Rajasthan University बनेगा सेमीकंडक्टर रिसर्च का हब
राजस्थान विश्वविद्यालय एवं सीएसआईआर सीईईआरआई, पिलानी के मध्य समझौता ज्ञापन
जयपुर। शोध एवं अनुसन्धान के क्षेत्र में देश के अग्रणी केंद्रीय संस्थान सीएसआईआर सीईईआरआई, पिलानी एवं राजस्थान के सबसे पुराने एवं प्रसिद्ध विश्वविद्यालय, राजस्थान विश्वविद्यालय ने साझा अनुबंध कर भौतिकी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में सेमीकंडक्टर अनुसन्धान, प्रशिक्षण व दक्षता को बढ़ावा देने हेतु विभिन्न नेशनल स्किल डेवलपमेंट कोर्स प्रारंभ करने का निर्णय लिया है। जयपुर में ये कोर्स देश के युवाओं को रोजगार देने हेतु कौशल विकास विकसित करने पर केंद्रित होगा। सीएसआईआर सीईईआरआई, पिलानी अपने सामाजिक वैज्ञानिक दायित्व निर्वहन हेतु देश के उत्तम शिक्षण संस्थानों के साथ निरन्तर ऐसे प्रयास करता रहता है। राज्य के राजधानी में राजस्थान विश्वविद्यालय के कारण उद्योग एवं तकनीक शिक्षा की अपार सम्भावनाओ को धरातल पर लाने में ये कदम मील का पत्थर साबित होगा। दोनों संस्थाए इस हेतु क्रेडिट, सर्टिफिकेट, डिप्लोमा, फैकल्टी प्रशिक्षण आदि कोर्स प्रारम्भ करने जा रही है। जयपुर को सेमीकंडक्टर हब बनाने हेतु राजस्थान विश्वविद्यालय व सीएसआईआर सीईईआरआई, पिलानी द्वारा लाखों कुशल जनशक्ति विकसित करने का प्रयास कर रहे हैं क्योकि सेमीकंडक्टर का उपयोग सभी आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में होता है जो एग्रोटेक, बायो टेक, बायोफिजिक्स, जियोलॉजी आदि क्षेत्रों में काम में लिए जाते है।
यह अनुबंध सीएसआईआर सीईईआरआई, पिलानी - पिलानी के निदेशक डॉ पी. सी. पंचारिया एवं राजस्थान विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर अल्पना कटेजा की उपस्थिति के दौरान संपन्न हुआ। समझौता ज्ञापन पर सीएसआईआर सीईईआरआई, पिलानी - पिलानी की तरफ से वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉक्टर विजय चटर्जी तथा राजस्थान विश्वविद्यालय की तरफ से रजिस्ट्रार अवधेश कुमार ने हस्ताक्षर किए।
इस समझौते के तहत दोनों संस्थाओं के वैज्ञानिक एवं अकादमिक स्टाफ की अदला-बदली, ऐम. टेक., ऐम. एस. तथा पीएच. डी. विद्यार्थियों का संयुक्त शोध निर्देशन, संयुक्त परियोजनाओं पर कार्य तथा संयुक्त कॉन्फ्रेंस तथा विभिन्न सामाजिक कार्यक्रमों का आयोजन आदि विषय पर बल रहेगा।
महाराजा महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो एस एन डोलिया ने अवगत कराया कि भारत के माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2021 में इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन को मंजूरी प्रदान की थी जिसके तहत अर्धचालक उत्पादन पैकेजिंग तथा यूनिट डिजाइन के तहत 76000 करोड रुपए स्वीकृत किए गए थे।
सिरी पिलानी तथा राजस्थान विश्वविद्यालय के मध्य यह समझौता माननीय प्रधानमंत्री के स्वदेशी तकनीक के उत्पादन के दूरगामी दृष्टिकोण को सफल करने में सहायक सिद्ध होगा।
कार्यक्रम के दौरान सीडीपीई के निदेशक प्रो एस के गुप्ता, प्राणिशास्त्र विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. विनोद कुमारी, विज्ञान भारती राजस्थान के सचिव डॉ मेघेन्दर् शर्मा जी, सीएसआईआर सीईईआरआई, पिलानी पिलानी के वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक डॉ अशोक चौहान एवं डॉ साईं के वड्डाड़ी उपस्थित रहे।

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