मुकुंदरा-रामगढ़ में बाघिनों की लाइफ स्टडी, तीसरे चरण से पहले हर मूवमेंट पर पैनी नजर
मानसून के बाद इंटरेस्ट स्टेट टाइगर रीलोकेशन के तीसरे फेस का आगाज
एमपी से लाई गई बाघिनों के व्यवहार, शिकार व टेरिटरी बनाने की प्रक्रिया पर हो रही रिसर्च।
कोटा। हाड़ौती के मुकुंदरा हिल्स और रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व में लाई गई मध्यप्रदेश की बाघिनों पर इन दिनों विशेष स्टडी की जा रही है। इंटर स्टेट टाइगर रीलोकेशन प्रोजेक्ट के तीसरे चरण से पहले वन विभाग बाघिनों के व्यवहार, मूवमेंट और शिकार जैसी गतिविधियों का गहराई से विश्लेषण कर रहा है। इसी आधार पर आगे नई बाघिनों को लाने का फैसला लिया जाएगा।
वन विभाग के अनुसार, इस अध्ययन में बाघिनों के शिकार करने की क्षमता, नई टेरिटरी बनाने की प्रक्रिया, बाघों के साथ इंटरेक्शन और एनटीसीए के प्रोटोकॉल का पालन जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं को शामिल किया गया है।
जंगल को एक्सप्लोर कर रही टाइग्रेस
सीसीएफ ने कहा, दोनों बाघिनें फिलहाल नए वातावरण में खुद को ढालते हुए जंगल को एक्सप्लोर कर रही हैं। वे अपनी टेरिटरी स्थापित करने की कोशिश में हैं। रेडियो कॉलर के जरिए उनकी 24 घंटे मॉनिटरिंग की जा रही है, जिससे उनकी लोकेशन और गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है। बाघिनों का व्यवहार सामान्य है और वह नियमित रूप से शिकार भी कर रही हैं।
एमपी और हाड़ौती के जंगल में बड़ा अंतर
उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश के जंगल घने और अधिक नमीयुक्त होते हैं, जबकि हाड़ौती के जंगल अपेक्षाकृत खुले पठारी और कम घनत्व वाले हैं। ऐसे में यह अध्ययन महत्वपूर्ण है कि बाघिनें इस नए वातावरण में खुद को कैसे ढालती हैं और स्थानीय नर बाघों के साथ उनका व्यवहार कैसा रहता है।
जंगल में स्वच्छंद वितरण कर रही बाघिनें
बांधवगढ़ से 27 फरवरी को बाघिन एमटी-10 को सड़क मार्ग से कोटा मुकुंदरा टाइगर रिजर्व में शिफ्ट किया गया था। जिसे 28 फरवरी को झामरा वैली के एक हेक्टेयर सॉफ्ट एंक्लोजर में छोड़ा था। इसके बाद 7 मार्च को हार्ड रिलीज के लिए एनक्लोजर का गेट खोल दिया था लेकिन उसने 9 मार्च को तड़के खुले जंगल में कदम रखा। इसके बाद से वह जंगल में स्वछंद विचरण कर रही है।
टेरीटरी बना रही आरवीटीआर-9
इधर, 22 दिसंबर 2025 को पेंच टाइगर रिजर्व से बाघिन पीएन 224 को रामगढ़ लाया गया था। जिसे 23 दिसंबर को बजालिया क्षेत्र में छोड़ा था। इसको हवाई मार्ग से जयपुर तक लाया गया था फिर वहां से सड़क मार्ग से बूंदी पहुंची थी। इसे आरवीटी-9 नाम दिया गया था। बाद में 27 दिसंबर को एनक्लोजर का गेट खोल 28 दिसंबर की सुबह हार्ड रिलीज किया गया। खुले जंगल में आने के बाद वह लंबी दूरी तक विचरण कर रही है।
नई बाघिन लाने से पहले स्टडी अहम
वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि इंटर स्टेट टाइगर रीलोकेशन प्रोजेक्ट के अगले चरण से पहले बाघिनों की यह स्टडी बेहद अहम मानी जा रही है। इससे यह तय होगा कि हाड़ौती के जंगल नए बाघों के लिए कितने अनुकूल हैं और भविष्य में टाइगर आबादी बढ़ाने की योजना किस तरह आगे बढ़ेगी।
महाराष्ट्र से आएंगी अगली बाघिनें
संभागीय वन संरक्षक एवं क्षेत्र निदेशक सुगनाराम जाट ने बताया कि प्रोजेक्ट के तहत कुल 5 बाघिनों को लाने की अनुमति है। अब तक मध्यप्रदेश से दो बाघिन लाई जा चुकी हैं। तीसरे चरण में महाराष्ट्र के टाइगर रिजर्व से दो और बाघिन लाई जाएंगी। इसके बाद ही अंतिम चरण में पांचवीं बाघिन लाई जाएगी। तीसरा चरण मानसून के बाद शुरू होने की संभावना है।

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