सहकारी बैंकों में धोखाधड़ी रोकने के लिए सख्त दिशा-निर्देश, आंतरिक नियंत्रण मजबूत करने के निर्देश
केवाईसी प्रक्रिया का नियमित पालन भी जरूरी होगा
जयपुर। राज्य में सहकारी बैंकों में धोखाधड़ी, गबन और वित्तीय अनियमितताओं की बढ़ती घटनाओं की रोकथाम के लिए रजिस्ट्रार, सहकारी समितियां राजस्थान ने बैंकों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। आदेश में ऋण एवं अग्रिम, जमा, शाखा समायोजन, अंतर्शाखा खातों, समाशोधन तथा तकनीक के दुरुपयोग से जुड़ी वित्तीय अनियमितताओं पर प्रभावी नियंत्रण के निर्देश दिए गए हैं। ऋण खातों में किसी भी संशोधन के लिए अधिकृत व्यक्ति के हस्ताक्षरित पत्र या प्रस्ताव को आधार बनाने और मूल दस्तावेज से मिलान के बाद ही फोटो कॉपी स्वीकार करने को कहा गया है।
संयुक्त खातों में संशोधन के लिए कम से कम दो अधिकृत हस्ताक्षरकर्ताओं की स्वीकृति अनिवार्य की गई है। नई चेकबुक जारी करने से पहले पुरानी चेकबुक के पूर्ण उपयोग की पुष्टि तथा ऋण के लिए गिरवी संपत्ति का समय-समय पर भौतिक सत्यापन भी करना होगा। जमा खातों में एफडी रसीद पुस्तिकाओं की नियमित मिलान प्रक्रिया, संवेदनशील सीटों पर स्टाफ रोटेशन और प्रत्येक लेन-देन के लिए एसएमएस अलर्ट प्रभावी करने के निर्देश हैं। बड़ी रकम के संदिग्ध लेन-देन की निगरानी और खाताधारकों की केवाईसी प्रक्रिया का नियमित पालन भी जरूरी होगा। इसके अलावा शाखाओं में पासवर्ड सुरक्षा, नियमित ऑडिट, संदिग्ध लेन-देन की निगरानी, एएमएल सेल को मजबूत करने और एफआईयू-इंडिया पोर्टल पर निर्धारित रिपोर्ट समय पर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।

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