आसमान से दिखेगा मरुधरा का सौंदर्य : पर्यटन में नवाचार की पहल, तनोट माता और सम डेजर्ट के लिए शुरू होगी हेलीकॉप्टर सेवा

भारत-पाक सीमा पर स्थित प्रसिद्ध तनोट माता मंदिर के दर्शन

आसमान से दिखेगा मरुधरा का सौंदर्य : पर्यटन में नवाचार की पहल, तनोट माता और सम डेजर्ट के लिए शुरू होगी हेलीकॉप्टर सेवा
स्वर्ण नगरी जैसलमेर में देश-विदेश से आने वाले सैलानियों के आकर्षण और लगातार बढ़ती संख्या को देखते हुए पर्यटन सुविधाओं में एक ऐतिहासिक विस्तार। सीमावर्ती जिले में पर्यटकों को अब पहाड़ों की तर्ज पर हेलीकॉप्टर सेवा का रोमांचकारी अनुभव मिल सकेगा।

जैसलमेर। स्वर्ण नगरी जैसलमेर में देश-विदेश से आने वाले सैलानियों के आकर्षण और लगातार बढ़ती संख्या को देखते हुए पर्यटन सुविधाओं में एक ऐतिहासिक विस्तार होने जा रहा है। सीमावर्ती जिले में पर्यटकों को अब पहाड़ों (वैष्णो देवी और केदारनाथ) की तर्ज पर हेलीकॉप्टर सेवा का रोमांचकारी अनुभव मिल सकेगा। जिला प्रशासन की ओर से सैलानियों को दी जाने वाली सुविधाओं को आधुनिक और सुलभ बनाने के लिए एक निजी कंपनी के साथ टाईअप किया जा रहा है, जिससे यह नवाचार जल्द ही धरातल पर उतरने वाला है। वर्तमान में जैसलमेर भ्रमण पर आने वाले पर्यटक सोनार किला, ऐतिहासिक हवेलियों, गडीसर झील और भीतरी शहर की हेरिटेज वॉक के जरिए यहां की लोक कला व संस्कृति को निहारते हैं।

इसके साथ ही वे भारत-पाक सीमा पर स्थित तनोट माता मंदिर, 1971 के भारत-पाक युद्ध के गवाह लोंगेवाला वॉर मेमोरियल और सम के लहरदार रेतीले धोरों पर कालबेलिया नृत्य व तारों भरी रात का लुत्फ उठाने जाते है। हालांकि, इन सभी पर्यटन स्थलों के लिए सड़क मार्ग बेहतरीन है, लेकिन जैसलमेर से तनोट और सम के बीच की दूरी अधिक होने से सैलानियों का काफी समय यात्रा में ही बीत जाता है। कई बार कम समय के लिए जैसलमेर आने वाले पर्यटक दूरी की वजह से इन सभी महत्वपूर्ण जगहों का भ्रमण नहीं कर पाते है। इस हेलीकॉप्टर सेवा के शुरू होने से पर्यटकों के समय की बड़ी बचत होगी।

हेलीकॉप्टर सेवा का संभावित रूट चार्ट 
कंपनी सूत्रों से मिली जानकारी अनुसार, इस विशेष हवाई सफर का खाका तैयार कर लिया गया है जिसमे हेलीकॉप्टर जैसलमेर से पर्यटकों को लेकर उड़ान भरेगा। सबसे पहले सैलानियों को भारत-पाक सीमा पर स्थित प्रसिद्ध तनोट माता मंदिर के दर्शन करवाए जाएंगे। दर्शन के बाद हेलीकॉप्टर यात्रियों को सम के रेतीले धोरों पर ड्रॉप करेगा, जहां वे पारंपरिक सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आनंद लेकर रात्रि विश्राम कर सकेंगे। अगले दिन इसी हेलीकॉप्टर के माध्यम से सैलानी वापस जैसलमेर लौट आएंगे।

 पर्यटन उद्योग को लगेंगे पंख : पर्यटन व्यवसाय से जुड़े मयंक भाटिया ने बताया,योजना अभी प्रारम्भिक स्तर पर है।  सैलानियों को सुविधा देने के लिये एक सर्किट बनाया जा रहा है जिसमें जैसलमेर-तनोट-सम के लिये योजना बनाई जा रही है। अभी इसको लेकर अनुमतियां एवं इसकी फिजिबिलिटी को लेकर काम किया जा रहा है। अगर यह सेवा धरातल पर उतरती है तो जैसलमेर के पर्यटन के लिये यह एक नवाचार होगा और यहां आने वाले सैलानियों की संख्या में भी इजाफा हो सकेगा। यह पहल जैसलमेर के टूरिज्म सेक्टर के लिए एक बड़ा गेम-चेंजर साबित होगी। 
फोटो- 

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