मेन्यू में कटौती: सिलेंडरों की कमी , गर्म चाट पर कैंची

समय पर खाना तैयार करना भी बन चुनौती

 मेन्यू में कटौती:  सिलेंडरों की कमी , गर्म चाट पर कैंची

रामनवमी के सावों पर गैस संकट की मार, शादियों में बदलना पड़ रहा जायका ।

कोटा । रामनवमी के सावे के बीच इस बार शादियों का रंग-रूप और जायका दोनों ही बदला-बदला नजर आएगा। वजह है एलपीजी गैस सिलेंडर की किल्लत। शहर में कॉमर्शियल सिलेंडर की सीमित आपूर्ति के चलते कैटरर्स, होटल व्यवसायी और शादी आयोजकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। हालात यह हैं कि शादी समारोहों में अब पहले जैसे भव्य और विविध व्यंजन नहीं परोसे जाएंगे। बल्कि मेन्यू में बड़ी कटौती करनी पड़ रही है। रामनवमी पर अबूझ सावा होने से काफी संख्या में शादियों के आयोजन होते हैं। इस बार गैस संकट के कारण आयोजनों को परेशानी हो रही है।

घटाने पड़ रहे व्यंजन
पहले जहां शादी समारोहों में 5-6 सब्जियां, कई तरह की मिठाइयां, चाट, स्नैक्स और तली-भुनी चीजें आम बात थीं, वहीं अब आयोजक खर्च और गैस संकट को देखते हुए केवल 2-3 सब्जियों तक ही सीमित हो गए हैं। गर्म चाट, कचौरी, समोसा, पकोड़ी जैसे आइटम, जिनमें ज्यादा गैस खपत होती है, उन्हें भी मेन्यू से हटाया जा रहा है। कैटरिंग व्यवसाय से जुड़े लोगों का कहना है कि सावे के इस पीक सीजन में सिलेंडर समय पर नहीं मिल रहे। एक-एक सिलेंडर के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। कई बार ब्लैक में ऊंचे दामों पर सिलेंडर खरीदने की नौबत आ रही है। इसके चलते न केवल लागत बढ़ रही है, बल्कि समय पर खाना तैयार करना भी चुनौती बन गया है।

लकड़ी-कोयले का सहारा
सिलेंडर की कमी के चलते अब वैकल्पिक ईंधन का उपयोग तेजी से बढ़ा है। कई कैटरर्स और हलवाई लकड़ी, कोयला और यहां तक कि डीजल भट्टियों का इस्तेमाल कर रहे हैं। लेकिन इससे भी खर्च कम नहीं हो रहा, क्योंकि मांग बढ़ने से लकड़ी और कोयले के दाम भी तेजी से बढ़ गए हैं। महंगाई पहले से ही शादी आयोजकों के लिए चुनौती बनी हुई थी, ऐसे में गैस संकट ने स्थिति और बिगाड़ दी है। टेंट, लाइट, सजावट और कैटरिंग के खर्च पहले ही बढ़े हुए हैं। अब ईंधन महंगा होने से कुल बजट में 15-25% तक का अतिरिक्त बोझ आ रहा है। मध्यमवर्गीय परिवार सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं, जिन्हें मजबूरी में मेहमानों की संख्या और व्यंजनों में कटौती करनी पड़ रही है।

कैटरर्स ने घटाए आॅर्डर
सिलेंडर की कमी के चलते कैटरर्स एक दिन में सीमित आॅर्डर ही ले पा रहे हैं। कई आयोजकों को आखिरी समय पर कैटरर बदलना पड़ा है या एडजस्टमेंट करना पड़ रहा है। इससे शादियों की प्लानिंग प्रभावित हो रही है। गैस नहीं मिलने पर कैटरर्स को लकड़ी, कोयला और डीजल जैसे विकल्प अपनाने पड़ रहे हैं, लेकिन इनकी कीमत भी बढ़ चुकी है, जिससे कैटरिंग का खर्च 15 से 30 प्रतिशत तक बढ़ गया है। कुछ मामलों में सिलेंडर ब्लैक में खरीदने की भी नौबत आ रही है। इधर वैकल्पिक ईंधन पर खाना बनाने से स्वाद और गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। धुएं और साफ-सफाई की समस्या के कारण बड़े आयोजनों में भोजन की गुणवत्ता बनाए रखना चुनौती बन गया है।

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हर साल सावे में काम बढ़ता है, लेकिन इस बार गैस संकट ने पूरा सिस्टम बिगाड़ दिया है। मेन्यू छोटा करना मजबूरी हो गया है।
-विकास गर्ग, कैटरर

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शादी में मेहमानों के लिए कई वैरायटी रखते हैं, लेकिन अब गैस सिलेंडर के संकट के चलते मेन्यू में कटौती करनी पड़ रही है।
-मुकेश बैरागी, शादी आयोजक

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