परवन वृहद परियोजना : अनियमितताओं, देरी और राजनीतिक आरोपों के बीच अटकी हाड़ौती की जीवनदायिनी
किसानों को अपेक्षित लाभ समय पर नहीं मिल पाया
कोटा, झालावाड़ और बारां के लिए महत्वपूर्ण परवन वृहद सिंचाई परियोजना वर्षों से तकनीकी, प्रशासनिक और न्यायिक बाधाओं के कारण धीमी। 2013 में शिलान्यास के बाद डिजाइन बदलाव, भूमि अवाप्ति, पाइप विवाद और कोविड-19 ने कार्य रोका। 2021 में अनियमितताओं की जांच।
जयपुर। कोटा, झालावाड़ और बारां जिलों के लिए महत्वपूर्ण मानी जाने वाली परवन वृहद सिंचाई परियोजना पिछले कई वर्षों से अनियमितताओं, प्रशासनिक देरी और तकनीकी बाधाओं के कारण विवादों में रही है। हाड़ौती अंचल के लिए जीवनदायिनी मानी जा रही इस परियोजना की रफ्तार लगातार बाधित होती रही, जिससे क्षेत्र के किसानों को अपेक्षित लाभ समय पर नहीं मिल पाया।
परियोजना को पहली बार 30 अगस्त 2013 को 2360.43 करोड़ की प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृति दी गई थी। उसी वर्ष 17 सितंबर को इसका शिलान्यास किया गया, लेकिन इसके बाद से ही परियोजना कई तरह की समस्याओं में उलझती चली गई। दिसंबर 2017 में बांध और टनल निर्माण का कार्य शुरू हुआ, मगर बांध की नींव में फॉल्ट लाइन मिलने के कारण डिजाइन में सुधार और केंद्रीय जल आयोग से अनुमोदन लेने में करीब 27 महीने की देरी हो गई। इसके अलावा बांध स्थल पर नदी डायवर्जन के लिए उपयुक्त जगह नहीं होने, शेरगढ़ पिकअप वीयर के बैक वाटर के प्रभाव, भूमि अवाप्ति और राजस्व रिकॉर्ड सुधार में भी वर्षों लग गए। कई मामलों में न्यायिक विवाद और कोविड-19 प्रतिबंधों ने भी कार्य को प्रभावित किया।
परियोजना में अनियमितताओं के आरोप भी सामने आए। वर्ष 2021 में तत्कालीन विधायक की शिकायत पर मुख्य अभियंता, अधीक्षण अभियंता और अधिशाषी अभियंता को निलंबित किया गया था। आरोप था कि राइजिंग मेन में डीआई पाइप के स्थान पर एचडीपीई पाइप का उपयोग और डिजाइन में गड़बड़ी की गई। जांच के लिए वित्त विभाग ने विशेष जांच दल भी गठित किया, जिसमें अनियमितताओं की पुष्टि हुई।
कार्य में धीमी प्रगति के कारण तीन संवेदकों के 12.68 करोड़ रुपए भी रोक दिए गए। इनमें बांध व टनल कार्य से जुड़ी कंपनी के 5.76 करोड़, नहर निर्माण के प्रथम चरण के 5.29 करोड़ और द्वितीय चरण के 1.63 करोड़ रुपए शामिल हैं।
लगातार देरी, तकनीकी खामियों और प्रशासनिक निर्णयों के कारण यह महत्वाकांक्षी परियोजना अब तक पूरी गति नहीं पकड़ पाई है। हालांकि जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत का दावा है कि अब परियोजना के कार्यों में तेजी लाई जा रही है और शेष कार्यों को जल्द पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि हाड़ौती क्षेत्र के किसानों को सिंचाई का लाभ मिल सके।

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