42 करोड़ रुपए के फिल्म प्रोजेक्ट कॉन्ट्रैक्ट विवाद का मामला : विक्रम भट्ट की गिरफ्तारी, हाईकोर्ट ने पुलिस कार्यवाही पर उठाए गंभीर सवाल 

पुलिस महानिरीक्षक रेंज उदयपुर और पुलिस अधीक्षक को 15 दिसंबर को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से पेश होने का आदेश    

42 करोड़ रुपए के फिल्म प्रोजेक्ट कॉन्ट्रैक्ट विवाद का मामला : विक्रम भट्ट की गिरफ्तारी, हाईकोर्ट ने पुलिस कार्यवाही पर उठाए गंभीर सवाल 

राजस्थान हाईकोर्ट ने विक्रम भट्ट और अन्य के खिलाफ गिरफ्तारी पर पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए। कोर्ट ने 42 करोड़ रुपए के फिल्म प्रोजेक्ट विवाद में उदयपुर पुलिस अधिकारियों को 15 दिसंबर को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में पेश होने का आदेश दिया। भट्ट पक्ष ने इसे सिविल मामला बताते हुए जल्दबाजी में गिरफ्तारी को कानून का दुरुपयोग बताया।

जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट जस्टिस समीर जैन की बेंच ने फिल्म निमार्ता, निर्देशक विक्रम प्रवीण भट्ट, उनकी पत्नी और सहकर्मियों की गिरफ्तारी के मामले में पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए हैं। हाईकोर्ट ने मामले की पूरी जांच प्रक्रिया पर स्पष्टता लाने के लिए पुलिस महानिरीक्षक उदयपुर और पुलिस अधीक्षक उदयपुर को 15 दिसंबर को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश होने का आदेश दिया है। मामला 42 करोड़ रुपए के फिल्म प्रोजेक्ट से जुड़ा कॉन्ट्रैक्ट विवाद का है, जिसे लेकर उदयपुर निवासी डॉ अजय मुरडिया ने विक्रम भट्ट और अन्य के खिलाफ धोखाधड़ी और आपराधिक विश्वासघात का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज कराई थी। शिकायतकर्ता का आरोप है कि फिल्म निर्माण के दौरान अत्यधिक और मनगढ़ंत खर्च दिखाए गए, जिससे आर्थिक नुकसान हुआ। वहीं भट्ट व अन्य की ओर से अधिवक्ता डीएस घडसाना,अधिवक्ता महेन्द्र गोदारा व अन्य ने पैरवी करते कहा कि यह विवाद पूरी तरह सिविल प्रकृति का है और इसे आपराधिक रंग देना कानून का दुरुपयोग है।

अधिवक्ताओं ने कहा कि याची भट्ट फिल्म उद्योग के सम्मानित निर्देशक-निमार्ता हैं। कॉन्ट्रैक्ट के तहत बनी दोनों फिल्में पहले ही रिलीज हो चुकी हैं। लगभग डेढ़ वर्ष तक कॉन्ट्रैक्ट बिना विवाद के चला और उसे पूरी तरह निभाया गया। अचानक बढ़े हुए खर्चों को लेकर शिकायत की गई और 7 दिसंबर 2025 (रविवार) को पुलिस ने जल्दबाजी में गिरफ्तारी कर ली। न तो आवश्यक प्रारंभिक जांच की गई और न ही मामले में कोई ऐसा तत्व है जो इसे आपराधिक बनाता हो।अधिवक्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट के महत्वपूर्ण फैसलों ललिता कुमारी बनाम उत्तर प्रदेश सरकार, दिल्ली रेस क्लब बनाम उत्तर प्रदेश (2024) और भजनलाल केस का हवाला देते कहा कि इस तरह के मामलों में एफआईआर दर्ज करने से पहले प्रारंभिक जांच जरूरी है और दो परस्पर विरोधी धाराओं में एक साथ मामला दर्ज नहीं किया जा सकता।

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