धरती आभा योजना के बावजूद 100 घरों में पानी का संकट, जानें पूरा मामला
पीने के पानी का एकमात्र सहारा निजी नलकूप
दावे फेल, योजनाएं कागजों तक सीमित, निजी नलकूप पर लंबी कतारें
नमाना रोड। रायथल तहसील के नंदपुरा गांव में शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के सरकारी दावे धरातल पर फेल होते नजर आ रहे हैं। ह्यधरती आभाह्ण योजना में शामिल होने के बावजूद करीब 100 घरों की आबादी आज भी पानी के लिए संघर्ष कर रही है। स्थिति यह है कि पूरे गांव की निर्भरता एक निजी नलकूप पर है,जहां सुबह-शाम लंबी कतारें लग रही हैं।
एक कुआं, 25 मोटरें और गिरता जलस्तर
गांव में पेयजल का मुख्य स्रोत एक पुराना कुआं है, जिसमें 25 से अधिक मोटरें लगी हुई हैं। अत्यधिक दोहन के कारण जलस्तर लगातार गिर रहा है और कुआं भी जवाब देने की स्थिति में पहुंच गया है। ऐसे में एकमात्र निजी नलकूप ही पीने योग्य पानी का सहारा बना हुआ है।
यहां पानी भरने के लिए महिलाओं को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है, जिससे दैनिक कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
10 वर्षों से बंद पड़ा आरओ प्लांट
पीएचईडी विभाग की लापरवाही का सबसे बड़ा उदाहरण गांव में स्थापित आरओ प्लांट है, जो पिछले 10 वर्षों से बंद पड़ा है। ग्रामीणों के अनुसार कई बार शिकायत के बावजूद इसे चालू नहीं किया गया। पूर्व में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाए जाने के बावजूद स्थिति जस की तस बनी हुई है।
अधिकारियों की अनदेखी पर ग्रामीणों में रोष
ग्रामीण बनवारी लाल, दीनदयाल, मुकेश कुमार, सत्यनारायण, शिवराज और कैलाश ने बताया कि योजनाएं केवल कागजों में सीमित हैं। पेयजल जैसी बुनियादी सुविधा के अभाव में ग्रामीणों में आक्रोश है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन किया जाएगा।
फ्लोराइड युक्त पानी से युवाओं के रिश्तों पर असर
फ्लोराइड युक्त पानी पीने से ग्रामीणों के दांत पीले और कमजोर हो रहे हैं इसका असर हड्डियों और जोड़ों पर पड़ रहा हैं जिससे युवाओं के रिश्ते करने में भी प्रभाव पड़ रहा हैं पीले दांतों को देखकर रिश्ते करने से कतराते हैं।
- बनवारी लाल मीणा, ग्रामीण।
दफ्तर के लगाए चक्ककर, मिला केवल आवश्वासन, अब प्रदर्शन
कई बार विभाग के चक्कर लगाए, लेकिन अधिकारी केवल आश्वासन देते हैं। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस प्लांट को चालू कर शुद्ध पेयजल की आपूर्ति शुरू नहीं की गई, तो वे विभाग के खिलाफ उग्र प्रदर्शन करेंगे #
- दिनदयाल मीणा, ग्रामीण।
यह कहा अधिकारी ने
हऌड के अनुसार पीने के पानी मे फ्लोराइड की मात्रा 1.0-1.5 टॅ प्रतिलिटर होनी चाहिए। इससे ज्यादा मात्रा वाला पानी पिने से बच्चों के दांतो मे सफ़ेद और भूरे रंग के धब्बे बन जाते है। दाँत कमजोर और ख़राब हो जाते है जिसे डेंटल फ्लूरोसीस कहते है। अगर फ्लोराइड युक्त पानी पिने से इसका असर हड्डियों और जोड़ो मे आ जाये तो उसे स्केलटल फ्लोरोसीस कहते है। इससे बचने के लिए आरओ का पानी पिए या डिफेंलोरीडेशन फ़िल्टर का उपयोग करें और कुएं और हैंडपम्प या बोर वेल के पानी की टेस्टिंग समय समय पर करवाएं। समय समय पर दंत रोग विशेषज्ञ से अपने दांतो का चेकअप करवाए।
- डॉ निर्मला मीणा, दंत रोग विशेषज्ञ, जिला अस्पताल बूंदी
पूर्व एजेंसी का टेंडर 31 जनवरी 2026 में समाप्त हो गया था। आरओ पुनः चालू कराने हेतु स्वीकृति जयपुर भेजी गई है। स्वीकृति मिलते ही प्लांट चालू करवाया जाएगा, धरती आभा में ग्राम पंचायत ने कोई प्रस्ताव लेकर नहीं भेजा हैं इसकी जानकारी भी नहीं है और वैकल्पिक व्यवस्था के लिए टीम भेज पानी के सैंपल लेकर पानी की व्यवस्था करवाते हैं ।
- सुनील शर्मा, अधीक्षण अभियंता, जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग, बूंदी

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