रेगिस्तान के हुनर पर युद्ध की मार : हैंडीक्राफ्ट में ब्लैकआउट, 700 फैक्ट्रियां बंद ; करोड़ों का कारोबार संकट में
युद्ध के कारण पेट्रोकेमिकल उत्पादों की सप्लाई प्रभावित
खाड़ी देशों में बढ़ते युद्ध तनाव का असर अब राजस्थान के जोधपुर के मशहूर हैंडीक्राफ्ट उद्योग पर साफ नजर आने लगा। अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनिश्चितता, कच्चे माल की कमी और ऑर्डर रुकने से यह सेक्टर गहरे संकट में पहुंच गया है। कभी विदेशी बाजारों में अपनी पहचान बनाने वाला जोधपुर का हुनर आज ब्लैकआउट जैसी स्थिति से गुजर रहा।
जोधपुर। खाड़ी देशों में बढ़ते युद्ध तनाव का असर अब राजस्थान के जोधपुर के मशहूर हैंडीक्राफ्ट उद्योग पर साफ नजर आने लगा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनिश्चितता, कच्चे माल की कमी और ऑर्डर रुकने से यह सेक्टर गहरे संकट में पहुंच गया है। कभी विदेशी बाजारों में अपनी पहचान बनाने वाला जोधपुर का हुनर आज ब्लैकआउट जैसी स्थिति से गुजर रहा है। हैंडीक्राफ्ट निर्यातक विनोद जौहरी के अनुसार, हाल ही में अमेरिका की ओर से टैरिफ में राहत मिलने के बाद उद्योग को थोड़ी उम्मीद जगी थी, लेकिन अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने हालात फिर बिगाड़ दिए। सबसे बड़ा झटका यह है कि विदेशी खरीदार (बायर) अब नए ऑर्डर देने से बच रहे हैं और पुराने ऑर्डर भी होल्ड पर डाल दिए गए हैं।
कच्चे माल की कमी बनी सबसे बड़ी वजह: युद्ध के कारण पेट्रोकेमिकल उत्पादों की सप्लाई प्रभावित हुई है, जिससे कच्चे माल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी हो गई है। खासतौर पर पाउडर कोटिंग की कमी ने उद्योग की रीढ़ तोड़ दी है। लोहे के उत्पादों में इस्तेमाल होने वाली इस कोटिंग के लिए एलपीजी गैस जरूरी होती है, जिसकी कमी के चलते कोटिंग यूनिट्स में काम बंद हो गया है। इसके अलावा थिनर, सीलर, लैकर, डिस्टेंपर जैसे केमिकल्स और पैकिंग में काम आने वाला फोम, बबल रैप व टेप रोल भी आसानी से उपलब्ध नहीं हो पा रहे। नतीजा यह है कि तैयार माल भी समय पर पैक नहीं हो पा रहा और सप्लाई चेन पूरी तरह प्रभावित हो गई है।

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