घरों व दुकानों में घुसकर चुराता था खाना, बस्तियों को बना लिया था फूड कोर्ट
बाजोली से कोटा पहुंचा भालू अब वाईल्ड़ लाईफ रेस्क्यू सेन्टर में मेहमान
रणथंभौर का भालू अब कोटा के पिंजरे में: बस्तियों में घुसने की आदत के चलते किया रेस्क्यू।
कोटा। रणथंभौर टाइगर रिजर्व के आस-पास के गांवों में पिछले कुछ समय से दहशत का पर्याय बना एक सात वर्षीय नर भालू अब कोटा वन्यजीव मंडल की निगरानी में है। इंसानी बस्तियों में घुसकर घरों से भोजन और खाने-पीने का सामान चुराने की अजीब आदत के चलते, किसी संभावित जनहानि को रोकने के लिए वन विभाग ने इसे रेस्क्यू कर कोटा के पुराने चिड़ियाघर (नयापुरा) में शिफ्ट कर दिया है।
सुबह पिंजरे में छोड़ा
भालू कोटा पहुचते ही कोटा वन्य जीव मण्डल कार्यालय में बने रेस्क्यू सेंटर का स्टाफ काम पर लग गया। नर भालू रात भर से आक्रामक बना हुुआ था ऐसे में शीघ्र ही इसे पिंजरे में शिफ्ट करना जरूरी था। असिस्टेन्ट फॉरेस्टर वाईल्ड़ लाईफ प्रेम कंवर ने बताया कि सुबह साढ़े 10 बजे के करीब भालू को पिंजरे मे छोड़ा गया था। अभी भालू शान्त है। आगे से प्राप्त निदेर्शों के अनुुसार पिंजरे की सुरक्षा के लिये कर्मी तैनात कर दिये है। खाने की व्यवस्था के लिये जरूरी सामान जुटा लिये गये है।
क्यों पड़ी रेस्क्यू की जरूरत?
यह भालू पूरी तरह से वयस्क है और स्वभाव से शांत बताया जाता है, लेकिन पिछले कुछ समय से इसका झुकाव जंगल की अपेक्षा गांवों की ओर अधिक देखा जा रहा था। यह अक्सर घरों में घुसकर खाने की वस्तुएं उठा ले जाता था। हाल ही में रणथंभौर क्षेत्र में एक टाईगर द्वारा ग्रामीण पर हमले और उसके बाद ग्रामीणों द्वारा टाईगर को मार देने की हिंसक घटना को देखते हुए, प्रशासन ने इस भालू की सुरक्षा और मानव-वन्यजीव संघर्ष को टालने के लिए इसे स्थानांतरित करने का कड़ा फैसला लिया।
बाजोली रेस्क्यू आॅपरेशन और कोटा में हलचल
कोटा वन मंडल के उपवन संरक्षक अनुराग भटनागर ने बताया कि गुरुवार रात रणथंभौर के बाहरी गांवों में भालू की मौजूदगी की सूचना मिलते ही विशेष टीम ने मोर्चा संभाला। बाजोली गांव मे भालू को ट्रेंकुलाइज (बेहोश) कर पिंजरे में लिया गया और शुक्रवार सुबह 10 बजे इसे कोटा लाया गया। पिंजरे में कैद होने के बाद भालू काफी असहज दिखा। उसने रात भर पिंजरे में उछल-कूद की और पिंजरे में लगी लकड़ी को भी नुकसान पहुँचाया। फिलहाल उसे शांत करने और नए माहौल में ढालने के प्रयास किए जा रहे हैं।
नयापुरा चिड़ियाघर में विशेष इंतजाम
वन विभाग पिछले 10 दिनों से इस 'मेहमान' के स्वागत की तैयारी कर रहा था।
इसके लिए निम्नलिखित व्यवस्थाएं की गई हैं:पुराने चिड़ियाघर में खाली पड़े टाइगर के पिंजरे की मरम्मत कर उसे रेलिंग से मजबूत किया गया है। आने वाली गर्मी को देखते हुए पिंजरे के भीतर पुराने वॉटर पॉन्ड (कुंड) को साफ कर वॉटर पंप चालू कर दिया गया है। भालू की हरकतों और सेहत पर नजर रखने के लिए विशेष कार्मिकों को तैनात किया गया है जो इसकी पूरी हरकतों को रिकार्ड में भी दर्ज करेंगे ।
भालू पूरी तरह स्वस्थ-खाने का मेनू कार्ड तैयार
कोटा पहुचने पर भालू का वरिष्ठ वन्य जीव चिकित्सक द्वारा परिक्षण किया गया। जिसके बाद उन्होने सुबह के समय पपीता ककड़ी, तथा शाम के समय खीर और दलिया देने की सलाह दी है। हालांकि उन्होने बताया कि भालू को मुख्य रूप से दीमक, चींटियां, मकड़ी और मधुमक्खी का छत्ता (शहद) पसंद है। इसके अलावा, विभाग उसे तेंदू फल, ककड़ी, तरबूज और गाजर जैसे मौसमी फल भी उपलब्ध करा रहा है, जिन्हें वह बड़े चाव से खाता है। अभेड़ा बायोलोजिकल पार्क के प्रभारी बुधाराम जाट ने बताया कि भालू यदि आपको नजर आ जाये तो तुरन्त अपना रास्ता बदल लें। भालुु को दिन के समय कम दिखाई देता हे ऐसे में अधिक दुरी बनाकर आप सुरक्षित रह सकते है ।ध्याान रखे प्रकृति ने इसे पेड़ो से लेकर जमींन के नीचे स्थित जीवों ओर जड़मूल को खाने के लिये ही बाल ओर नाखुन दिये हे ऐसे में हमे तुरन्त उस जगह से निकल जाना चाहिये।
हमें उच्चाधिकारियों से निर्देश मिले थे कि भालू को यहाँ सुरक्षित रखा जाए। हमने टाइगर केज को पूरी तरह से री-फर्बिश किया है ताकि भालू को पर्याप्त जगह और पानी मिल सके। हमारी प्राथमिकता भालू और स्थानीय निवासियों, दोनों की सुरक्षा है।
- अनुराग भटनागर, उपवन संरक्षक, कोटा वन मंडल
भालू पूरी तरह स्वस्थ है इसकी उम्र 7 वर्ष हे, केवल इंसानी बस्तियों में जाकर खाना तलाश करता था यह केवल इसकी आदत में था।
-डॉ. अखिलेश पाण्डे, वरिष्ठ वन्य जीव चिकित्सक

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