जमीन की सिंचाई वाली नहरें बन रही मौत का जाल
जमीन की सिंचाई वाली नहरें बन रही मौत का जाल
शहर के बीच से निकल रही दोनों नहरों में कई इलाकों में जानलेवा स्थान मौजूद हैं।
कोटा। शहर के दोनों ओर निकली नहरों में आए दिन किसी ना किसी के डूबने की खबर आती रहती है। ऐेसे ही शनिवार को भी कुन्हाड़ी थाना क्षेत्र में एक युवक बाई मुख्य नहर में पानी भरते समय फिसल कर गिर गया था। गनीमत रही की उस समय वहां पुलिस की चेतक गाड़ी गश्त लगा रही थी। जिसमें मौजूद कांस्टेबलों ने युवक को बाहर निकाला और सीपीआर देकर उसकी जान बचाई। लेकिन शहर में यह तो एक घटना है जिसमें युवक को बचा लिया गया इसके अलावा हर महीने किसी ना किसी के नहर में डूबने की खबर आती रहती है। शहर के बीच से निकल रही नहरों में कई स्थान ऐसे हैं, जहां व्यक्ति आसानी से गिर या फिसल सकता है। लेकिन इतने हादसों के बाद भी इन नहरों के किनारे नहाने और अवैध गतिविधियां करने वालों की संख्या में कोई कमी नहीं आ रही है। ना ही प्रशासन कोई कारवाई कर पा रहा है।
दोनों नहरों में कई जानलेवा स्थान
शहर के बीच से निकल रही दोनों नहरों में कई इलाकों में जानलेवा स्थान मौजूद हैं। जहां कोई भी व्यक्ति आसानी से गिरकर बह सकता है। दार्इं मुख्य नहर की बात करें तो इस पर कैथून तक कई स्पॉट ऐसे हैं जहां या तो सुरक्षा दीवार टूटी है या सुरक्षा दीवार नहीं है। इस नहर पर छावनी के पास लोगों ने नहाने के लिए स्थान बनाया हुआ है जहां से किसी ना किसी के बहने की खबर आती रहती है। लेकिन बार बार होने वाली इन घटनाओं के बावजूद ना आमजन इसमें नहाने और अन्य कार्य करने से बाज नहीं आ रहे। इसी तरह बार्इं मुख्य नहर में भी नांता मार्ग पर कई स्थानों पर या तो सुरक्षा दीवार नहीं है या जो है वह टूटी हुई जहां से लोग आसानी से नहर में चले जाते हैं।
नहर किनारे करते मछली शिकार
दोनों नहरों के किनारे लोग मछली का शिकार करते नजर आ रहे हैं। जिस पर सीएडी विभाग व प्रशासन आंख मूंदे बैठा है। लोग नहरों की दीवारों पर बैठकर तेज बहाव में शिकार कर रहे हैं। जरा सी चूक से जान गवानी पड़ सकती है।
अपनी ही जान की चिंता नहीं
इन नहरों में तेज बहाव के दौरान नहाने वाले लोगों को अपनी ही जान की चिंता नहीं है। प्रशासन के साथ साथ आम नागरिकों भी जिम्मेदारी बनती है कि वो ऐसे हालात में नहरों से दूर रहें क्योंकि एक छोटी सी गलती पूरा जीवन समाप्त कर सकती है।
पिछले साल हुई दर्जन भर मौतें फिर भी हालत ज्यों के त्यों
नहरों में डूबने से कोटा में पिछले साल दर्जन मौतें हो चुकी है। जहां सबसे ज्यादा मामले नहरों में नहाते समय के हैं। क्योंकि कई स्थानों पर नहर के खुली होने से बच्चे भी इनमें नहाने आ सकते हैं वहीं नहर का बहाव तेज होने के कारण उसमें फंसकर अपनी जान से हाथ धो बैठते हैं। इतनी घटनाएं होने के बावजूद भी इन नहरों में हालत ज्यों के त्यों हैं। जगह जगह पर दीवारें तोड़ कर नहाने के स्थान बनाए हुए हैं।
इनका कहना है
सीएडी विभाग की ओर से जो डिजाइन के अनुरुप नहाने के स्थल बने हुए हैं उन्हें छोड़कर बाकी सभी जगहों को हटाया जा रहा है। सुरक्षा दीवारों को भी पुन: बनाया जा रहा है। आम नागरिकों भी तेज बहाव के समय नहरों से दूर रहना चाहिए ताकि हादसा ना हो।
- एमपर सामरिया, अधिशाषी अभियंता, सीएडी कोटा

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