पुत्री को भरण पोषण वयस्क होने तक ही मिलेगा : हाईकोर्ट
विवाह की बजाय बालिग होने तक ही हकदार
राजस्थान हाईकोर्ट ने पुन: निरीक्षण याचिका को आंशिक रुप से स्वीकार करते हुए फैमिली कोर्ट बालोतरा के आदेश को बदलते कहा, कि पुत्रियों को वयस्क होने तक ही भरण पोषण भत्ता पाने का हक है।
जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने पुन: निरीक्षण याचिका को आंशिक रुप से स्वीकार करते हुए फैमिली कोर्ट बालोतरा के आदेश को बदलते कहा, कि पुत्रियों को वयस्क होने तक ही भरण पोषण भत्ता पाने का हक है। हाईकोर्ट जस्टिस मनोज कुमार गर्ग ने फैमिली कोर्ट के उस आदेश को बदल दिया जिसमे उन्होंने पुत्रियों को उनके विवाह होने तक भरण पोषण भत्ता प्राप्त करने का अधिकारी माना था। हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट बालोतरा के आदेश को आंशिक रूप से बदलते हुए चारों पुत्रियों को उनके वयस्क होने तक ही का भरण पोषण भत्ता प्राप्त करने की अधिकारी माना। बाड़मेर निवासी याचिकाकर्ता जीवाराम की ओर से पुन: निरीक्षण याचिका पेश करते हुए फैमिली कोर्ट के आदेश को चुनौती दी। मामले के अनुसार प्रार्थी की पत्नी ने अपने व अपनी चार पुत्रियों के लिये भरण पोषण भत्ता प्राप्त करने के लिये फैमिली कोर्ट बालोतरा में एक प्रार्थना पत्र अन्तर्गत धारा 125 सीआर.पी.सी. का प्रस्तुत किया था। जिसे स्वीकार करते अधीनस्थ न्यायालय ने पत्नी व प्रत्येक पुत्री के लिए चार हजार रुपए मासिक भरण पोषण भत्ता देने का आदेश पारित किया था। आदेश में फैमिली कोर्ट बालोतरा ने प्रार्थी की चारों पुत्रियों को विवाह होने तक उन्हें भरण पोषण भत्ता प्राप्त करने का अधिकारी माना था। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता हैदर आगा व सलमान आगा ने बताया, धारा 125 सीआरपीसी के तहत अवयस्क संतान की परिभाषा में पुत्र व पुत्री दोनों शामिल होते हैं।
इस कानून में पुत्री के लिए अलग से कोई विशेष प्रावधान नहीं किया गया है। ऐसे में जब पुत्र को वयस्क होने तक ही ये भरण पोषण भत्ता मिलता है तो यही नियम पुत्री पर भी लागू होगा। हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के आदेश के खिलाफ पेश पुन: निरीक्षण याचिका को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए पुत्रियों के विवाह होने की बजाय वयस्क होने तक ही भरण पोषण भत्ता पाने का हकदार माना है। हाईकोर्ट ने भरण पोषण भत्ते को चार हजार रुपए मासिक से कम करने की प्रार्थना को अस्वीकार कर दिया।
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