सारे काम छोड़कर अभी भी पानी का करना पड़ता है इंतजार

नए वाटर प्लांट बनने के बाद भी समस्या बरकरार

सारे काम छोड़कर अभी भी पानी का करना पड़ता है इंतजार

लोगों का कहना है कि पानी कि ना तो आपूर्ति समय पर होती है और ना ही जरूरी समय तक होती है।

कोटा। कहने को तो हमारा शहर चंबल नदी के किनारे बसा हुआ है इसके बावजूद कई इलाकों में पानी कि कमी है आज भी वैसी ही बनी हुई है। कोटा में एक ओर जहां नए नए विकास के कार्य किए जा रहे हैं कई समस्याओं का समाधान किया जा रहा पर प्रेम नगर व कंसुआ इलाके के बाशिंदे आज भी अपनी पानी कि मूलभुत समस्या के समाधान का इंतजार कर रहे हैं। इस इलाके में सड़क, रोड लाइट, बिजली और जनता क्लिनिक भी पहुंच गई है लेकिन जो सबसे जरूरी चीज है उसकी ही आपूर्ति ठीक तरह से नहीं होती है। लोग यहां सालों से हैण्डपम्पों का उपयोग करते आ रहे हैं और आज भी कर ही रहे हैं बस पहले पानी जमीन से खींचते थे और अब पाइप लाइन से। सरकार द्वारा हाल ही में 50 व 70 एमएलडी की क्षमता वाले नए वाटर प्लांटों का निर्माण करवाया है लेकिन इस क्षेत्र में पानी कि समस्या अभी भी बनी हुई है। इस क्षेत्र में पानी के नियमित प्रेशर न होने कि हमेशा से समस्या रही है लोगों को सारे काम छोड़कर पहले पानी भरने कि चिंता रहती है क्योंकि अगर दुसरे काम में समय लगा दिया तो पानी छूट जाता है। लोगों का कहना है कि पानी कि ना तो आपूर्ति समय पर होती है और ना ही जरूरी समय तक होती है। 

सिर्फ एक समय ही पानी वो भी एक घण्टा
प्रेम नगर इलाके में लोग सुबह चार बजे ही उठकर पानी कि सप्लाई का इंतजार करने लग जाते हैं और अगर पानी आ भी जाए तो उसे या छोटे हैण्डपम्पों या बुस्टर मोटर लगाकर पानी भरना पड़ता है क्योंकि ना तो उसकी सप्लाई इतनी देर होती है और ना इतने प्रेशर से कि लोग आसानी से पानी भर सके। कुछ तरफ पानी सुबह आता है और कुछ तरफ शाम को और ये समय भी बदलता रहता है जिस कारण असमंजस कि स्थिति बनी हुई रहती है। सुबह या शाम होते ही लोग बर्तन बाल्टीयां लेकर सड़कों पर खुदे हुए नलों के गढ्ढों में सारे काम छोड़कर पानी भरने के लिए डेरा लगाकर बैठ जाते हैं। 

दो दो बिलों का खर्चा 
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस पानी कि समस्या के कारण उन्हें दो दो बिल भरने पड़ रहे हैं क्योंकि पानी का प्रेशर कम होने से बुस्टरों का उपयोग करना पड़ता है जो बिजली के बिल में अतिरिक्त भार आता है और उसके बावजूद भी समस्या बनी रहती है। इन समस्याओं को लेकर अधिकारीयों से लेकर नेताओं मंत्री तक से मिल चुके हैं और विराध कर चुके हैं लेकिन समस्या का कोई समाधान नहीं हो रहा है। इस इलाके कि डेढ़ लाख कि जनसंख्या है और पानी कि समस्या यहां कि सबसे बड़ी समस्या है।

पानी स्टोर करने के लिए ला रखी हैं अतिरिक्त टंकियां
पानी कम समय के लिए ही और कम प्रेशर से आने के कारण लोगों ने पानी को अतिरिक्त रूप में भरने के लिए बड़ी बड़ी टंकियां ला रखी हैं। लोगों का कहना है कि क्या करें हम इस तरह से पानी स्टोर करने के लिए मजबूर हैं अगर पानी कि सप्लाई ठीक से ज्यादा समय के लिए और पे्रशर से हो तो हमें इसकी जरूरत नहीं पड़े। कई कई जगह तो नीचे के साथ साथ लोगों ने छतों पर भी दो या तीन टंकियां रखी हुई हैं ताकि ज्यादा से ज्यादा पानी स्टोर कर सकें।

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हमें पानी भरने के लिए सुबह जल्दी ही उठना पड़ता है सारे काम छोड़ कर पहले पानी के लिए लगना पड़ता है अगर नहीं लगे तो पानी भरना छुट जाए। अभी परेशानी कम होती है लेकिन गर्मीयों में तो ट्यूबवेल मोटरों व हैण्डपम्पों से पानी भरना पड़ता है। 
- विनोद बुर्ट, प्रेम नगर तृतीय 

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पानी हर काम के लिए जरूरी होता है नहाने धोने से लेकर खना पकाने तक सब में और सुबह सुबह सभी के काम का समय होता है और पानी का भी लेकिन खाना छोड़कर पहले पानी का काम करना पड़ता है क्योंकि फिर नल अगले दिन ही आएगा और एक घण्टे ही सप्लाई होने के कारण उसी समय में कपड़े भी धोना है पीने का पानी भी भरना होता है। 
- शिवानी राजावत, कंसुआ

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इस इलाके कि ये सबसे बड़ी समस्या है जिसका अभी तक कोई समाधान नहीं हुआ है, सालों से हम पानी के लिए परेशान होते आ रहे हैं ना पानी कि आपूर्ति पूरी होती है ना ही प्रेशर ठीक से आता है अधिकारीयों नेताओं सबसे कह चुके लेकिन कोई ध्यान नहीं देता।
- मनभर बाई, प्रेमनगर द्वितीय 

पानी तो एक समय आता ही है पर जो आता है उसमें भी प्रेशर नहीं आता है हमें नीचे से उपर पानी पहुंचाना पड़ता है प्रेशर ठीक से आए तो पानी उपर चढ़ पाए। प्रेशर कि समस्या कॉलोनी बनने के समय से ही बनी हुई है जिसका अभी तक कोई समाधान नहीं निकाला गया है।
- प्रमोद पारेता, कंसुआ अर्फोडेबल योजना 

हमारे पास ऐसी कोई शिकायत नहीं है, अगर कहीं है तो उसे ठीक करवाएगें और पानी कि आपूर्ति पूर्ण रूप से सुचारू है। प्रेशर भी ठीक दिया जा रहा है।
- भरत भूषण मिगलानी, अतिरिक्त मुख्य अभियंता, जलदाय विभाग 

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