रेगिस्तान के आसमान में उड़ान : ब्रीडिंग सेंटर के दो गोडावण पहली बार जंगल में छोड़े, आंखों पर काली पट्टी बांधकर लाया गया रिलीज साइट तक
टनल में ली थी ट्रेनिंग
जैसलमेर। विलुप्त होने की ओर जा रहे राज्य पक्षी गोडावण के संरक्षण अभियान में रविवार का दिन मील का पत्थर साबित हुआ है। जिले के कैप्टिव ब्रीडिंग सेंटर में कृत्रिम रूप से पोषित दो गोडावणों को पहली बार खुले जंगल में सुरक्षित छोड़ दिया गया है। 9.25 करोड़ रुपए की लागत से बनी अत्याधुनिक री-वाइल्डिंग टनल में तीन महीने तक खुद शिकार करने और प्राकृतिक माहौल में जीवित रहने की कड़ी ट्रेनिंग पूरी करने के बाद दोनों पक्षियों को स्वच्छंद जीवन जीने के लिए रिलीज किया गया। रविवार को डेजर्ट नेशनल पार्क के सम क्षेत्र स्थित सुदासरी रेंज में दोनों गोडावणों को आंखों पर काली पट्टी बांधकर सुरक्षित तरीके से रिलीज साइट तक पहुंचाया गया। केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव और राज्य के वन राज्य मंत्री संजय शर्मा की मौजूदगी में जैसे ही इनकी आंखों से पट्टी हटाई गई, दोनों पक्षी शुरूआत में कुछ क्षण हड़बड़ाए और फिर पंख पसारकर खुले आसमान में ऊंची उड़ान भर ली।
फरवरी में मिले अंडों से तैयार हुए थे चूजे :
फरवरी 2026 में प्राकृतिक आवास से लाए गए दो अंडों से इन चूजों का जन्म हुआ था। ब्रीडिंग सेंटर में विकसित किए जाने के बाद इन्हें 10 गोडावणों के समूह के साथ री-वाइल्डिंग टनल में भेजा गया। इस टनल में उन्हें प्राकृतिक भोजन की खोज करने, शिकार करने और उड़ने का कड़ा अभ्यास कराया गया।
2016 की योजना ने लिया ठोस रूप :
गोडावण के अस्तित्व को बचाने के लिए वर्ष 2016 में इंटीग्रेटेड जीआईबी कंजर्वेशन प्रोजेक्ट की रूपरेखा बनी थी, जिसके तहत 2019 में सम में अस्थाई ब्रीडिंग सेंटर और बाद में रामदेवरा में आधुनिक ब्रीडिंग सेंटर स्थापित हुआ। मार्च 2023 में पहले चूजे के जन्म के बाद 2025 में री-वाइल्डिंग प्रक्रिया का खाका तैयार किया गया।

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