नहरें बन रही काल का गाल, हर महीने 3 से 4 लोगों की डूबने से हो रही मौत
एक दिन की पाबंदी, फिर ढाक के तीन पात
नहरों की चार दीवारी इतनी छोटी है कि कोई भी नहाने के लिए आसानी से पहुंच रहा है।
कोटा। केस एक : उद्योग नगर थाना क्षेत्र में डीसीएम स्थित नहर में नहाने गए दो युवक पानी के तेज बहाव में बह गए थे। जिनमें से एक को तो सुरक्षित निकाल लिया। जबकि दूसरे की डूबने से मौत हो गई। युवक की मौत से उसके परिवार पर दु:खों का पहाड़ टूट पड़ा।
केस दो: कुन्हाड़ी थाना क्षेत्र में गत दिनों नहर में नहाते समय एक युवक का पैर फिसल गया था। जिससे वह पानी के तेज बहाव में बह गया। सूचना पर पुलिस व निगम के गोताखोर पहुंचे। लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी है। युवक का शव तीन दिन बाद घटना स्थल से काफी दूर मिला।
केस तीन: किशोरपुरा थाना क्षेत्र में गोविंद धाम के पास चम्बल नदी में हाथ-पैर धोने के लिए नदी किनारे गए युवक को झटका लगने से वह उसमें गिर गया। सूचना पर गोताखोर पहुंचे लेकिन उसका कहीं पता नहीं चला। बाद में तलाश करने पर उसका शव मिला।
ये तो उदाहरण मात्र हैं उन हालातों को बताने के लिए जिनका सामान शहर वासियों को रोजाना करना पड़ रहा है। स्मार्ट सिटी की श्रेणी में आए कोटा जैसे शहर में जो अब पर्यटन नगरी के रूप में अपनी पहचान बनाने वाला है। उस शहर के बीच रिहायशी इलाकों से नहर निकल रही है। वह भी दांयी और बांयी मुख्य नहर। इन नहरों की चार दीवारी या तो इतनी छोटी है कि वहां से कोई भी नहाने के लिए आसानी से पहुंच रहा है या फिर नहरों की सुरक्षा दीवार ही कई जगह से टूटी हुई है। जिससे लोगों को नहाने की जगह आसानी से मिल रही है। ऐसे में हादसे अधिक हो रहे हैं।
धुलंडी पर एक दिन की पाबंदी
पिछले कुछ सालों में धुलंडी के दिन कई लोगों के नदी, तालाब व नहर में नहाने जाने के दौरान पैर फिसलने और पानी का बहाव तेज होने से लोगों के उनमें डूबने की घटनाएं हो चुकी है। कुछ समय पहले तो एक ही दिन में करीब आधा दर्जन लोगों की डूबने से मौत होगई थी। उसके बाद पुलिस व प्रशासन की ओर से धुलंडी के दिन नहर और नदी तालाब में नहाने जाने पर ही पाबंदी लगा दी है। लेकिन हालत यह है कि यह पाबंदी सिर्फ एक ही दिन के लिए हो रही है। उसके बाद फिर से वही ढाक के तीन पात वाली स्थिति बन गई है।
अभी भी नहा रहे नहर पर
धुलंडी के दिन तो नहरों में पानी का बहाव भी कम कर दिया गया था। पुलिस व प्रशासन का पहरा व सख्ती भी दिखी। लेकिन उसके बाद इस पर किसी का कोई ध्यान नहीं है। यही कारण है कि अभी भी शहर में कई जगह पर नहरों में लोग विशेष रूप से युवा और बच्चे नहा रहे हैं। जिससे फिर से कभी भी कोई बड़ा हादसा या लोगों के डूबने से मौत की घटना होने का खतरा बना हुआ है। हालांकि नवज्योति ने होली से पहले ही इस संबंध में चेताया था। उसके बाद भी हालातों में कोई सुधार नहीं हुआ है।
हर साल 35 से 40 की डूबने से हो रही मौत
एक तरफ तो कोटा व हाड़ौती के लिए चम्बल नदी बरदान है। वहीं दूसरी तरफ यह जानलेवा भी साबित हो रही है। चम्बल नदी, नहर व तालाब में हर साल डूबने से करीब 35 से 40 लोगों की मौत हो रही है।नगर निगम के फायर अनुभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार हर महीने करीब 3 या उससे अधिक लोगों की यानि दसवें दिन एक व्यक्ति की डृबने से मौत हो रही है। हालांकि निगम के गोताखोरों की टीम ने कई डूबे हुए लोगों को सुरक्षित भी बाहर निकाला है।
यह है स्थिति
जानकारी के अनुसार वर्ष 2020-21 में कोटा शहर में 33 लोगों की डूबने से मौत हुई जबकि 4 को जीवित व सुरक्षित बाहर निकाला गया। वर्ष 2021-22 में 38 लोगों की डूबने से मौत हुई और 136 को सुरक्षित निकाला गया। वर्ष 2022-23 में 44 लोगों की डूबने से मौत हुई और 222 को सुरक्षित निकाला गया। वर्ष 2023-24 में 30 की डूबने से मौत हुई व 1 को सुरक्षित बाहर निकाला गया। वहीं वर्ष 2024-25 में 34 लोगों की डूबने से मौत हो चुकी है और 9 को सुरक्षित निकाला गया है। उसके बाद भी आए दिन लोगों के डूबने व मौत की घटनाएं हो रही हैं।
इनका कहना है
शहर के बीच व रिहायशी इलाकों से नहर व चम्बल नदी गुजर रही है। नहरों की सुरक्षा दीवार इतनी छोटी है कि वहां से कोई भी नहाने के लिए जा सकता है। नहर में पानी का बहाव अधिक होने पर तैरने वाला जानकार भी कई बार बह जाता है। जिससे उसकी डूबने पर मौत हो जाती है। हालांकि किशोरपुरा से गुमानपुरा वाली नहर की सुरक्षा दीवार 8 फद्दीट करने से अब वहां घटनाएं कम हो रही है। सिचाई विभाग को चाहिए कि नहरों की सुरक्षा दीवार को इतना ऊंचा किया जाए या उन पर फेंसिंग की जाए कि लोग वहां से चढ़कर पानी तक नहीं जा सके। आत्म हत्या करने के अलावा हादसों के कारण भी लोगों की डूबने से मौत हो रही है। शहर में अधिकतर नहरों की सुरक्षा दीवार छोटी है। नगर निगम के पास पर्याप्त गोताखोर व स्कूबा डाइविंग सेट समेत नाव व अन्य संसाधन पर्याप्त हैं। लेकिन अधिकतर लोगों की मौत का कारण सूचना देरी से मिलना होता है। देर से सूचना मिलने पर बहे लोग काफी आगे निकल जाते हैं। नहर में झाड़ झंकार में फंस जाते हैं। जिससे उनकी तलाश में देरी होने पर मौत अधिक होती है। वैसे तुरंत सूचना मिलने पर कई लोगों को जीवित व सुरक्षित भी निकाला गया।
- विष्णु श्रृंगी, गोताखोर नगर निगम कोटा
समय-समय पर नहरों में पानी का जल प्रवाह कम करते रहते हैं। हालांकि कई जगह पर नहरों की दीवार को ऊंचा भी कराया गया है। लेकिन जहां भी सुरक्षा दीवार टूटी हुई है या फेंसिंग की जरूरत होगी उसे भी सही करवाने का प्रयास किया जाएगा।
- संजय कुमार सिंह, अधीक्षण अभियंता सिंचाई वृत्त सीएडी

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