मां आईसीयू में जिंदगी के लिए लड़ रही,बाहर परिजनों की गोद में बिलख रहे नवजात
सिजेरियन डिलीवरी के बाद बिगड़ी तबियत
बहू, बेटी और पत्नी को गंभीर हालात में देख परिजनों की आंखो से छलके आंसू।
कोटा। एक तरफ अस्पताल में नई जिंदगी देने वाली मां खुद जिंदगी और मौत से जूझती रही तो दूसरी तरफ उसी मां की कोख से जन्मे नवजात आईसीयू के बाहर रिश्तेदारों की गोद में बिलखते रहे। कोई मामा बच्चे को सीने से लगाकर चुप करा रहा था, कोई दादी आंखों में आंसू लिए भगवान से बहू को बचाने की मिन्नतें कर रही थीं। मेडिकल कॉलेज अस्पताल में सुपर स्पेशलिटी ब्लॉक के चौथे फ्लोर पर बुधवार सुबह जो दृश्य था, उसे देख हर किसी का दिल पसीज गया। हालात यह थे, नेफ्रोलॉजी आईसीयू के बाहर बैठे परिजन गोद में मासूम नवजात लिए हुए थे। कोई बच्चे को थपकियां दे रहा था तो कोई दूध पिला रहा था, लेकिन हर चेहरा आईसीयू के दरवाजे पर इसी उम्मीद से टिका था, शायद अंदर से कोई अच्छी खबर मिल जाए। नवज्योति ने बेबस परिजनों से घटना को लेकर बात की तो उन्होंने अपनी पीड़ा बयां की....पेश है लाइव रिपोर्ट
जांच के लिए हाथ जोड़ता रहा फिर भी मना कर दिया
रागिनी के पति लोकेश कहते हैं, हम बार-बार डॉक्टरों को बताते रहे कि तबीयत बिगड़ रही है, ब्लड प्रेशर गिर रहा है, लेकिन कोई जवाब नहीं दे रहा था। रात 2 बजे कहा गया कि जांच करानी पड़ेगी। हम सैंपल लेकर गए तो जांच केंद्र ने मना करते हुए सुबह होने की बात कही। मैंने हाथ जोड़ता रहा, लेकिन सुनने वाला कोई नहीं था। हम इधर-उधर भटकते रहे और पत्नी की हालत बिगड़ती रही।
बच्चे का चेहरा तक नहीं देख पाई रागिनी
इटावा निवासी 29 वर्षीय रागिनी ने गत सोमवार को बेटे को जन्म दिया। परिवार खुशियों की तैयारी कर ही रहा था कि कुछ घंटों में सब कुछ बदल गया। महिला की हालत अचानक बिगड़ने लगी। अब वह नेफ्रो आईसीयू में भर्ती है और उसका नवजात बाहर भाई विकास की गोद में रो रहा था।
जिंदगी और मौत से जूझ रही बहन
रागिनी का भाई विकास की आंखें बार-बार आईसीयू के दरवाजे पर टिक जाती हैं। वह कहता है, मेरी बहन ने जन्म के बाद से अपने बच्चे का चेहरा तक नहीं देख पाई। हम बच्चे को संभाल रहे हैं और अंदर बहन जिंदगी के लिए लड़ रही है। डॉक्टर सिर्फ इतना कह रहे हैं कि किडनी में दिक्कत है, लेकिन एक साथ इतनी महिलाओं को यही दिक्कत कैसे हो सकती है।
रिश्तेदारों की गोद में बिलखते रहे नवजात
अस्पताल के एसएसबी ब्लॉक में पहुंचने पर भावुक कर देने वाला नजारा सामने आया। जहां मासूम नवजात अपने रिश्तेदारों की गोद में बिलख रहे थे। एसएसबी वार्ड के चौथे फ्लोर पर नेफ्रो आईसीयू के बाहर तीमारदार (परिजन) बैठे हुए थे, जिनके हाथों में मासूम नवजात थे। इन बच्चों की मां अंदर आईसीयू में गंभीर हालत में भर्ती हैं। रिश्तेदार इन नवजात बच्चों को चुप कराने की कोशिश करते नजर आए, कोई गोद में लेकर इधर-उधर घूम रहा था, तो किसी की आंखों में अस्पताल प्रशासन के खिलाफ गुस्सा झलक रहा था।
कोई नहीं बता रहा, क्या हो रहा
आईसीयू में भर्ती काकरिया निवासी चंद्रकला (30) के पति राकेश ने बताया कि रविवार देर रात करीब एक बजे वह अस्पताल में चंद्रकला को लेकर आए थे। सोमवार तड़के करीब 3.30 बजे आॅपरेशन से बच्ची हुई थी। आॅपरेशन रूम से बाहर निकालने के बाद वार्ड में लेकर आए। तीन-चार घंटे बाद उसकी तबीयत खराब होने लग गई। उसके यूरिन आना बंद हो गया। फिर डॉक्टरों ने मंगलवार को जांचें करवाई तो किडनी में इंफेक्शन का पता चला। मंगलवार रात 10 बजे हमसे कहा कि एसएसबी वार्ड में शिफ्ट करेंगे। हम मरीज को यहां तक पैदल लेकर आए, इसके बाद अभी तक कोई जवाब देने वाला नहीं कि क्या हो रहा है, कब तक ठीक होंगे। कोई कुछ नहीं बता रहा। अभी भी यूरिन नहीं बन रहा है।
12 आॅपरेशन हुए, 6 की हालत गंभीर
कोटा के न्यू मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में गत सोमवार को अस्पताल के ओटी में 12 महिलाओं के सीजेरियन आॅपरेशन हुए थे। इनमें से 6 की आॅपरेशन के बाद हालत बिगड़ गई। इन महिलाओं को बोलत भी चढ़ाई गई और एंटी बायोटिक्स भी दी गई थी।
महिला की मौत के बाद जागे चिकित्सक व स्टाफ
परिजनों ने बताया कि मंगलवार की सुबह एक महिला की मौत हो गई। इसके बाद ये डॉक्टर्स और स्टाफ हरकत में आया। जांचें हुई, ट्रीटमेंट शुरू किया गया। बाद में कहा गया कि किडनी में दिक्कत है। फिर एक के बाद एक पांचों महिलाओं को रात में एसएसबी ब्लॉक में शिफ्ट किया गया।
जांच के बाद ही सामने आएगा वास्तिविक कारण
प्रिसिंपल डॉ. नीलेश जैन ने बताया कि हम अलग-अलग कारण मान रहे हैं, लेकिन उनके काट भी सामने आ रहे हैं। मान लें कि फ्लूड या दवाइयों की वजह से ऐसा हुआ है तो अन्य मरीजों में इसका असर क्यों नहीं हुआ। ऐसे में स्पष्ट कारणों का पता नहीं चल सकता। जांच के बाद ही कारण स्पष्ट हो सकेंगे। एक मरीज पायल की मंगलवार सुबह मौत हो गई थी। उसकी जांच के लिए भी टीम गठित की गई है। हमारे लिए भर्ती मरीजों को रिकवर करना जरूरी है। तीन से चार दिन तक निगरानी में रखना जरूरी है, क्योंकि अभी इन्हें खतरे से बाहर नहीं कहा जा सकता है। गायनिक वार्ड को भी खाली करवा लिया है और इंफेक्शन की आशंका के चलते उसे भी सैनेटाइज करवाया गया है।

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