अपरिपक्व एकल बुजुर्ग महिलाओं के कल्याण के लिए क्या है योजना : हाईकोर्ट
राज्य सरकार सहित अन्य को नोटिस जारी करते हुए जवाब तलब किया
राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण से पूछा है कि मानसिक रूप से अपरिपक्व बुजुर्ग एकल महिलाओं के कल्याण के लिए उनके पास क्या योजना है।
जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण से पूछा है कि मानसिक रूप से अपरिपक्व बुजुर्ग एकल महिलाओं के कल्याण के लिए उनके पास क्या योजना है। इसके साथ ही अदालत ने मामले में राज्य सरकार सहित अन्य को नोटिस जारी करते हुए जवाब तलब किया है। वहीं अदालत ने मामले में अधिवक्ता पूर्वी माथुर को न्याय मित्र बनाते हुए उनसे भी इस संबंध में सुझाव देने को कहा है। जस्टिस समीर जैन की एकलपीठ ने यह आदेश सीमा की याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई करते हुए दिए।
याचिका में अधिवक्ता ब्रजेश कुमार शर्मा ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता 63 साल की एकल बुजुर्ग महिला है और मानसिक रूप से अपरिपक्व है। उसके पिता सचिवालय और मां चिकित्सा विभाग में कार्यरत थी। दोनों का पूर्व में निधन होने पर वह अपने भाई-भाभी के पास रहने लगी। वहीं कुछ सालों पहले उसकी भाभी का भी निधन हो गया।
याचिकाकर्ता ने आश्रित फैमिली पेंशन के लिए पिता के विभाग में आवेदन किया, लेकिन विभाग ने उसका आवेदन यह कहते हुए खारिज कर दिया कि उसके पिता ने सरकारी सेवा में रहते हुए कभी भी याचिकाकर्ता की मानसिक दिव्यांगता के बारे में कोई जानकारी नहीं दी और ना ही कोई दस्तावेज पेश किए। ऐसे में उसे आश्रित फैमिली पेंशन दिलाई जाए।
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