राजस्व लक्ष्य में पिछड़ते आरटीओ, नॉन-ओटीटी वसूली में 73 प्रतिशत पर अटका परिवहन विभाग
9860 करोड़ रुपए का लक्ष्य तय किया था
राजस्थान परिवहन विभाग वित्त वर्ष 2025-26 में राजस्व लक्ष्य से पीछे। फरवरी तक 8048 करोड़ के लक्ष्य के मुकाबले 6830 करोड़ रुपए ही प्राप्त। नॉन-ओटीटी राजस्व मात्र 73.46%। प्रदर्शन में अजमेर आरटीओ अव्वल, पाली सबसे पीछे। जयपुर आरटीओ द्वितीय कुल राजस्व में पहले स्थान पर।
जयपुर। राजस्थान परिवहन विभाग वित्त वर्ष 2025-26 में राजस्व लक्ष्य की दौड़ में अपेक्षित गति नहीं पकड़ पा रहा है। विभाग ने पूरे वित्त वर्ष के लिए 9860 करोड़ रुपए का लक्ष्य तय किया था, जबकि फरवरी तक का लक्ष्य 8048 करोड़ रुपए रखा गया था। इसके मुकाबले विभाग अब तक 6830 करोड़ रुपए ही अर्जित कर सका है। यानी फरवरी तक के लक्ष्य का 84.87 प्रतिशत और पूरे वित्त वर्ष के लक्ष्य का करीब 69.27 प्रतिशत ही राजस्व प्राप्त हुआ है। विभाग के राजस्व में दो प्रमुख हिस्से होते हैं-ओटीटी (वन टाइम टैक्स) और नॉन-ओटीटी। ओटीटी राजस्व मुख्य रूप से वाहनों की बिक्री से आता है, जिसमें आरटीओ अधिकारियों-कर्मचारियों का सीधा योगदान नहीं होता। वहीं नॉन-ओटीटी राजस्व में फिटनेस, परमिट, चालान, टैक्स वसूली और प्रवर्तन जैसी गतिविधियों के जरिए आरटीओ कार्यालयों की सीधी भूमिका होती है।
नॉन-ओटीटी राजस्व के मामले में विभाग की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। इस मद में पूरे साल के लिए 4572 करोड़ रुपए का लक्ष्य तय किया गया था। फरवरी तक का लक्ष्य 3230 करोड़ रुपए था, लेकिन अब तक केवल 2373 करोड़ रुपए ही अर्जित हो पाए हैं। यानी फरवरी तक के लक्ष्य के मुकाबले महज 73.46 प्रतिशत नॉन-ओटीटी राजस्व ही प्राप्त हुआ है। यही वजह है कि विभाग के कई बड़े आरटीओ राजस्व लक्ष्य पूर्ति में पीछे चल रहे हैं।
प्रदेश में नॉन-ओटीटी राजस्व प्रदर्शन के आधार पर अजमेर आरटीओ सबसे आगे है। अजमेर ने ओटीटी राजस्व में 93.01 प्रतिशत और नॉन-ओटीटी में 82.72 प्रतिशत राजस्व अर्जित कर पहला स्थान हासिल किया है। सीकर आरटीओ दूसरे स्थान पर है, जहां ओटीटी राजस्व 91.66 प्रतिशत और नॉन-ओटीटी राजस्व 81.53 प्रतिशत रहा। चित्तौड़गढ़ आरटीओ तीसरे स्थान पर है, जहां नॉन-ओटीटी राजस्व 75.52 प्रतिशत दर्ज किया गया है। दूसरी ओर पाली आरटीओ सबसे नीचे है, जिसने नॉन-ओटीटी राजस्व में केवल 67.88 प्रतिशत लक्ष्य ही पूरा किया है।
राजधानी के दोनों आरटीओ की स्थिति भी संतोषजनक नहीं है। जयपुर आरटीओ प्रथम नॉन-ओटीटी राजस्व के मामले में प्रदेश में 8वें स्थान पर है। यहां ओटीटी राजस्व 84.24 प्रतिशत रहा, जबकि नॉन-ओटीटी राजस्व केवल 71.70 प्रतिशत ही अर्जित हो पाया। वहीं जयपुर आरटीओ द्वितीय नॉन-ओटीटी राजस्व में 12वें स्थान पर है, जहां ओटीटी राजस्व 120.47 प्रतिशत तक पहुंच गया, लेकिन नॉन-ओटीटी राजस्व केवल 67.96 प्रतिशत ही रहा।
हालांकि, कुल राजस्व अर्जन के आधार पर जयपुर आरटीओ द्वितीय प्रदेश में सबसे आगे है। फरवरी तक 507 करोड़ रुपए के लक्ष्य के मुकाबले इस कार्यालय ने 474 करोड़ रुपए अर्जित किए। दौसा 243 करोड़ के लक्ष्य के मुकाबले 215 करोड़ के साथ दूसरे स्थान पर रहा। अजमेर 710 करोड़ के लक्ष्य के मुकाबले 629 करोड़ अर्जित कर तीसरे स्थान पर रहा, जबकि सीकर 642 करोड़ के लक्ष्य के मुकाबले 562 करोड़ के साथ चौथे स्थान पर रहा। बीकानेर 599 करोड़ के लक्ष्य के मुकाबले 506 करोड़ अर्जित कर पांचवें स्थान पर रहा।
वहीं जयपुर आरटीओ प्रथम कुल राजस्व अर्जन में सबसे पीछे 13वें स्थान पर है। इस कार्यालय को फरवरी तक 1435 करोड़ रुपए का लक्ष्य दिया गया था, लेकिन अब तक केवल 1148 करोड़ रुपए ही अर्जित हो पाए हैं। विभाग के भीतर अब नॉन-ओटीटी राजस्व बढ़ाने और प्रवर्तन कार्रवाई तेज करने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि वित्त वर्ष के अंत तक लक्ष्य के करीब पहुंचा जा सके।

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