विकलांगता आवेदन पत्रों में फजीर्वाड़ा : मचा हड़कम्प, सभी ऑफलाईन प्रक्रिया की बंद
ग्रामीण क्षेत्रों से विकलांगता प्रमाणपत्र बनवाने लोग आते है कोटा
कई फार्मो में ''घुटने के नीचे एक पैर कटा'' लिखा असेसमेन्ट बना शक का कारण।
कोटा। जिले में विकलांगता प्रमाण पत्रों को लेकर बड़ा गडबड़ झाला सामने आया है। कोटा एमबीएस में प्राप्त आफलाईन व आनलाईन आवेदनों में गम्भीर प्रकार की गड़बड़ी देखने में आयी है। जहां डॉ. द्वारा जांच पत्र में भरी गयी जानकारी की हूबहू नकल करके अन्य आवेदकों के फार्माे पर लगा कर मिथ्या टिप्पणियां बना दी गयी है। हांलाकि मेडिकल बोर्ड द्वारा समय पर इन गड़बड़ियों को पकड़ लिया गया, जिससे इन आवेदकों के फर्जी विकलांगता प्रमाण पत्र बनने से रह गये । जबकि अस्पताल प्रबंधन द्वारा मामले का परिवाद नयापुरा थाने में भी दिया जा चुका हे।
कोटा के ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में विकलांगता प्रमाणपत्र बनवाने के लिये लोग सीधे ही कोटा आते है। ऐसे आवेदनों की संख्या व लोगों को राहत देने के लिये एमबीएस प्रशासन ने अभी भी आॅफलाईन प्रक्रिया जारी की हुई हे। हांलाकि राज्य सरकार ने ऐसे किसी भी आवेदन के लिये वऊकऊ यूनिक डिस एबिलिटि पहचान पत्र पोर्टल पर आवेदन को अनिवार्य रूप से करने का भी निर्देश जारी किया हुआ है। लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों से आये लोगों द्वारा अभी भी सीधे एमबीएस आने के कारण यहां पर कार्य भार बढ़ता जा रहा है । ऐसे में सीधे कार्यालय में किये गये आवेदनों का जांचने में काफी चूक होने की संभावना रहती है।
घुटने के नीचे एक पैर कटा'' से खुला मामला
यहां आये आवेदनों में एक बात सभी में कॉमन थी की सभी आवेदकों के चिकित्सकीय प्रमाणीकरण में घुटने के नीचे एक पैर कटा वाली टिप्पणी लिखी हुयी थी। ऐसे में किसी भी चिकित्सक द्वारा एक जैसी लैखनी व टिप्पणी की गयी थी। जिससे इन आवेदकों के बारें में शक हुआ।विकलांगता के लिये भरे गये पत्र में भी चिकित्सीय टिप्पणी में एक टांग के कटे वाली टिप्पणी से पैनल को सारी कहानी समझ में आ गयी।वहीं दो अन्य मामलों मे प्राप्त आवेदन में भूनेश सुमन वार्ड नं 5 पिपल्दा व मनोहरी बाई ख्यावदा निवासी द्वारा दिये गये प्रपत्र में भी ऐसी ही टिप्पणी की गयी हे।
सभी ने एक ही ई मित्र संचालक का नाम लिया
बनवारी सुमन मनोहरी बाई सुमन के पति 4 साल पहले मोटर सायकिल से गिरकर एक्सीडेन्ट हो गया था एक पैर ने काम करना बन्द कर दिया कोटा एमबीएस में आॅपरेशन करवाया था,जिसके बाद पैर पतला पड़ गया। पैर से चलने में लाचार है सरकारी पेंशन मिल जायें तो काम आये इसी लिये हमनें आवेदन किया है। हमने पिपल्दा के ई-मित्र से हमने फार्म भरवाया था। मामले में जानकारी जुटाने के दौरान सभी आवेदक एक ही क्षेत्र के निकले वहीं सभी ने आवेदन प्रक्रिया में ई मित्र संचालक का नाम भी लिया। वही ई मित्र संचालक का कहना है कि मैने किसी का कोई आवेदन नहीं किया।
अब आवेदन केवल आॅनलाईन ही मान्य
एम बी एस अस्पताल द्वारा ऐसे मामले सामने आने के बाद हड़कम्प मच गया था। अधीक्षक डॉ धर्मराज मीणा इस संदर्भ में जानकारी देते हुये बताया कि जिसके बाद से ही आॅफलाईन आवेदनों को पूरी तरह बन्द कर दिया गया है। डॉ मीणा ने बताया की हमारी तरफ से उपरोक्त प्रकरण को नयापुरा थाने में भिजवाया गया है ।
चिकित्सकों की डिजिटल मैपिंग
अब वऊकऊ की समस्त कार्यप्रणाली आॅनलाइन होगी। अधिकृत चिकित्सकों की प्रोफाइल पोर्टल पर मैप की जा रही है ताकि आंकलन सीधे आॅनलाइन भरा जा सके।सत्यापन प्रक्रिया आॅनलाइन आवेदकों को अस्पताल द्वारा स्वयं कॉल करके बुलाया जाएगा। जांच और आॅनलाइन एंट्री के बाद ही वऊकऊ कार्ड जारी होगा। निश्चित समय सीमा: इस पूरी प्रक्रिया (जांच से कार्ड जारी होने तक) के लिए एक माह की अवधि निर्धारित की गई है।
आम जन की सुविधा के लिये दोनों प्रकार से काम चलाया हुआ था लेकिन गड़बडी मिलने के बाद अब केवल आॅनलाईन ही काम होंगे। हमने पुलिस को भी जानकारी भिजवा दी है।
-डॉ धर्मराज मीणा, अधीक्षक एमबीएस कोटा
अभी जानकारी में आया हे यदि ऐसा हे तो मामले में जांच की करवायी जायेगी।
- विनोद कुमार, थानाधिकारी नयापुरा कोटा

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