रणथंभौर से बाघ आया और 8 दिन में ही जंगल में छोड़ा लेकिन 13 महीनों से कैद बाघिन अब भी आजादी को तरसी, दो वर्ष पहले बाघ को रामगढ़ और बाघिन को मकुंदरा में किया था शिफ्ट

रिवाइल्डिंग के नाम पर 3 साल से पिंजरों में कट रही टाइगर भाई - बहन की जिंदगी

रणथंभौर से बाघ आया और 8 दिन में ही जंगल में छोड़ा लेकिन 13 महीनों से कैद बाघिन अब भी आजादी को तरसी, दो वर्ष पहले बाघ को रामगढ़ और बाघिन को मकुंदरा में किया था शिफ्ट

50 की जगह 85 से ज्यादा किए शिकार, फिर भी किस्मत का नहीं हुआ फैसला।

कोटा। रणथंभौर टाइगर रिजर्व से मुकुंदरा लाए बाघ को महज 8 दिन में ही खुले जंगल में छोड़ दिया गया लेकिन पिछले 13 महीनो से रिवाइल्डिंग के नाम पर सॉफ्ट एनक्लोजर में कैद बाघिन एमटी-7 को अब तक बंदिशों से आजादी नहीं मिली। जबकि, एनटीसीए की टीम गत वर्ष नवंबर में ही मुकुंदरा और रामगढ़ में रिवाल्डिंग बाघ- बाघिन की वास्तविक स्थिति का भौतिक आकलन कर चुकी है। इसके बावजूद टाइगर और टाइग्रेस की आजादी पर फैसला नहीं हो सका। इधर, वन्यजीव प्रेमियों का तर्क है, हार्ड रिलीज में अनावश्यक देरी से बाघिन के विकास पर विपरीत असर पड़ सकता है।

दरअसल,अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क से रिवाल्डिंग के लिए दिसंबर 2024 में बाघिन को मुकुंदरा व बाघ को रामगढ़ टाइगर रिजर्व के सॉफ्ट एनक्लोजर में शिफ्ट किया था। उस समय वन अधिकारियों ने बाघिन के 40 और बाघ द्वारा 50 शिकार सफलतापूर्वक कर लेने पर खुले जंगल में हार्ड रिलीज किया जाना निर्धारित किया था। लेकिन, टाइग्रेस एमटी-7 और टाइगर आरवीटीआर- 7 टारगेट से ज्यादा शिकार कर चुके है। इसके बावजूद उन्हें 5 हैक्टेयर के सॉफ्ट एनक्लोजर में ही रखा जा रहा है। वर्तमान में दोनों की उम्र करीब 3 वर्ष हो चुकी है। जबकि इस उम्र के अन्य टाइगर- टाइग्रेस अपनी टेरीटरी बनाने के लिए जंगल का चप्पा-चप्पा छान लेते हैं ।

90 से ज्यादा शिकार, फिर भी आजादी नहीं
मुकुंदरा से मिली जानकारी के अनुसार, बाधिन एमटी-7 अब तक 85 से 90 के बीच सफलतापूर्वक शिकार कर चुकी है। जबकि, टारगेट 40 का ही था। वहीं बाघ रामगढ़ में करीब 110 शिकार कर चुका है। जिसका टारगेट 50 का ही था। शिकार किए गए वन्यजीवों की संख्या से स्पष्ट होता है कि बाघ बाघिन शिकार करना सीख चुकें है। ऐसे में उसे खुले जंगल में छोड़ दिया जाना चाहिए। ताकि, वह जंगल की विपरीत परिस्थितियों में खुद को ढाल सके।

बाघिन अपने से दो गुना ऊंचे जानवर का कर चुकी शिकार
टाइग्रेस एमटी-7 अब तक हिरण ही नहीं बल्कि अपने से आकर में दो गुना ऊंचे वन्यजीव नील गाय का भी शिकार कर चुकी है। जबकि, नील गाय का शिकार आसान नहीं होता है। बाघिन के लगातार शिकार किए जाने से 5 हैक्टेयर के एनक्लोजर में प्रे-बेस की भी कमी होती जा रही है। ऐसे में रिवाइल्डिंग के उद्देश्यों की सफलता के लिए उसे शीघ्र ही खुले जंगल में छोड़ा जाना आवश्यक है।

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इधर, ढाई साल के बाघ टेरिटरी बना रहे, उधर 3 वर्ष के पिंजरों में कैद
वन्यजीव प्रेमी लोकेश कुमार का कहना है, बाघिन एमटी-7 और आरवीटीआर- 6 को अभेडा बायोलॉजिकल पार्क से पिछले साल दिसम्बर माह में शिफ्ट किया गया था। इस दरमियान दोनों खुले जंगल में विचरण करने की एनटीसीए के निर्धारित मापदंडों को सफलतापूर्वक पूरा कर चुके हैं। वर्तमान में दोनों की उम्र लगभग 3 साल हो चुकी है। इसके बावजूद वह 5- 5 हेक्टेयर के सॉफ्ट एनक्लोजर से बाहर नहीं निकल सके। जबकि, इस उम्र के अन्य बाघ-बाघिन खुद को एक्सप्लॉजर करते हैं और मां से अलग होकर अपनी टेरीटरी बनाने के लिए जंगल को सर्च करते हैं। इस बीच कई परिस्थितियों से गुजरने के दौरान बहुत कुछ सीखते हैं, जो जंगल में उनके सरवाइवल रेट को बढ़ाने में मददगार होते हैं। इसका उदाहरण रामगढ़ टाइगर रिजर्व में मध्य प्रदेश के पेंच रिजर्व से लाई गई बाघिन और मुकुंदरा में हाल ही में लाए बाघ की उम्र 3 साल से कम है दोनों ही खुले जंगल में अपनी टेरिटरी बना रहे हैं । ऐसे में इन दोनों रिवाइल्डिंग बाघ बाघिन को भी जल्द से जल्द हार्ड रिलीज किया जाना चाहिए।

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कैसे सीखेंगे शिकार ढूंढना व टेरीटरी बनाना
बायोलॉजिस्ट रवि कुमार बताते हैं, पिछले एक साल से बाधिन दरा में 5 हैक्टेयर के सॉफ्ट एनक्लोजर में रह रही है। जहां रिवाइल्डिंग के नाम पर सिर्फ शिकार करना ही सीखा है। लेकिन, शिकार ढूंढना नहीं सीख पा रही है। क्योंकि, सॉफ्ट एनक्लोजर में पहले से ही प्रे-बेस की उपलब्धता सुनिश्चित की जाती है। जबकि, खुले जंगल में ऐसा नहीं होता है। वहां हर दिन चुनौतियों के बीच उन्हें भोजन ढूंढना पड़ता है, जो पिंजरे में कैद होने के कारण इस गुण का विकास नहीं हो पा रहा। वहीं, अनावश्यक देरी से टेरीटरी बनाने में भी उसे परेशानी का सामना करना पड़ेगा

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एनटीसीए की रिपोर्ट पर अटकी शिफ्टिंग
मुकुंदरा व रामगढ़ टाइगर रिजर्व में रिवाल्डिंग बाघ और बाघिन की खुले जंगल में शिफ्टिंग पर फैसला एनटीसीए की रिपोर्ट पर अटकी हुई है। जबकि नचा की टीम दो माह पहले ही मुकुंदरा और रामगढ़ में टाइगर और टाइग्रेस की फिजिकल एक्टिविटी का भौतिक आकलन कर चुकी है।
इसके बावजूद अब तक रिवाल्डिंग बाघ बाघिन की आजादी पर फैसला नहीं हो सका।

इनका कहना है
अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क से दिसम्बर 2024 में रिवाइल्डिंग के लिए मुकुंदरा व रामगढ़ में शिफ्ट किए गए बाघ बाघिन को खुले जंगल में छोड़ा जाना है। हमारी और से सभी तैयारी पूरी है। एनटीसीए की रिपोर्ट का इंतजार है। जिसके आधार पर खुले जंगल में छोड़े जाने को लेकर निर्णय होगा।
सुगनाराम जाट, सीसीएफ मुकुंदरा

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