Hypertension की वजह टेंशन
नतीजा : बीमारियां गुपचुप बना रही शिकार, इसीलिए इसे कहते हैं साइलेंट किलर
जयपुर। हाइपरटेंशन यानि उच्च रक्त चाप (हाईबीपी) की समस्या को बुढ़ापे से जोड़कर देखा जाता है। लेकिन अब युवा भी इसकी चपेट में आने लगे हैं। इसका बड़ा कारण जीवनशैली में बड़ा बदलाव, खानपान की गुणवत्ता में कमी और तनाव है। ऐस में छोटी उम्र में ही इस समस्या से दो चार होना पड़ रहा है। हाइपरटेंशन एक ऐसी समस्या है, जो अपने साथ दूसरी बीमारियां भी लेकर आती है, जो जीवन को काफी प्रभावित करती हैं। हाइपरटेंशन गुपचुप रूप से हमारे दिल-दिमाग और शरीर के अन्य भागों को भी प्रभावित करता है। इसलिए इस बीमारी को साइलेंट किलर भी कहा जाता है। चिकित्सकों के अनुसार राजस्थान के ग्रामीण क्षेत्रों में 18 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में 26 प्रतिशत लोगों को हाइपरटेंशन की समस्या है।
बीमारियों का कारण
सीनियर फिजिशियन डॉ. आरएस खेदड़ ने बताया कि हाइपरटेंशन होने से हार्ट रिलेक्स नहीं हो पाता और कोरोनरी आर्टरीज में कोलेस्ट्रोल जमने से हार्ट अटैक का खतरा हो सकता है। वहीं दिमाग में हाइपरटेंशन से लकवा भी मार सकता है। वहीं हाइपरटेंशन से रक्त धमनियों में सूजन और कमजोरी आ जाती है। धमनियों के फटने से मौत भी हो सकती है।
धमनियों में बढ़ जाता है दबाव
सीनियर इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. सुनील बेनीवाल ने बताया कि जब धमनियां कठोर और संकरी हो जाती है तो रक्त का प्रवाह बनाए रखने के लिए दिल को ज्यादा दबाव से उन धमनियों में रक्त को धकेलना पड़ता है। इसे बढ़े हुए दबाव को ही उच्च रक्तचाप या हाइपरटेंशन कहा जाता है। दबाव बढ़ने दिल ही नहीं अन्य अंगों पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ जाता है और कई बार यह जानलेवा स्थिति में भी आ जाता है।
प्राइमरी और सेकंडरी दो तरह का होता है हाइपरटेंशन
नारायणा हॉस्पिटल जयपुर के सीनियर कंसल्टेंट कार्डियोलॉजिस्ट एंड इलेक्ट्रो फिजियोलॉजिस्ट डॉ. विनोद पूनिया ने बताया कि प्राथमिक हाइपरटेंशन बिना किसी सटीक कारण के उम्र बढ़ने के साथ विकसित होता है लेकिन सेकेंडरी हाइपरटेंशन कम उम्र में होता है और इसके कई कारण हो सकते हैं। जैसे अधिक नमक का सेवन करना, धूम्रपान करना, मधुमेह, मोटापा, गुर्दा रोग, थायरॉयड समस्याएं, मानसिक तनाव, नींद की कमी और अनुचित खानपान।
लक्षण नहीं करें नजरअंदाज
नारायणा हॉस्पिटल के डायरेक्टर कार्डियोलॉजी डॉ. देवेन्द्र श्रीमाल ने बताया कि सिरदर्द, थकान और सुस्ती होना, दिल की धड़कन बढ़ जाना, सीने में दर्द, सांसें तेज चलना या सांस लेने में तकलीफ होना, आंखों से धुंधला दिखना, नाक से खून आना आदि इसके लक्षण हैं। यदि किसी भी प्रकार के हाइपरटेंशन से जुड़े गंभीर लक्षण दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
बचाव के लिए क्या करें
सीनियर फिजिशियन डॉ. पंकज आनंद ने बताया कि खानपान पर नियंत्रण सबसे जरूरी है। साथ ही समय-समय पर अपना ब्लड प्रेशर चेक करें, वजन को नियंत्रण में रखें, नियमित रूप से व्यायाम करें, खाने में नमक का सेवन कम करें, तनाव कम लें, खाने में कैल्शियम, पोटेशियम और मैग्नीशियम से भरपूर चीजों का सेवन ज्यादा करें, धूम्रपान और शराब के सेवन से बचें और स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं। वहीं 18 साल की उम्र के बाद सभी को कम से कम साल में दो बार बीपी चेक करवाना चाहिए।

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