नाबालिग के अपहरण और दुष्कर्म के मामले में 20 साल की जेल, जानें पूरा मामला
एक लाख दस हजार रुपए के अर्थ दंड से दंडित
आरोपी बालिका को बहला फुसलाकर अपने साथ बाइक पर ले गया था।
कोटा। दो साल पहले नाबालिग बालिका का अपहरण कर दुष्कर्म करने के मामले में मंगलवार को पोक्सो क्रम संख्या पांच के न्यायाधीश प्रेमराज सिंह चन्द्रावत ने आरोपी सुरेश मीणा को दोषी मानते हुए बीस साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। न्यायाधीश ने आरोपी पर एक लाख दस हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है। आरोपी के खिलाफ पीड़िता के पिता ने पुलिस थाना कैथून में रिपोर्ट दी थी।
विशिष्ट लोक अभियोजक महेश चंद चंदवानी ने बताया कि पीड़िता के पिता ने 26 मार्च 2024 को रिपोर्ट दी थी। जिसमें बताया था कि उसके बच्चे रात को खाना खाकर सो गए थे। सुबह करीब 6 बजे देखा तो उसकी छोटी बेटी जो कक्षा आठ में गांव में ही पढ़ती है वह गायब थी। बिना बताए कहीं चली गई। पुत्री को तलाश किया लेकिन कोई सुराग नहीं लगा । रिपोर्ट के आधार पर पुलिस अपहरण सहित अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज किया। अनुसंधान के दौरान बालिका को पुलिस ने 27 मार्च 2024 को आरोपी सुरेश मीणा के पास से दस्तयाब किया। बालिका के बयान और मेडिकल के आधार पर आरोपी के खिलाफ दुष्कर्म और पोक्सो एक्ट की धारा जोड़ते हुए आरोपी को गिरफ्तार किया गया।
पुलिस अनुसंधान में सामने आया कि आरोपी 25 मार्च 2024 की रात दस से सुबह दस बजे के बीच फरियादी के घर से उसकी पुत्री को बहला फुसलाकर अपने साथ बाइक पर बैठाकर ले गया । जोगणिया माता चित्तौडगढ़ में एक कमरा किराए पर लिया उसके साथ दुष्कर्म किया। पुलिस ने मामले में आरोपी के खिलाफ न्यायालय में चालान पेश किया। ट्रायल के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से कई गवाहों के बयान दर्ज कराए गए। न्यायाधीश ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद आरोपी सुरेश मीणा को दोषी मानते हुए बीस साल के कठोर करावास की सजा से दंडित किया और एक लाख दस हजार रुपए के अर्थ दंड से दंडित किया है।

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