दक्षिण कोरियाई विदेश मंत्री का बड़ा बयान, हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की अपील की, ईरान हमलों की निंदा
हॉर्मुज़ संकट पर दक्षिण कोरिया का बड़ा फैसला
दक्षिण कोरिया ने हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय गठबंधन का साथ देने का निर्णय लिया है। ईंधन की बढ़ती कीमतों और ऊर्जा आपूर्ति पर खतरे को देखते हुए सियोल ने ईरान के हमलों की निंदा की। ट्रंप के दबाव के बीच, दक्षिण कोरिया अब परमाणु ऊर्जा और वैकल्पिक मार्गों पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।
सियोल। दक्षिण कोरिया ने शनिवार को हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में सुरक्षित और निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रयासों में शामिल होने की इच्छा जताई है। यह जानकारी दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्रालय ने दी। सियोल ने यूनाइटेड किंगडम और जापान सहित सात देशों के साथ मिलकर एक संयुक्त बयान जारी किया, जिसमें खाड़ी क्षेत्र में ईरान के हमलों की निंदा की गई है। इन हमलों के कारण हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही बाधित हुई है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि दक्षिण कोरिया अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ मिलकर इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग में तेल आपूर्ति को सामान्य करने के प्रयास करेगा।
मंत्रालय के अनुसार, इस जलडमरूमध्य में बाधा का सीधा असर दक्षिण कोरिया की ऊर्जा आपूर्ति और अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। इसके चलते सरकार ने ईंधन की कीमतों को नियंत्रित करने के साथ-साथ कोयला और परमाणु ऊर्जा की ओर रुख किया है। मंत्रालय ने अपने बयान में कहा, "संयुक्त बयान में भागीदारी यह दर्शाती है कि हम हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में सुरक्षित और स्वतंत्र आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रयासों में योगदान देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।"
यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस, जर्मनी, इटली, नीदरलैंड्स और जापान ने संयुक्त बयान जारी कर खाड़ी में वाणिज्यिक जहाजों पर ईरान के हमलों और हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य के प्रभावी रूप से बंद होने की निंदा की है।इन देशों ने यह भी कहा कि वे "सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए उचित प्रयासों" में योगदान देने के लिए तैयार हैं। बहरीन और कनाडा ने भी इस समूह में शामिल होने की इच्छा जताई है। इस बीच, डोनाल्ड ट्रंप ने दक्षिण कोरिया सहित कई देशों से जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के प्रयासों में भाग लेने का आग्रह किया है। हालांकि फ्रांस जैसे कुछ देशों ने संकेत दिया है कि वे तनाव कम होने के बाद ही हस्तक्षेप करेंगे।
दक्षिण कोरिया ने फिलहाल इस क्षेत्र में अपने जहाज भेजने को लेकर कोई ठोस प्रतिबद्धता नहीं जताई है। वहीं श्री ट्रंप ने सहयोग न करने पर नाटो सहयोगियों की आलोचना करते हुए उन्हें "कायर" तक कह दिया।

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