केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल का दावा: ईंधन की कोई कमी नहीं, पश्चिम एशिया संकट पर सरकार की पैनी नजर; एलपीजी सिलेंडरों की कीमतों में वृद्धि और आपूर्ति में कमी की आशंकाओं को किया खारिज
ईंधन संकट पर पीयूष गोयल का भरोसा: भारत में नहीं होगी एलपीजी की कमी
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने आश्वस्त किया कि खाड़ी युद्ध के बावजूद भारत में ईंधन की कोई कमी नहीं होगी। रिफाइनरियों को उत्पादन बढ़ाने और घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही, तमिलनाडु में अन्नाद्रमुक के साथ गठबंधन पर चर्चा अंतिम चरण में है, जिससे द्रमुक को सत्ता से बाहर करने का दावा किया गया।
चेन्नई। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने बुधवार को देशवासियों को आश्वस्त किया कि खाड़ी देशों में अमेरिका-ईरान संघर्ष के कारण कच्चे तेल के उत्पादन पर पड़े असर के बावजूद भारत में ईंधन की कोई कमी नहीं है। तमिलनाडु के तिरूचिरापल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यक्रमों से पहले पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार वैश्विक ऊर्जा व्यवधानों की बारीकी से निगरानी कर रही है। घरेलू और वाणिज्यिक एलपीजी सिलेंडरों की कीमतों में वृद्धि और आपूर्ति में कमी की आशंकाओं को खारिज करते हुए पीयूष गोयल ने कहा कि रिफाइनरियों को एलपीजी उत्पादन बढ़ाने और घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं।
उनके इस बयान से उन होटल और रेस्तरां मालिकों को बड़ी राहत मिलने की आशा है, जिन्हें वाणिज्यिक एलपीजी की कमी के कारण अपना कारोबार बंद होने का डर सता रहा था। पीयूष गोयल ने तमिलनाडु की सत्ताधारी पार्टी द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) पर भ्रष्टाचार और कुशासन का आरोप लगाते हुए तीखा हमला भी किया। अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (अन्नाद्रमुक) के महासचिव एडप्पादी के. पलानीस्वामी के साथ सीट बंटवारे पर औपचारिक बातचीत के बाद श्री गोयल ने विश्वास जताया कि श्री पलानीस्वामी के नेतृत्व वाला राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) आगामी चुनावों में द्रमुक को सत्ता से बाहर कर देगा।
उन्होंने स्पष्ट किया कि गठबंधन के सहयोगियों के बीच सीट बंटवारे को लेकर कोई भ्रम या बाधा नहीं है और चर्चा अंतिम चरण में है। तमिलनाडु में राजग का नेतृत्व पलानीस्वामी कर रहे हैं, जिसमें पीएमके, एएमएमके और तमिल मानिला कांग्रेस जैसे दल शामिल हैं। दूसरी ओर, पूर्व मुख्यमंत्री ओ. पनीरसेल्वम के लिए राजग के दरवाजे बंद होने के बाद उन्होंने राजनीतिक अस्तित्व बचाने के लिए द्रमुक का रुख किया है।

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