे अधिकारी पूछते हैं कि ओरण क्या है? यह केवल जमीन नहीं, बल्कि हमारी आस्था, संस्कृति और परंपरा की पहचान है। पाबूजी, हड़बूजी, तेजाजी जैसे वीरों ने इस पवित्र भूमि के लिए बलिदान दिया। अब इसे बचाना हमारा कर्तव्य है।
आंदोलनकारियों ने प्रदेश सरकार से मुख्य मांग रखी कि पश्चिमी राजस्थान की ओरण भूमि (लगभग 20 लाख बीघा) को राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज किया जाए, ताकि इसे कानूनी संरक्षण मिल सके और सोलर-विंड प्रोजेक्ट्स जैसे विकास कार्यों से इसे बचाया जा सके। लोग मुख्य रूप से जैसलमेर, बाड़मेर, जोधपुर, बीकानेर और पश्चिमी राजस्थान के विभिन्न जिलों से आए थे। कुछ समर्थक सीकर, जयपुर और अन्य क्षेत्रों से भी शामिल हुए। यात्रा के दौरान ओरण को गोचर भूमि, पर्यावरण और सांस्कृतिक धरोहर मानते हुए नारे लगाए गए। भवानी निकेतन के गेट बंद होने के बावजूद प्रदर्शनकारियों ने सीकर रोड पर जुटकर मुख्यमंत्री आवास तक कूच की तैयारी की। पुलिस ने बैरिकेडिंग कर स्थिति नियंत्रित रखी।

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