फूलों की खुशबू को ले उड़ा फेस्टिवल सीजन, दिन भर मारते मख्खियां

कभी-कभी तो फेंकने पड़ते हैं, खर्चा तक नहीं निकल पाता

फूलों की खुशबू को ले उड़ा फेस्टिवल सीजन, दिन भर मारते मख्खियां
दिनभर में इन दिनों 400 से 500 रुपए की कमाई भी बड़ी मुश्किल से कर पा रहे हैं।

कोटा। फूलों का कारोबार करने वाले फुटकर विक्रेताओं की इन दिनों हालत बहुत खस्ता है। हालांकि ऐसा नहीं है कि बिक्री नहीं होती है। मगर जो व्यापार त्यौहारी व शादी-ब्याह की सीजन में होता है, उसका तो अभी 10 प्रतिशत भी नहीं हो रहा है। ऐसे में मंडी से ही खरीद कम ही करते हैं और उसमें भी बिक्री नहीं होने पर नहर में बहाने की मजबूरी हो जाती है। क्योंकि फूलों को सुबह से शाम तक ही संभालकर रख सकते हैं, इसके बाद तो यह खराब हो जाते हैं। इन दिनों मुनाफा तो बहुत दूर की बात है। दिनभर में मजदूरी जितने रुपए आ जाए वही अच्छा। कुछ ऐसी स्थिति ही शहर के फूलों का फुटकर व्यापार करने वालों की। जानकारी के अनुसार शहर में गुमानपुरा, स्टेशन क्षेत्र, विज्ञान नगर चौराहा, एरोड्रम पेट्रोल पंप के पास, चौपाटी सहित अनेक स्थानों पर फूल माला व फूलों का व्यापार करने वाले अपनी-अपनी दुकानें लगाकर बैठे हुए हैं। जो दिनभर में इन दिनों 400 से 500 रुपए की कमाई भी बड़ी मुश्किल से कर पा रहे हैं। जबकि सीजन में इनको काम से फुर्सत तक नहीं होती है। एक तो भीषण गर्मी में वैसे ही फूलों को संभाल कर रखना बड़ी टेढ़ी खीर है। उस पर से धंधा नहीं होने पर नुकसान उठाना पड़ रहा है। इन दिनों वैसे भी ना तो शादी-ब्याह का सीजन है और ना ही पर्व-त्यौहार। ऐसे में फूलों की खरीदारी भी कम ही हो रही है। यहां तक कि रोजाना मालाएं भी कम ही बिक रही है। सुबह-सुबह थोड़ा बहुत व्यापार हो जाए तो ठीक है, वरना दोपहर के समय तो मक्खियां ही उड़ाते रहते हैं। हालांकि ज्यादा माल नहीं लाते हैं, मगर जो लाते हैं वो भी इन दिनों बेचना भारी पड़ रहा है।

आसपास के गांवों से आते हैं फूल
कोटा की मंडी में बिकने के लिए आसपास के गांवों से सुबह-सुबह लोग अपनी गाड़ियों में फूलों को भरकर लाते हैं। यहां कोटा मंडी में जालीपुरा, नोताड़ा भोपत सहित कोटा संभाग में करीब 112 हैक्टेयर से ज्यादा में गंगानगरी गुलाब, कलकती गैंदा, रजनीगंधा, गुलदाऊदी, गैलार्डिया व हजारे के फूलों की खेती होती है। पिछले छह सालों में संभाग में फूलों की खेती कई गुना तक बढ़ गई है।

मैं तो बहुत कम गुलाब लाती हूं
इन दिनों फूलों की बिक्री ज्यादा नहीं हो रही है। मंडी से 5-10 किलो ही गुलाब के फूल लाती हूं। इनको बेचने में भी अभी तो बहुत मुश्किल हो रही है। 
- सुशीला, फूल विक्रेता

कभी-कभी तो फेंकने पड़ते हैं
अभी तो बहुत ही मंदी चल रही है। शादी-ब्याह का सीजन में तो अच्छी कमाई हो जाती है। मगर इन दिनों बहुत ही मंदा धंधा चल रहा है। कभी-कभी तो फूल नहर में फेंकने पड़ते हैं।
- मदन,फूल विक्रेता

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