जोधपुर डिस्कॉम के निजीकरण के खिलाफ कर्मचारियों का बड़ा विरोध, सरकार को सौंपा मांग पत्र
बीकानेर और भरतपुर में लागू किए गए फ्रेंचाइजी मॉडल भी सफल नहीं
बिजली विभाग से जुड़े कर्मचारियों और अधिकारियों ने जोधपुर डिस्कॉम के प्रस्तावित निजीकरण के खिलाफ जोरदार विरोध दर्ज। संयुक्त संघर्ष समिति ने 15 अप्रैल 2026 को मुख्यमंत्री के नाम एक विस्तृत ज्ञापन सौंपकर इस निर्णय को जनहित और राज्य हित के खिलाफ बताया।
जोधपुर। बिजली विभाग से जुड़े कर्मचारियों और अधिकारियों ने जोधपुर डिस्कॉम के प्रस्तावित निजीकरण के खिलाफ जोरदार विरोध दर्ज कराया है। संयुक्त संघर्ष समिति ने 15 अप्रैल 2026 को मुख्यमंत्री के नाम एक विस्तृत ज्ञापन सौंपकर इस निर्णय को जनहित और राज्य हित के खिलाफ बताया है। समिति का कहना है कि इस कदम से न सिर्फ कर्मचारियों में असंतोष बढ़ेगा, बल्कि आम उपभोक्ताओं पर भी इसका नकारात्मक असर पड़ेगा। समिति ने अपने ज्ञापन में देश और राज्य के पिछले अनुभवों का हवाला देते हुए निजीकरण को विफल मॉडल बताया है। ओडिशा का उदाहरण देते हुए कहा गया कि वहां निजी कंपनियां आपदा के समय जिम्मेदारी निभाने में असफल रहीं और संकट के वक्त सरकारी कर्मचारियों को ही व्यवस्था संभालनी पड़ी।
इसी तरह राजस्थान के कोटा, बीकानेर और भरतपुर में लागू किए गए फ्रेंचाइजी मॉडल भी सफल नहीं रहे। निजी कंपनियों ने समझौतों का पालन नहीं किया और अंततः कर्मचारियों का भार फिर से डिस्कॉम पर आ गया। ज्ञापन में यह भी स्पष्ट किया गया कि डिस्कॉम का घाटा कर्मचारियों की वजह से नहीं, बल्कि गलत नीतियों, अत्यधिक आउटसोर्सिंग और ठेका प्रथा के कारण हुआ है। कर्मचारियों की मेहनत से AT&C लॉस को 34% से घटाकर 22% तक लाया गया है, जिससे वित्तीय स्थिति में सुधार हुआ है। समिति का दावा है कि वर्ष 2023-24 और 2024-25 में जोधपुर डिस्कॉम मुनाफे में रहा है, ऐसे में निजीकरण का कोई औचित्य नहीं बनता। सबसे बड़ा सवाल 6000 करोड़ रुपये की RDSS योजना को लेकर उठाया गया है। समिति का कहना है कि जब सरकार इस बड़ी राशि से बिजली ढांचे को मजबूत कर रही है, तो इसका लाभ निजी कंपनियों को देना गलत होगा। यह पैसा केवल सरकारी व्यवस्था को सुदृढ़ करने में ही इस्तेमाल होना चाहिए।

Comment List