हथियार तस्करों पर पुलिस का शिकंजा: राजस्थान में हथियारों की तस्करी का ‘डेथ कॉरिडोर’  ज्यादा पड़ोसी राज्यों से आता है मौत का सामान

5 वर्षों में 2397 तस्कर गिरफ्तार

हथियार तस्करों पर पुलिस का शिकंजा: राजस्थान में हथियारों की तस्करी का ‘डेथ कॉरिडोर’  ज्यादा पड़ोसी राज्यों से आता है मौत का सामान
राजस्थान में डिजिटल माध्यमों और कोडवर्ड से संचालित हो रहे अत्याधुनिक अवैध हथियारों के नेटवर्क का खुलासा हुआ है। पुलिस ने बीते 5 वर्षों में 3,246 मुकदमे दर्ज कर 2,397 तस्करों को दबोचा है। मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और हरियाणा सीमाओं से आने वाले इन हथियारों की सप्लाई चेन तोड़ने के लिए विशेष नाकाबंदी अभियान जारी है।
जयपुर। राजस्थान में अवैध हथियारों का नेटवर्क अब केवल देसी कट्टों तक सीमित नहीं रह गया है। पिस्टल, रिवॉल्वर, कार्बाइन और अत्याधुनिक हथियारों तक की सप्लाई का संगठित नेटवर्क सक्रिय है। जांच एजेसियों की जांच में सामने आया है कि प्रदेश में आने वाले अधिकांश अवैध हथियार मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और हरियाणा के रास्ते पहुंचते हैं। पहले तस्कर सीधे सौदे करते थे, लेकिन अब सोशल मीडिया, एन्क्रिप्टेड चैट, कोडवर्ड और बिचौलियों के जरिए डिलीवरी की जा रही है। पुलिस मुख्यालय के आंकड़े बताते हैं कि मई में हथियार तस्करों और अवैध हथियार रखने वालों के खिलाफ  अभियान चलाकर हजारों मुकदमे दर्ज किए गए तथा बड़ी संख्या में आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। कार्रवाई के दौरान सैकड़ों बंदूक, रिवाल्वर, कट्टे, पिस्टल, कारतूस और अन्य धारदार हथियार बरामद किए गए हैं। इनका इस्तेमाल गैंगवार, रंगदारी, हत्या, लूट, डकैती और अवैध वसूली जैसे अपराधों में होता है।
 
यहां से ज्यादा होती है तस्करी
 
पुलिस अधिकारियों के अनुसार प्रदेश में सक्रिय हथियार तस्करी का नेटवर्क मुख्य रूप से भरतपुर, धौलपुर, करौली, अलवर, सवाई माधोपुर, कोटा, झालावाड़, चित्तौड़गढ़, उदयपुर और बांसवाड़ा सहित मध्य प्रदेश एवं उत्तर प्रदेश की सीमाओं से जुड़े इलाकों से संचालित होता है। सीमावर्ती क्षेत्रों से अवैध हथियारों की आवाजाही रोकने के लिए विशेष नाकाबंदी, तकनीकी निगरानी, मुखबिर तंत्र और संयुक्त अभियान चलाए जा रहे हैं।
 
मुख्य बातें
 
पांच वर्षों में 3246 मुकदमे दर्ज।
2397 आरोपियों की गिरफ्तारी।
138 बंदूकें और 1691 कट्टे/पिस्टल/रिवाल्वर जब्त।
2312 कारतूस और 2352 धारदार हथियार बरामद।
 
पुलिस का नया फोकस
 
हथियार रखने वालों से आगे बढ़कर पूरे सप्लाई नेटवर्क पर कार्रवाई।
सीमावर्ती जिलों में लगातार नाकाबंदी और विशेष अभियान।
अवैध हथियार बनाने वाली इकाइयों और सप्लाई चेन की पहचान।
तकनीकी निगरानी और मुखबिर तंत्र के जरिए तस्करों तक पहुंच।
 
हथियार का मध्य प्रदेश सबसे बड़ा स्रोत
 
खरगोन, बड़वानी, धार, खंडवा और आसपास के इलाकों में अवैध हथियार बनाने वाले गिरोह लंबे समय से सक्रिय रहे हैं। यहां तैयार होने वाले देसी पिस्टल और कट्टे बड़ी संख्या में राजस्थान के प्रतापगढ़, चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा, कोटा, झालावाड़ और जयपुर तक पहुंचते हैं।
 
कितने में बिकते हैं अवैध हथियार
हथियार स्रोत पर कीमत
देसी कट्टा एक हजार से चार हजार 
देसी पिस्टल 8000-15000
विदेशी पिस्टल 50 हजार से शुरू 1 लाख से अधिक
कारतूस 100-300 प्रति नग
 
ऐसे बदल गया तस्करी का तरीका
 
व्हाट्सएप, टेलीग्राम और सोशल मीडिया पर संपर्क
नकली नाम और कोडवर्ड का इस्तेमाल
ऑनलाइन एडवांस पेमेंट
अलग-अलग कूरियर की तरह काम करने वाले बिचौलिए
खरीदार और सप्लायर का आमने-सामने मिले बिना सौदा पूरा करना

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