एक ही समय सुनाई दे रहा गाड़ी वाला आया कचरा निकाल...
घर-घर कचरा संग्रहण के टिपर सुबह के समय ही उठा रहे कचरा : शाम को नहीं जाने से सड़कों पर लग रहा कचरे का ढेर
घर-घर कचरा संग्रहण योजना चल तो रही है लेकिन वह एक ही समय काम कर रही है।
कोटा। गाड़ी वाला आया कचरा निकाल....। यह गूंज हर व्यक्ति के कानों में पिछले कई सालों से सुनाई दे रही है। पहले यह सुबह-शाम दोनों समय सुनाई देती थी। लेकिन कुछ समय से यह एक ही समय सुबह सुनाई दे रही है। जिससे शाम के समय कई लोग सड़कों पर ही कचरा डाल रहे हैं। स्वच्छ भारत मिशन के तहत नगर निगम ने घर-घर कचरा संग्रहण अभियान शुरू किया था। इसके तहत पहले जहां लोग घरों से निकलने वाले कचरे को सड़क पर या नजदीकी कचरा पॉइंट पर डालते थे। उसके स्थान पर लोगों की इस आदत को बदलने के लिए उनके घरों से ही कचरा एकत्र किया जाने लगा। इसके लिए नगर निगम ने टिपर चलाए। ये टिपर निगम के सभी वार्डों में सुबह-शाम जाते थे और हर घर से कचरा एकत्र करते थे। टिपर के आने का लोगों को पता चल सके इसके लिए उसमें एक गाना बजाया गया। टिपर चालक वार्ड में जाते ही उस गाने को बजा देता है। जिससे लोग घरों से बाहर निकलकर डस्टबीन का कचरा उसमें डाल देते हैं। जिससे सड़क पर गंदगी नहीं फेले। इस मकसद से शुरू की गई घर-घर कचरा संग्रहण योजना चल तो रही है लेकिन वह एक ही समय काम कर रही है। जिससे शाम के समय टिपर वार्डो में नहीं जाने पर कई लोग सड़क पर ही कचरा डाल रहे हैं।
यह है समय
नगर निगम से प्राप्त जानकारी के अनुसार घर-घर कचरा संग्रहण के तहत टिपर सुबह 7 से 10 और शाम को 3 से 5 के बीच में वार्डों में कचरा एकत्र करने जाते हैं। नियमानुसार टिपरों के लिए दोनों समय निर्धारित किया हुआ है। लेकिन वर्तमान में नगर निगम कोटा उत्तर हो या दक्षिण अधिकतर जगह पर सिर्फ एक ही समय सुबह टिपर वार्डों में कचरा एकत्र कर रहे हैं।
दक्षिण में दो और उत्तर में हर वार्ड में तीन टिपर
कोटा में एक नगर निगम के समय कुल 65 वार्ड थे। परिसीमन के बाद दो नगर निगम कोटा उत्तर व दक्षिण बनने पर वार्डों की संख्या ढाई गुना 150 हो गई। जिनमें से कोटा उत्तर में 70 व कोटा दक्षिण में 80 वार्ड बनाए गए। नगर निगम द्वारा घर-घर कचरा संग्रहण के लिए संचालित किए जा रहे टिपरों में भी भेदभाव हो रहा है। कोटा उत्तर के सभी 70 वार्डों में तीन-तीन टिपर संचालित हो रहे हैं। वहीं कोटा दक्षिण के सभी 80 वार्ड में मात्र दो-दो टिपर संचालित हो रहे हैं। जबकि कोटा उत्तर की तुलना में कोटा दक्षिण में कई वार्ड बड़े हैं। नगर निगम ने कई जगह पर टिपर संचालन का ठेका दिया हुआ है। जबकि कई जगह पर निगम अपने स्तर पर टिपरों का संचालन कर रहा है। पहले निगम ने टिपर भी ठेके पर लिए हुए थे। जबकि वर्तमान में अधिकतर टिपर निगम ने खरीदे हैं। पहले जहां टिपर खुले हुए व छोटे थे। वहीं नए टिपर बड़े और ढके हुए हैं।
गीला-सूखा कचरा एक साथ
नए टिपरों में गीला और सूखा कचरा अलग-अलग डालने की सुविधा है। लेकिन इतने साल बाद भी अभी तक दोनों तरह का कचरा टिपरों में एक साथ ही डाला जा रहा है। इसके लिए घरों में भी दो डस्टबीन नहीं रखे जा रहे हैं।
एक समय में सभी नहीं डाल पाते कचरा
कंसुआ निवासी सोनू सेन का कहना है कि टिपर पहले दोनों समय आते थे। अभी काफी सय से सिर्फ सुबह के समय ही आ रहे हैं। जिससे कई लोग शाम के समय निकलने वाले कचरे को सड़क पर डाल रहे हैं। सुबह जिस समय टिपर आते हैं उस समय सभी घरों के लोग कचरा नहीं’ डाल पाते। कुछ लोग शाम को डालते हैं। थेगड़ा निवासी अरुण सिंह का कहना है कि टिपरों को दोनों समय वार्ड में आना चाहिए। शाम को नहीं आने से कुछ लोग सड़क पर कचरा डाल रहे हैं। यदि टिपर शाम को भी आएंगे तो थोड़ा कचरा भी सड़क पर नहीं डलेगा। बसंत विहार निवासी निहारिका गौतम का कहना है कि सुबह जिस समय टिपर आया है उस समय घर पर काम अधिक रहता है। जिससे कचरा नहीं डाल पाते। शाम को टिपर नहीं आता तो कचरा इकट्ठा होने पर पास के कचरा पॉइंट पर डालना मजबूरी हो जाती है। अगले दिन तक कचरा रखने पर दुर्गंध आने लगती है।
इनका कहना है
वार्डों में घरों से कचरा एकत्र करने के लिए टिपरों को दोनों समय ही जाने का नियम है।
अधिकतर वार्डों में दोनों समय जा भी रहे हैं। कई वार्ड बड़े होने से हो सकता है समय अधिक लगने से एक ही बार में कचरा एकत्र हो रहा हो। इसकी जानकारी करवाई जाएगी। वैसे नए टेंडर में हर वार्ड में तीन-तीन टिपर संचालन की योजना है।
- राजीव अग्रवाल, महापौर, नगर निगम कोटा दक्षिण
कोटा उत्तर निगम क्षेत्र के हर वार्ड में दोनों समय टिपर जा रहे हैं। किसी वार्ड में समय अधिक लगने पर एक ही समय जा सकते हैं। उन वार्डों से शिकायत आने पर टिपर भेजे जाते हैं। बुधवार को भाजपा पार्षद नंद किशोर मेवाड़ा की शिकायत पर कि एक ही समय टिपर आ रहा है तो दूसरे टिपर को भजा गया था। जिस वार्ड में शाम को नहीं जा रहे होंगे। वहां की जानकारी कर भिजवाए जाएंगे।
- मंजू मेहरा, महापौर, नगर निगम कोटा उत्तर
नियम तो सुबह-शाम दोनों समय ही टिपरों को वार्ड में घरों से कचरा एकत्र करने का है। लेकिन अधिकतर घरों में सुबह के समय ही सफाई होती है। कचरा भी उसी समय में निकलता है। इस कारण से कई वार्डो में हो सकता है टिपर एक ही समय जा रहे होंगे। जिन वार्डो में शाम को टिपर नहीं जा रहे हैं तो वहां के लोगों को जागरूक होकर अगले दिन ही कचरा टिपर में डालना चाहिए। न कि सड़क पर कचरा डालना चाहिए। इंदौर शहर से बराबरी करने है तो लोगों को भी जागरुक होना पड़ेगा।
- पवन मीणा, अध्यक्ष, सफाई समिति, नगर निगम कोटा दक्षिण

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