किसान खेतों में जाने से कतरा रहे : गैंता के पास बना है चीते के शावक का मूवमेंट, ग्रामीणों में दहशत
राजस्थान पहुंचा है शावक चीता केपी-2
मध्यप्रदेश की कूनो सेंचुरी से भटककर राजस्थान पहुंचे शावक चीते केपी-2 का मूवमेंट लगातार दूसरे दिन भी गैंता क्षेत्र के आसपास 2-3 किलोमीटर के दायरे में बना। किरपुरा के आसपास वन क्षेत्र में उसकी लोकेशन ट्रेस। चीते के मूवमेंट पर नजर रखने के लिए इटावा वन मंडल के साथ कूनो सेंचुरी और रामगढ़ विषधारी अभयारण्य बूंदी की टीमें लगातार निगरानी कर रही।
इटावा। मध्यप्रदेश की कूनो सेंचुरी से भटककर राजस्थान पहुंचे शावक चीते केपी-2 का मूवमेंट लगातार दूसरे दिन भी गैंता क्षेत्र के आसपास 2-3 किलोमीटर के दायरे में बना रहा। वहीं किरपुरा के आसपास वन क्षेत्र में उसकी लोकेशन ट्रेस की गई है। चीते के मूवमेंट पर नजर रखने के लिए इटावा वन मंडल के साथ कूनो सेंचुरी और रामगढ़ विषधारी अभयारण्य बूंदी की टीमें लगातार निगरानी कर रही हैं। बावजूद इसके गेता और आसपास के गांवों में दहशत का माहौल बना हुआ है। इन दिनों फसलों की कटाई का समय होने के बावजूद किसान खेतों में जाने से डर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि चीते की मौजूदगी के कारण वे अपनी रोजमर्रा की गतिविधियों को भी सीमित कर रहे हैं।
जानकारी के अनुसार साउथ अफ्रीका मूल की मादा चीता आशा के 22 माह के शावक केपी-2 का पिछले डेढ़ महीने से बारां जिले के बाद अब कोटा जिले के इटावा क्षेत्र में मूवमेंट बना हुआ है। हाल ही में उसने राजस्थान-मध्यप्रदेश सीमा से सटे पार्वती नदी क्षेत्र से दिशा बदलते हुए चंबल नदी के पास के क्षेत्रों की ओर रुख किया है, जो कोटा, बूंदी और सवाई माधोपुर जिलों से सटे इलाके हैं। यह क्षेत्र घड़ियाल अभयारण्य और रणथंभौर अभयारण्य से सटा हुआ है, जिससे वन्यजीवों की मौजूदगी और बढ़ जाती है।
सुरक्षा को लेकर उठे सवाल
चीते के लगातार मूवमेंट को लेकर ग्रामीणों में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ रही है। लोगों का कहना है कि चंबल नदी क्षेत्र घड़ियाल अभयारण्य होने के कारण पहले से ही संवेदनशील है, ऐसे में चीते की सुरक्षा भी चुनौतीपूर्ण है। वहीं, चीते के मूवमेंट को लेकर संबंधित विभागों के अधिकारी विस्तृत जानकारी देने से बचते नजर आ रहे हैं, जिससे क्षेत्रवासियों में और अधिक असमंजस की स्थिति बनी हुई है।

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